2019 में 50% वोट लेने का लक्ष्य

फेसबुकिया कमेंटबाज़ी में जब कोई पॉलिटिकल उम्मी (उम्मी मने अबोध… इतना अबोध जैसे नवजात शिशु)… पॉलिटिकल उम्मी वो फेसबुकिया होता है जिसको पता तो भारत के कुल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या का भी नहीं, पर वो ट्यूशन देता है मोदी और अमित शाह को…

किस विषय की ट्यूशन? How to win elections… यानी कैसे जीतें चुनाव।

अरे गधों… ज़िंदगी में कभी अपनी क्लास की मॉनिटरी नहीं लड़े और ट्यूशन पढ़ाते हैं अमित शाह और मोदी जी को!

खैर कोई बात नहीं… लोकतंत्र है और अपन लोग कोई बंगाल में थोड़े न रह रहे हैं… कोई भी, कुछ भी लिखने पढ़ने बोलने के लिए स्वतंत्र है।

तो कुछ लोग टिप्पणी करते हैं कि मोदी जी कितना भी प्रयास कर लें, मीमटे भीमटे और अहीर कभी वोट नही देंगे।

राजनीति में ऐसे नहीं सोचा जाता…

2014 से पहले तो उत्तरप्रदेश में भाजपा का सिर्फ 15% वोट था… तो फिर आखिर 44% कहां से हो गया? आखिर ये 29% नए वोटर कहाँ से आये?

ये आए सोशल इंजीनियरिंग से… भाजपा संगठन ने एक एक वर्ग – जाति – उपजाति को चिह्नित किया और उसपर मेहनत की।

एक बिरादरी है राजभर… किसी ज़माने में सब कट्टर सपाई होते थे… अच्छी खासी जनसंख्या है पूर्वांचल में… भाजपा ने तोड़ लिया।

उनके एक लोकल नेता हैं ओमप्रकाश राजभर… उनकी एक छोटी सी पार्टी है पीले झंडे वाली… उसको सेट किया।

मनोज सिन्हा ग़ाज़ीपुर के सांसद हैं और रेल राज्य मंत्री हैं… उन्होंने ग़ाज़ीपुर से दिल्ली के लिए सीधी रेल चलाई… सुपरफास्ट… नाम रखा राजा सुहेलदेव राजभर एक्सप्रेस… ये राजा सुहेलदेव जी इस राजभर बिरादरी के आदि पुरुष हैं… उनके सम्मान में भाजपा ने रेल चलाई… आज पूरे यूपी बिहार के राजभर सब कट्टर भाजपाई हैं।

इसी तरह पिछले महीने भाजपा संगठन ने निर्णय लिया कि पूर्वांचल के प्रत्येक जिले में कम से कम एक सड़क का नाम श्री कर्पूरी ठाकुर जी के नाम पर रखा जाएगा।

अब ये कौन हैं कर्पूरी ठाकुर?

70 के दशक में बिहार के समाजवादी नेता हुए हैं, मुख्यमंत्री भी रहे… जाति के नाऊ ठाकुर थे… सो यूपी की नाऊ बिरादरी को रिझाने के लिये उनके नेता का सम्मान किया जा रहा है… उनके नाम पर सड़कों के नाम रखे जा रहे हैं… इसी तरह हर जाति को किसी न किसी तरह रिझाया जा रहा है।

आज तक अम्बेडकर जी बसपा के पेटेंटशुदा नेता थे… उनका सम्मान करने का ठेका सिर्फ बसपा ने उठाया हुआ था… मोदी ने कहा हमऊ करेंगे सम्मान अम्बेडकर जी का…

कांग्रेसियों का पेटेंट था सरदार पटेल पर… कांग्रेस उनको अपनी लौंडी बांदी बना के रखती थी… हमारी लौंडी, हम चाहे जैसे रखें… मोदी ने झटक लिया… अब उनकी प्रतिमा का उद्घाटन करने जा रहे हैं… Statue Of Unity… ये प्रतीकों की राजनीति है।

इसी तरह कोई भी पॉलिटिकल पार्टी अपना वोटरबेस बढ़ाने के लिये प्रयासरत रहती है। अगर ऐसा नहीं करेगी तो धीरे धीरे मर जाएगी, काँग्रेस की तरह…

सवर्ण हिन्दू भाजपा को अपनी बपौती समझ बैठे हैं, किसी अन्य वोटर वर्ग को साथ जोड़ने का प्रयास करे तो इन्हें हजम नहीं होता।

Core vote पार्टी की जान होता है… नींव का पत्थर… वो ठोस होना चाहिए… उसी पर इमारत बुलंद होती है… वो नहीं हिलना चाहिए।

पर उस core vote के ऊपर अगर Top Up नहीं होगा तो core vote मिट्टी में ही दबा रह जायेगा… उसके बाद topping… वो होता है Floating वोट… किसी के प्रति कोई वैचारिक राजनीतिक प्रतिबद्धता नहीं… जिधर की हवा देखी उधर लुढ़क गए…

पार्टी संगठन का काम ही ये है कि वो लगातार अपना political base बढ़ाये… और पुराना सम्हाल के रखे… भाजपा 2019 में 50% वोट लेने का लक्ष्य बना के चल रही है…

ऐसा आज तक कभी नहीं हुआ… 1984 में भी नहीं जबकि इंदिरा की सहानुभूति लहर पर चढ़ के राजीव गांधी 400+ सीट जीते… तब भी उनको 50% वोट नहीं मिला था…

ऐसा कठिन लक्ष्य रखा है भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने… और ये सोशल इंजीनियरिंग के बिना संभव नहीं…

जो पार्टी उत्तरप्रदेश में 15% से 44% पर आ सकती है वो 50 के पार भी जा सकती है… बस प्रयास करते रहें… घन बरसता रहे… उनका वोट बैंक अंदर अंदर टूट रहा है… ईम मीम भीम सीम सब टूटेंगे…

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