यदि बाकी चीज़ों की महंगाई स्थिर है तो फिर पेट्रोल-डीज़ल बड़ा मुद्दा क्यों?

पेट्रोल डीज़ल सस्ता होना चाहिए, इसपर टैक्स नहीं लगना चाहिए…

क्यों भला?

हम सब बिना सोचे समझे दुहराते हैं। क्या पेट्रोल डीज़ल जीवन की मूलभूत आवश्यकता है? क्या यह पेट भरने के लिए ज़रूरी है या बीमारी की दवाई है?

आपके बजट का कितना हिस्सा पेट्रोल-डीज़ल पर जाता है? अगर बहुत ज्यादा जाता है तो शायद हम अपनी औकात से बाहर चल रहे हैं। खर्च कम कीजिये, जहाँ पैदल या साईकल से जा सकते हैं वहाँ कार मत निकालिए।

कल तक यह तर्क था कि डीज़ल का दाम बढ़ता था तो हर चीज की महंगाई बढ़ती थी। पर अगर बाकी चीजों की महंगाई स्थिर है तो फिर अकेला पेट्रोल-डीज़ल क्यों बड़ा मुद्दा है?

सन 1800 में अमेरिका में पहली बार व्हिस्की पर टैक्स लगा था, तब वहाँ विद्रोह हो गया था। पर तब से शराब पर टैक्स जारी है, और पूरी दुनिया में लगता है। शराब और सिगरेट की तरह पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स लगना ही चाहिए।

पहला इसलिए कि पेट्रोलियम पदार्थ एक सीमित संसाधन है। इसके खर्च को कम करने के लिए इसके प्रयोग पर टैक्स लगाना एक सही कदम है, इकॉनमी के लिए और पर्यावरण के लिए भी।

दूसरे इसलिए कि इसे आप कितना खर्च करते हैं, यह सीधा सीधा आपकी आर्थिक स्थिति से जुड़ा है।

सबसे गरीब आदमी साईकल से चलता है, उसके लिए यह मुद्दा नहीं है। निम्न मध्यम वर्ग स्कूटर, स्कूटी, 100 सीसी बाइक से चल रहा है। सामान्य वर्ग मारुति ऑल्टो से चल रहा है।

धनाढ्य वर्ग जो 3 लीटर क्षमता वाली परफॉर्मेंस एसयूवी से चल रहा है उसका तो शिकायत करने का अधिकार ही नहीं है।

यानी आपका पेट्रोल का खर्च सीधा आपकी आर्थिक स्थिति से जुड़ा है और यह टैक्सेशन के लिए आदर्श स्थिति है।

काँग्रेस के समय भी पेट्रोल डीज़ल की कीमतें बढ़ने का विरोध हुआ है, पर यह विरोध डीज़ल की कीमतों के साथ सामान्य महंगाई बढ़ने की समस्या से जुड़ा था। अगर सिर्फ डीज़ल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हों, अन्य आवश्यक सामग्री का मूल्य स्थिर हो तो यह विरोध सिर्फ बिना सोचा समझा स्टंट है।

हाँ, दूसरा मूल प्रश्न अभी भी है… सरकार आपसे टैक्स ले तो रही है, पर उसका कर क्या रही है? क्या वह स्विस बैंक में जा रहा है? क्या उसे डिफॉल्टर्स को बाँट रही है या उनसे वसूल रही है? क्या इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है? क्या मूलभूत सुविधाओं के क्षेत्र में सुधार दिख रहा है? क्या सेनाओं को हथियार से सुसज्जित किया जा रहा है?

यह नहीं कह रहा कि अपनी चुनी हुई सरकार से सवाल मत पूछिए? पर सही सवाल पूछिये। विरोध कीजिये… सही जगह कीजिये। मदरसों में कंप्यूटर लगा कर हाई-टेक आतंकी तैयार करने का विरोध कीजिये। सिर्फ मुस्लिम लड़कियों को वजीफा दिए जाने का विरोध कीजिये। हम टैक्स दे रहे हैं, जज़िया नहीं…

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