क्या आप सुपरवुमन हैं या फिर एक सुपरवुमन बनने के लिए प्रत्यनशील हैं?

5 बजे सुबह का अलार्म
नींद से बोझिल आँखें और अलसायी हुई देह…
लगा कि पंद्रह से बीस मिनट और झपकी ले ले, लेकिन अचानक ख़याल आया कि उठने में ज़रा सी भी देर की तो फिर बच्चों का टिफ़िन बनाने में देर हो जायेगी। और फिर आज तो बच्चों का मनपसन्द वेज फ्रैंकी भी तो बनाना है ना..

बस इसी एक ख़याल से धड़ल्ले से बिस्तर से उठ बैठी, तुरत फुरत बच्चों को उठाया, तैयार किया, टिफ़िन तैयार किया, बच्चों को स्कूल भेजकर जल्दी से पतिदेव को बेड टी पकड़ाया और खुद तेज़ी से किचन की तरफ रुख किया..

पतिदेव और खुद का टिफ़िन तैयार करके फिर तेज़ी से नहाने के लिए बाथरूम की राह पकड़ी..
जल्दी जल्दी नहाकर, तैयार होकर, एक कॉफ़ी का प्याला तेज़ी से गटका, और फिर लैपटॉप को कार में पटका…

गीले बालों को सुखाने का वक़्त भी नहीं था.. आज ऑफिस में बॉस के सामने एक ज़रूरी प्रेजेंटेशन भी तो था ना.. तेज़ी से भारी ट्रैफिक के बीच, कार भगाते हुए नियत समय से 5 मिनट पहले ऑफिस पहुंची..

केबिन में पहुंचकर, एक कप कॉफ़ी मंगाई और फिर एक वेज फ्रैंकी के साथ, तेज़ी से कॉफ़ी का प्याला ख़त्म किया.. प्रेजेंटेशन अच्छा गया था। खूब तारीफ भी हुई।

दिनभर ऑफिस में भागदौड़ करते हुए सर भी दर्द करने लगा था, लेकिन अभी तो घर पहुंचकर बच्चों को एक्टिविटी क्लास भी तो लेकऱ जाना है ना। रास्ते से घर के लिए ज़रूरी सब्ज़ी और सासु माँ की जोड़ों के दर्द की दवाई भी खरीदी।

घर पहुंचकर जल्दी से वर्कआउट के कपड़ों में चेंज किया और बच्चों को एक्टिविटी क्लास में छोड़ने के बाद खुद जिम की ऒर रुख किया.. तकरीबन सवा घंटे वर्कआउट के बाद, बच्चों को एक्टिविटी क्लास से पिक किया.. लौटते हुए उन्हें स्टेशनरी की दुकान से स्कूल का सामान दिलवाया.. छोटा आइसक्रीम की ज़िद करने लगा तो दोनों बच्चों को आइसक्रीम भी दिलाई।

घर पहुंचकर खाना बनाने के पहले पंद्रह बीस मिनट सुस्ताने के लिए लेटी, तो ध्यान आया कि अगले सप्ताह ननंद आनेवाली है। उनके और उनके बच्चों के लिए कपड़े खरीदना तो भूल ही गयी। खैर, कल ध्यान से ज़रूर ले लूंगी।

थोड़ा सुस्ताने के बाद रात का खाना बनाने में जुट गयी। बच्चों को किचन के पास की डाइनिंग टेबल में बैठाकर होमवर्क भी करवाती जा रही थी और साथ ही साथ, बीच बीच में उनका झगड़ा भी सुलझाती जा रही थी।

खाना बनाने और खिलाने के बाद अब पैर फैलाने का वक़्त मिला, तो अपने मोबाइल में दिनभर से आये व्हाट्स एप्प मेसेजेस और फेसबुक पर नज़र दौड़ाई।

ध्यान आया कि सारे दिन में माँ बाबूजी और सास ससुर का हालचाल नहीं लिया। उनसे फ़ोन लगाकर बात की।

फिर किचन समेटा, सुबह के नाश्ते और टिफ़िन की तैयारी की और दही जमाने के लिए रखा।
बच्चों और खुद का अगले दिन के लिए, ड्रेस प्रेस किया..

मुंह धोकर, ब्रश करके, अपनी नाईट टाइम क्रीम और अंडर ऑय जेल लगाया, फिर बिस्तर की राह पकड़ी..
सर ज़ोरों से अभी भी दर्द कर रहा था, और शरीर थककर चूर हो चुका था। और एक बार फिर से,
अगले दिन सुबह 5 बजे के अलार्म के इंतज़ार में..

तो बस, इत्ती सी है रोज़मर्रा की दिनचर्या.. इसके साथ बाई, दूधवाले और प्रेसवाले का हिसाब..
धोबी के कपड़े निकालना, बाई को पति के इलाज के लिए एडवांस देना… माँ बाबूजी और सास ससुर का डॉ के पास चेकअप, पति के और अपने ऑफिस की ज़रूरी पार्टीज, कुछ सामाजिक कार्यों में हिस्सेदारी, बच्चों की स्कूल की फीस, पैरेंट टीचर मीटिंग्स,और घर की सजावट और रखरखाव…

बस इसी तरह से तेज़ी से ज़िन्दगी निकली जा रही है.. लेकिन वक़्त कहाँ है रुकने का और सोचने का। ढेरो काम, दर्जनों ज़िम्मेदारियाँ जो अपने सर पर ओढ़ रखी हैं।

