स्वाधीनता उपरांत लगभग लगातार शासन करके काँग्रेसियों ने दी थी यह प्रगति!

भारत में भयंकर गरीबी दिखाई देती है। फुटपाथ पर, पुल पर, पुल के नीचे लोगों का ‘घर’, ढाबे पे काम करने वाला ‘छोटू’, कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करती गर्भवती महिलाएं, आँखे और गाल अंदर धंसे हुए जर्जर पुरुष, कष्टदायक कुपोषण से जूझ रहे शिशु और बच्चे, मध्यमवर्गीय घरों में झाङू-पोछा, बर्तन मांजने वाली किशोरियां और महिलाएं। गाँव-देहात में तो और भी भीषण गरीबी है।

भारत की सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना – 2011 के अनुसार लगभग 75 प्रतिशत या 13.34 करोड़ ग्रामीण परिवार 5000 रुपये की मासिक आय पर जीवन-यापन करते थे (यह आंकड़े वर्ष 2011 के है)।

यानी कि एक परिवार में 5 सदस्य के औसत से लगभग एक परिवार प्रतिदिन 170-175 रुपये, या फिर 67 करोड़ लोग प्रति व्यक्ति प्रति दिन के हिसाब से 35 रुपये में गुजारा चलाते थे। शहर में गरीबों की संख्या 11 करोड़ के आस-पास थी।

कुल मिलाकर 78 करोड़ भारतीय गरीबी में गुज़ारा कर रहे थे। गरीबी रेखा के नीचे या ऊपर की बात छोड़ दीजिये।

चूंकि कुछ लोग सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना को प्रामाणिक नहीं मानते, अतः विश्व बैंक के आंकड़े ले लेते हैं जिसके अनुसार वर्ष 2012 में 27 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा के नीचे रह रहे थे।

स्वतंत्रता के बाद लगभग लगातार शासन करने के बाद यह प्रगति दी थी काँग्रेसियों ने।

एक छोटा सा टेस्ट करिये। आपके घर जो कामवाली किशोरी या महिला आती है उससे पूछिए कि वह कितने घरों में काम करती है, परिवार में कितने सदस्य है और सब मिलाकर कितना कमा लेते है। बीमार पड़ने पर भी क्या उन्हें पारिश्रमिक मिलता है? बीमारी में क्या खर्चा होता है? म्युनिसिपेलिटी, पुलिस और स्थानीय गुंडे झुग्गी-झोपड़ी में रहने का कितना पैसा घूस में ले जाते है। फिर स्वयं उनकी आय का अनुमान लगाइये और स्वयं से पूछिए कि सरकार को क्या करना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी का योगदान यह है कि उनके प्रयासों से ऐसे भारतीयों की संख्या घटकर अब 6.6 करोड़ रह गयी है। अब पहली बार भारत से अधिक निर्धन व्यक्ति किसी अन्य देश (नाइजीरिया) में है। और विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार वर्ष 2022 में केवल 1.5 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा के नीचे रह जाएंगे।

अब हम इस बात पर भुनभुना तो सकते है कि फलाने को स्कॉलरशिप क्यों दी गयी, ढिकाने को नई योजनाओं के तहत मुफ़्त का पैसा क्यों बाँटा जा रहा है, उज्जवला क्यों, मुद्रा क्यों, जन-धन क्यों, आधार क्यों?

लेकिन इन्ही योजनाओं से भारतीयों को भीषण गरीबी से बाहर निकाला जा रहा है। मुझे गर्व है कि मेरे राष्ट्र का नेतृत्व नरेंद्र मोदी जैसे दूरदर्शी और सह्रदयी व्यक्ति के सशक्त हाथों में है।

भारत में हमारी आंखों के सामने हो रहे हैं क्रांतिकारी परिवर्तन

 

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