क्या सचमुच पैट्रोल की बढ़ती कीमत को लेकर हमें इतना चिंतित होना चाहिए?

दोस्तों, आज कांग्रेस का पैट्रोल की तथाकथित ‘भयंकर कीमत’ के विरोध में ‘भारत बंद’ तो कुछ जगह असफल और कुछ जगह हिंसाग्रस्त पर सफल भी हो गया।

लेकिन क्या सचमुच पैट्रोल की बढ़ती कीमत को लेकर हमें इतना चिन्तित होना चाहिए?

पैट्रोल की बढ़ती कीमत में आधे से अधिक टैक्स की बात हो या GST, या फिर इनकम टैक्स।

जनसाधारण से टैक्स लेना किसी भी सरकार की जरुरत है। आखिर टैक्स से ही सरकार सभी विभागों के सरकारी कर्मचारियों को उनकी सैलरी देती है, उसी टैक्स से सड़क-पुल-बांध-नहर बनते हैं।

उसी टैक्स से हमारी सेना/ सीमा सुरक्षा बल/ पुलिस को भी सैलरी मिलती है। उसी टैक्स से देश की सुरक्षा के लिए सभी तरह के हथियार/ युद्धक विमान और अन्य सामान खरीदा जाता है।

सरकारी स्कूलों – सरकारी अस्पतालों के सभी खर्चे, दुनिया की सबसे सस्ती और सबसे बड़ी रेल नेटवर्क – ऐसे ही सैकड़ों और बहुत जरूरी खर्चों को सरकार आपसे लिये इस टैक्स की बदौलत ही पूरे करती है।

मैडल जीतकर लाने वाले खिलाड़ियों पर खर्चा करना हो या किसी आपदा में किसी राज्य की मदद, मनरेगा जैसी योजना में गरीबों की मदद करनी हो या ऐसा कुछ भी करना हो तो यह सब भी आपके दिये टैक्स के पैसे से ही होता है।

इसलिये, सरकार को आपके लिए सुविधा देनी है – सुरक्षा देनी है तो उसके लिए आपसे टैक्स तो लेना ही होगा।

रही बात पैट्रोल के रेट बढ़ने की, तो क्या यह बात सच नहीं है कि पैट्रोल के यही रेट 2013 में भी हो चुके हैं? जबकि उस समय यूपीए सरकार हर साल लगभग 144 हजार करोड़ की सब्सिडी भी दे रही थी।

और ये सब्सिडी भी कहां से आ रही थी? ये भी तो हम लोग ही बतौर टैक्स दे रहे थे सरकार को। वर्तमान सरकार भी सब्सिडी दे सकती है – पिछली सरकार से ज्यादा सब्सिडी दे सकती है – पर वो पैसा कहां से आयेगा?

आप पर GST या इनकम टैक्स जैसे सभी टैक्स बढा दिये जायेंगे। कोई फायदा होगा आपको इस ‘घुमाकर कान पकड़ने’ का? तो यह बात समझिये कि पैट्रोल का रेट अगर फिर से 2013 वाले हो गये हैं तो आप उस पर सब्सिडी नहीं ले रहे हैं।

तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात। यूपीए सरकार लगातार बड़े स्तर पर बहुत से घोटाले कर रही थी। आप हर चीज पर – खूब सेल्स टैक्स व अन्य टैक्स दे रहे थे – पर क्या सचमुच उस समय आज की चौथाई रफ्तार से भी सड़कें बन रही थीं? क्या गरीबों को मकान और टॉयलेट बनाने में अभी मिल रही मदद का दसवां हिस्सा भी मिल रहा था? क्या आप भूल गये कि भारतीय फौज के पास बेहतर हथियार और युद्धक लड़ाकू विमानों की कितनी ज्यादा कमी हो गई थी?

दोस्तों, यह सरकार पिछली सरकार से कम से कम 10 गुना अधिक काम कर रही है, 100 गुना अधिक ईमानदार है, और 1000 गुना अधिक गरीब लोगों की चिन्ता करती है।

सोचिये, विचारिये और भाजपा व मोदीजी का हृदय से समर्थन कीजिये।

और हां

जय हिंद।

पैट्रोल की बढ़ती कीमतों का सामान्य जनता पर असर

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