रुक क्यों गयीं?
कहीं ये ज़िन्दगी आप जैसी “सुपर वुमन” की ज़िन्दगी तो नहीं ना??
लेकिन क्या आप इस तरह की ज़िन्दगी से, दिल से वाकई खुश हैं और क्या सभी ज़िम्मेदारियों के साथ पूरा पूरा न्याय कर पा रही हैं??
हाँ या नही??अगर नहीं तो क्या किया जाए??
चलिए अब इसी पर चर्चा करते हैं।

1. सर्वप्रथम घर परिवार की सारी ज़िम्मेदारियाँ खुद ओढ़ लेने की बजाय, बांटना सीखिए।
बच्चे अगर छोटे हों तो उन्हें अपना कमरा समेटने, कपड़े ठीक से रखने, बैग जमाने और डाइनिंग टेबल सेट करने जैसे छोटे छोटे काम सौंपे। अगर बच्चे किशोर हो गए हैं या और बड़े हैं, तो बाहर का रोज़मर्रा का सामान खरीदने की ज़िम्मेदारी भी उन्हें सौंपे। अपने छोटे मोटे काम स्वयं करने की आदत बनाएं। ज़रुरत के लिए चाय, नाश्ता बनाना भी सिखाएं। आपके ऐसा करने से आपका काम का बोझ तो कम होगा ही होगा, साथ ही बच्चे आत्मनिर्भर और स्वावलंबी भी बनेंगे और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। आगे जब वो बाहर की दुनिया में कदम रखेंगे तो उनको कम दिक्कत और आपको कम चिंता भी रहेगी।

2. स्वयं “वन मैन आर्मी” बनने की बजाय, घर और बाहर की थोड़ी ज़िम्मेदारियाँ, पति से भी लेने का आग्रह करें। उदाहरण के तौर पर घर के ज़रूरी बिल्स को जमा करने की जिम्मेदारी, बच्चों को सुबह सवेरे तैयार करने में मदद करना, दोनों तरफ के माता पिता के स्वास्थ का बीच बीच में हालचाल लेना और ध्यान रखना वगैरह वगैरह..

याद रखिए, घर परिवार, दोनों तरफ के माता पिता और बच्चे, जितने आपके हैं, उतने ही आपके पति के भी हैं। इसीलिए ज़िम्मेदारी निभाने में सहयोग करने के लिए प्रेमपूर्वक आग्रह ज़रूर करें।

3. थोड़ा सा वक़्त अपने शारीरिक रखरखाव और मानसिक स्वास्थ के लिए भी अवश्य निकालें। ध्यान, योगा, प्राणायाम का सहारा लेकर चित्त को शांत रखने का प्रयास करें। अगर इतनी सारी ज़िम्मेदारियाँ निभाते हुए आप परेशान और चिड़चिड़ी हो जाती हैं, तो ज़िम्मेदारियाँ ज़रूर बाँटिये। खुद के स्वास्थ को भी प्राथमिकता लिस्ट में अवश्य रखें। याद रखिए, जब आप स्वयं स्वस्थ रहेंगी, तभी आप घर परिवार के कामों की तरफ पूरा न्याय कर पाएंगी।

4. अपनी एक हॉबी ज़रूर कायम करें। संगीत, लिखना, पढ़ना, पेंटिंग, घूमना, फोटोग्राफी कुछ भी, कुछ भी। इससे आपको तनावमुक्त रहने में बहुत मदद भी मिलेगी और आप स्वयं भी खुश रह पाएंगी। हफ्ते का एक दिन या एक समय सिर्फ और सिर्फ अपने लिए ज़रूर निकालें। इस दिन पति को घर की ज़िम्मेदारियाँ संभालने के लिए कहिये। इससे आपका काम भी कम होगा, आप स्वयं तनावरहित भी होंगी और पतिदेव को आपके काम और आपकी कीमत भी समझ आएगी।

5. घर, परिवार, ऑफिस, रिश्ते, सब जगह अपने काम और ज़िम्मेदारियों को पूरी पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश करें। लेकिन लोगों की अपेक्षाओं को पूरा ना कर पाने का मलाल दिल में ना बैठाएं। याद रखिये, लोग तो मर्यादा पुरुषोतम राम भगवान् से भी खुश ना रह पाए थे। याद रखिए, ना तो आप एक वक़्त में सभी लोगों को खुश रख सकते हैं और ना ही एक ही व्यक्ति को हमेशा खुश रख सकते हैं। इसीलिए लोगों की अपेक्षाओं के बोझ तले हीनभावना से ग्रस्त होने की बजाय, अपना कार्य बस इमानदारी से करें।

6. आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण, खुद से प्यार करना सीखें और अपना आत्मसम्मान भी बनाएं रखें। आपके साथ कुछ गलत हो तो उसके खिलाफ आवाज़ उठाने की और उसका विरोध करने की हिम्मत भी ज़रूर रखें।

याद रखिए, आप जैसी हैं, वैसी ही अंदर बाहर दोनों से बेहद खूबसूरत हैं। इस खूबसूरती को कायम रखिए। अपने से प्यार कीजिये, आत्मविश्वास लाइये, और मुस्कराहट के साथ, तनावरहित होकर इमानदारी के साथ घर और बाहर की ज़िम्मेदारियाँ उठाईये।

लेकिन,”सुपरवूमन” बनने के चक्कर में, खुद को दूसरों की अपेक्षाओं के बोझ तले दबाकर ख़त्म ना करें।

क्योंकि आप खुश हैं, और आप “आप” हैं, तभी आपका घर, परिवार और बच्चे हैं..

– श्रुति अग्रवाल

Multitasking : कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा

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