पैट्रोल कीमतों पर शोरगुल से फायदा किसका, आप का, मेरा या विपक्ष का?

मेरी काम की जगह मेरे घर से कुछ 14 किमी दूर है। आते-जाते राउंड फिगर 30 किमी हो जाता है।

इस सफर को मैं महीने के 26 दिन करता हूँ। कुल मिला कर 780 किमी। इसे राउंड फिगर 800 कर लीजिए।

मेरा स्कूटर लगभग 50 किमी प्रति लीटर का एवरेज देता है। सो 800 किमी के 16 लीटर हुए।

1 जनवरी से अब तक पेट्रोल महाराष्ट्र में (मुंबई के आंकड़े) रु. 77.87/- से 89.44/- तक बढ़ गया है। यानि रु. 11.57/- की बढ़ोतरी। राउंड फिगर 12 कर लीजिए। प्रतिशत में यही बढ़ौतरी 14.85% होती है। राउंड फिगर 15% कर लीजिए।

16 लीटर के किए यह बढ़ोत्तरी रि. 192/- हुई। राउंड फिगर रु. 200/- कर लीजिए।

यानि कुल मिला कर मेरे महीने के खर्च में पैट्रोल के दाम बढ़ने से महीना रु. 200/- का इज़ाफा हुआ है।

कच्चे तेल के दाम 1 जनवरी 2018 को $66.65/- प्रति बैरल थे। 13 सितम्बर को वही दाम $77.66/- थे। यानि $11.01/- की बढ़ोतरी। प्रतिशत में 16.51%, राउंड फिगर 17% कर लीजिए।

तो अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम बढ़े 17%, और आप पर बोझ बढ़ा 15%, है न?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि तेल के दाम के दैनंदिन चढाव-उतार उस के हाथ में नहीं है, तेल कम्पनियाँ अपने आप कच्चे तेल के दाम के हिसाब से तय करती हैं। ऊपर आप ने देखा कि यह बढ़ोतरी सही अनुपात में हो रही है।

हाँ, तेल पर बहुत से कर लगे हैं। कुछ हिस्सा केंद्रीय करों का है, कुछ हिस्सा राज्य करों का। यहाँ कुछ स्पष्टीकरण देने लायक है।

जी एस टी लागू हुआ तब कांग्रेस ने हर कदम पर अड़ंगा डालने की कोशिश की, जब कि इस कर की कल्पना प्रथमतः उस के ही राज में की गई।

कई सारे आक्षेप उठाए गए। इन में यह बात भी थी कि यदि पेट्रोलियम उत्पादों पर जी एस टी लगा दिया गया तो उन पर राज्यों का कर नियंत्रण छूट जाएगा। एक तय अनुपात में राज्य और केंद्र कर लगने लगेंगे। अमूमन यह अनुपात 50:50 होता है।

लेकिन लगभग सभी राज्य सरकारें तेल पर अत्यधिक कर लगाती है, जो केंद्रीय करों से कहीं अधिक होता है। इस कारण कुछ प्रदेशों में तेल महँगा तो कुछ में सस्ता है।

यही कारण है कि हम बेचारे नॉएडा वासी जब भी दिल्ली जाते हैं तो टंकी फुल करके लौटते है – दिल्ली में राज्य कर कम हैं। गोवा के आसपास वाले भी इन्हीं कारणों से ऐसा ही करते हैं।

अब यदि पेट्रोलियम उत्पाद पर जी एस टी लगना है तो सभी राज्यों की सहमति आवश्यक है। भाजपाई राज्य तो केंद्र के डंडे के सामने झुक कर स्वीकार कर लेंगे, पर कांग्रेस के गिने चुने राज्य जैसे कर्णाटक और पंजाब भला क्यों मानेंगे, और अपना राजस्व पर नियंत्रण खो देंगे? वे तो विरोध करेंगे ही, और कर रहे हैं! कृपा यहीं पर अटकी है!

खैर कुल मिला कर इस साल पैट्रोल के दामों में बढ़ोतरी मेरे लिए बस रु. 200/- प्रति माह है। यह एक पिज़्ज़ा के दाम से भी कम है, एक बर्थडे केक के दाम के आधे से कम हैं। मेरे वर्तमान मासिक वेतन का मात्र 0.4% है। आम लोगों के लिए भी कमोबेश यही आंकड़े होंगे, मैं आम आदमी ही हूँ!

अब इतनी सी बात के लिए हो हल्ला मचा कर आप खुद का समय ज़ाया करते तो हो ही, पर और महत्त्वपूर्ण मुद्दों से खुद का और समाज का ध्यान हटा देते हो। जब ऐसा होता है तो फायदा किसका होता है? आप का, मेरा? या विपक्ष के ओछे उद्देश्यों का?

सोचिए! और छोटी बातों पर कसमसा कर, तिलमिला कर प्रधानमंत्री मोदी को गाली देना बंद कीजिए। यदि 2019 में विपक्ष वाले आए तो इस कदर नोच खाएंगे कि मोदी फरिश्ता नज़र आने लगेगा, पर तब तक देर हो चुकी होगी।

संदर्भ :

Crude Oil Brent US Dollars per Barrel

Petrol Price in Mumbai

ऐसे ही रौंदे जाएंगे, अपने अस्तित्व और आस्था की रक्षा के लिए उठ खड़े नहीं होने वाले

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