आसान नहीं होता नरेन्द्र मोदी होना…

आईआईटी कानपुर के निदेशक हैं प्रोफेसर अभय करंदीकर। इस देश में आप्टिकल फाइबर केबल बिछाने का जो प्रोजेक्ट चल रहा है, उसके हेड हैं। उन्होंने मेरे बड़े भाई से बातचीत में कहा कि देश के नौकरशाह नरेन्द्र मोदी को मिलने से घबराते हैं।

क्यों…. क्योंकि इस परियोजना से संबंधित कई तीखे और ज्वलंत प्रश्नों का उन्हें सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, प्रश्नों के उत्तर पर उन्हें प्रतिप्रश्न भी करना आता है। जो कर्मठ और ईमानदार नौकरशाह हैं वे मोदी के अनन्य प्रशंसक हैं और जो निखट्टू घूसखोर हैं वे अनन्य निंदक।

दो दिन पहले ही उद्योगपति डालमिया को सुन रहा था कि किस तरह से नरेन्द्र मोदी ने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें नई परियोजनाओं के लिए प्रोत्साहित किया। आज नरेन्द्र मोदी देश में विकास के प्रति एक अभूतपूर्व जागरण लेकर आए हैं। देश को आगे ले जाने की उत्कट अभिलाषा एक बड़े समूह में आई है।

विकास कार्यों के बीच में घुसपैठ करने वाले बिचौलिए बहुत कम हो रहे हैं और यह आदमी निरंतर जागृत होकर सब देख रहा है कि क्या काम हुआ, क्या बाक़ी रहा। कहां कमी रही, कैसे सुधार होगा। ऐसा नेता बड़े सौभाग्य से मिलता है। ऐसा देशभक्त प्रशासक विरला ही होता है। ऐसा जुनूनी कार्यकर्ता मैंने नहीं देखा। जो लोग मोदी को फेंकू और मूर्ख समझते हैं वो सब समय के साथ फेंके जाएंगे।

सबसे विलक्षण पहलू तो यह है कि जिस देश की राजनीतिक संस्कृति को कांग्रेस और उसके पट्ठों ने सड़ा कर लूट खसोट पर केंद्रित कर डाला। जिसे गुंडों का आसान क्षेत्र घोषित कर दिया उसे मोदी ने राजनीतिक कर्तव्य निष्ठा और जनता के प्रति जवाबदेही में बदल डाला है। यह उन्होंने सिर्फ़ चार वर्ष में कर दिखाया है जो बहुत ही दुष्कर था।

देश को बार बार ऐसे मौके नहीं मिलते। इसे गंवाकर वह अनंत पाताल में गिरेगा। नरेन्द्र मोदी वह नेता नहीं जिसे हम देखते आए हैं। नरेन्द्र मोदी भारत में राजनीतिक परिवर्तन के प्रतीक पुरुष हैं… उन्हें सलाह देने का स्वागत है। निंदा भी स्वीकार्य है परंतु फर्ज़ी ज्ञान और नोटा वोटा नहीं चलेगा। राजनीति में बने रहने और सत्ता के लिए थोड़ी राजनीति तो करनी ही होगी। वह मोदी करेंगे। उसे स्वीकार करना होगा….

रे फकीरा मान जा….

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