नेशनल हेराल्ड – तिगुनी परेशानी!

मीडिया द्वारा लोगों को ऐसे जताने की कोशिश हो रही है कि नेशनल हेराल्ड केस भाजपा के द्वारा डॉ सुब्रमण्यम स्वामी को मोहरा बना कर गांधी परिवार को परेशान करने की साजिश है।

वास्तविकता क्या है? इसे समझने का प्रयास करेंगे। इसे पूरा पढ़ने के बाद आप खुद तय कर लीजिए कि यह साज़िश है या वाकई भ्रष्टाचार हुआ है।

जिसे आम तौर पर ‘नेशनल हेराल्ड केस’ कहा जाता है, उस में तीन तरह के मामले शामिल हैं। एक एक कर इन तीनों की जानकारी आप को देता हूँ –

1. डॉ. स्वामी द्वारा दायर आपराधिक मामला

‘नेशनल हेराल्ड केस’ का आरम्भ होता है डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर एक आपराधिक मामले से!

नेहरू के जमाने से नेशनल हेराल्ड अख़बार कांग्रेस का मुखपत्र था। इसे कई प्रमुख शहरों में बड़ी बेशकीमती ज़मीन सरकारी अनुग्रह के कारण कौड़ी के दामों में अखबार के काम के लिए आवंटित थी।

जैसे आम तौर पर होता है, कांग्रेस के हाथ लगे हर अच्छे काम की तरह नेशनल हेराल्ड भी घाटे में चला गया। उसे चलाते रहने के लिए कांग्रेस पार्टी ने इसे 90.25 करोड़ रूपए कर्ज के तौर पर दिए।

2008 में नेशनल हेराल्ड चल पाने की स्थिति में नहीं रहा, और बंद कर दिया गया। उस के बाद उस 90.25 करोड़ के ऋण की अदायगी संभव नहीं थी।

यंग इंडियन नाम से एक नॉन प्रॉफिट यानि बगैर लाभ के चलने वाली कंपनी की स्थापना 22 नवम्बर 2010 को की गई। इस में सोनिया गांधी 38% राहुल गांधी 38% के मालिक थे, और बाकी 24% इन के पिठ्ठुओं का हिस्सा था। यानी कंपनी का मालिक गाँधी परिवार था।

कांग्रेस ने नेशनल हेराल्ड चलाने वाली असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) से कहा कि हमें बस 50 लाख दे दें, और बाकी ऋण यंग इंडियन के नाम कर दें। इस का अर्थ यह हुआ कि कांग्रेस ने 89.75 करोड़ रुपयों का नुकसान सहन किया। और इस कीमत के शेयर एजेएल ने यंग इंडियन को दिए।

इन शेयर्स का अनुपात एजेएल के कुल शेयर्स का 99% है। इस व्यवहार के साथ एजेएल के हजारों करोड़ (कम से कम 2000, और अधिकाँश अनुमानों के अनुसार 5000 करोड़) की जायदाद का मालिक गांधी परिवार हो गया, बगैर एक कौड़ी खर्च किए! इसे कहते है हींग लगे न फिटकरी, रंग चोखा ही चोखा!

डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी का आरोप है कि इस व्यवहार में क़ानून की धज्जियाँ उड़ाई गई हैं, और पूरा मामला आपराधिक श्रेणी में आता है।

इस पर कांग्रेसियों ने दलील दी कि डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी का इस मामले से कोई सम्बन्ध नहीं है, अतः उनको किसी मामले को उठाने का कोई हक़ नहीं है।

कोर्ट ने इस पर कहा कि डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी भारतीय नागरिक है, और कांग्रेस भारत की एक राजनीतिक पार्टी है। इतना इस मामले को दर्ज करवाने के लिए पर्याप्त है। इस बात को सर्वोच्च न्यायालय तक घसीटा गया, लेकिन राहत नहीं मिली!

जब यह तय हो गया कि डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर शिकायत जायज़ है, तो कोर्ट ने कहा कि इस पर मामला दर्ज हो कर केस चलना चाहिए।

उस के बाद सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ऑस्कर फर्नांडिस, मोतीलाल वोरा, सैम पित्रोदा और सत्येन दुबे (सारे कांग्रेसी) पर आरोपपत्र दर्ज कर दिया गया। ये सारे आज ज़मानत पर रिहा हैं। फिलहाल डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी का बयान दर्ज हो रहा है और अगली तारीख 17 सितम्बर, सोमवार को है।

सम्मन जारी करते हुए न्यायालय ने कहा कि इस मामले में आपराधिक व्यवहार होने के लक्षण दिखाई देते हैं।

2. यंग इंडियन इन्कम टैक्स केस

दूसरा मामला आयकर से सम्बद्ध है – ‘एजेएल’ द्वारा यंग इंडियन को जारी शेयर फेस वैल्यू पर दिए गए। आयकर नियमों के अनुसार उन्हें बाजार की कीमत पर देना जरूरी था। इस हिसाब से फेस वैल्यू और बाजार मूल्य के बीच का फर्क गांधी परिवार के सदस्यों के आय में जोड़ दिया जाता है, ऐसा आदेश 27 दिसंबर 2017 को जारी हुआ।

यंग इंडियन पर 414 करोड़ रुपयों का डिमांड नोट जारी किया गया है। ऊपर से 249 करोड़ का जुर्माना ठुका है सो अलग। इस पर आयकर ट्रिब्यूनल ने भी मुहर लगाई है। यह केस भी अब उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के चक्कर काटेगा!

3. सोनिया और राहुल के विरुद्ध आय छुपाने के सम्बन्ध में कार्रवाई

जब यंग इंडियन काण्ड और उस में गाँधी परिवार की संलिप्तता उजागर हुई, तब आयकर विभाग ने 2011-12 की गाँधी परिवार की आयकर की संचिकाएँ फिर खोली, और शेयर की कीमत में जो फर्क है, उससे सम्बद्ध आय छुपाने के कारण नोटिस जारी किया है।

गांधी परिवार ने न्यायालय से कहा कि भई हम तो मालिक है, ये क्या नोटिस वोटिस लगा रखा है, इसे दफा करो! दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस केस को ख़ारिज करने की मांग ठुकराई। सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसे ठुकराया है। इस निर्णय के जो 48 पन्ने हैं, उनमें दर्ज टिप्पणियां गाँधी परिवार को मुश्किल में डालने की क्षमता रखती हैं।

आयकर के नियमों के कुछ प्रावधान है, जिनमें जहां प्रत्यक्ष पैसा न मिला हो, वहां भी आय मानी जा सकती है। इसे कानूनी भाषा में Deeming Fiction कहा जाता है।

सरल भाषा में समझाएं तो यदि किसी ने 50 हजार का सोने का हार आप को 5 हजार में दिया, तो बचे 45 हज़ार भी आप की आय में जोड़े जा सकते हैं, क्यों कि हार का वास्तविक मूल्य 50 हजार था, जिसे आप को 5000 में दिए जाने से आप को 45 हजार का अप्रत्यक्ष लाभ हो गया है।

ऊपर दर्ज मामले क्रमांक – 2 और 3 इसी प्रावधान पर आधारित हैं।

उपरोक्त तीनों प्रकरण न्यायप्रविष्ट हैं और यदि इन में दम न होता तो इतने समय तक टिके न रह पाते। मैंने बस आप को वर्तमान स्थिति से अवगत कराया है।

एक बात ध्यान रखें कि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी दोनों ही करोड़ों रुपयों के आर्थिक अपराधों के आरोपी है और फिलहाल ज़मानत पर चल रहे हैं। ऐसे दाग़ी व्यक्ति को काँग्रेस ने प्रधानमन्त्री पद का प्रत्याशी बना रखा है। सारे मोदी विरोधी राहुल गाँधी के समर्थन में खड़े हो कर हुआँ-हुआँ कर रहे हैं, उस के (नदारद) गुणों के कसीदे पढ़ रहे हैं, उस के कायल हुए जा रहे हैं।

आम आदमी इन बातों को छिटपुट मामला मान कर छोड़ देता है। लेकिन यह बड़े संगीन अपराध हैं।

इन सब संदिग्धों को यदि जेल भेजना है तो एक ही मार्ग है – फिर एक बार मोदी सरकार

लेखक : आनंद देवधर

मूल मराठी से अनुवाद : कृष्ण धारासूरकर

डगर कठिन है प्यारे, ज़रा झूम कर, ज़रा जोश में चल, तभी कुछ हो पाएगा

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