भले ही देश के सर्वोच्च पद पर बैठे हों, पर संविधान से बंधे हैं नमो

फेसबुक पर एक भावनात्मक पोस्ट चल रही है राम मंदिर पर… काफी शेयर हुई है… वाकई बढ़िया लिखा था…

अब एक बात उन लोगों से पूछना चाहता हूं जो यह कहते हैं कि मोदी जी 4 साल हो गए अयोध्या नहीं गए। उस पोस्ट में लिखा था कि मैं कैसे जाऊं तिरपाल में राम लला के दर्शन करने…??

ठीक उसी प्रकार से सोचिए, मोदी जी कैसे जाएंगे अपने आराध्य राम के दर्शन करने वो भी तिरपाल में….? इतनी पावर होने के बाद भी, देश का प्रधानमंत्री, राम भक्त… और राम का मंदिर नहीं बनवा सका?? क्योंकि मजबूर है मोदी जी संविधान के हाथों….

जितना क्रोध और विभिन्न प्रकार की भावनाओं का समंदर हमारे दिल में उठता है राम मंदिर को लेकर, क्या मोदी जी को यही भावनाएं विचलित नहीं करती होंगी???

कुछ लोग बेशर्मी से यह तो पूछ लेते हैं कि साहेब मंदिर कब जाओगे, राम के नाम पर वोट मांगा था, 4 साल हो गए मंदिर तो ना बनवा सके, कम से कम रामलला के दर्शन ही कर आते…

जैसे आप की व्यक्तिगत भावनाएं और क्रोध है राम मंदिर को ले कर और प्रचंड सुर में बोल देते हैं कि मंदिर बनवाओ चाहे जैसे बनवाओ, अध्यादेश लाओ भले ही वो पास ना हो राज्यसभा से पर कम से कम हमें पता तो चले कि हां मोदी जी सोच तो रहे हैं आप राम मंदिर के लिए, कुछ तो किया आपने मंदिर के लिए…

क्या कभी किसी ने मोदी जी की व्यक्तिगत भावना के बारे में सोचा है?? वो इंसान नेपाल गया माता सीता के मायके, वहां उसने माता के दर्शन किए, वहां से उसने रामायण सर्किट का उद्घाटन किया, लेकिन अयोध्या क्यों नहीं गया?

क्या उनके मन में दिल में यह भावना का ज्वार नहीं उमड़ता होगा? यह टीस नहीं उठती होगी कि देखो मैं देश का प्रधानमंत्री हूं और भगवान राम के मंदिर के लिए कुछ नहीं कर पा रहा हूं…??

मुझे नहीं लगता किसी कट्टर या प्रचंड राम भक्त को इतना कष्ट होगा, राम मंदिर निर्माण के प्रति इतनी बेचैनी दबाए वो इंसान चुपचाप संविधान के दायरे में हर वो प्रयास कर रहा है जिससे जल्द से जल्द मंदिर पर फैसला आ सके और निर्माण शुरू हो, फिर वो जाए भव्य राम मंदिर में राम लला के दर्शन करने…

जो लोग बार बार यह सवाल उठाते हैं वो ज़रा खुद सोच के देखें, इतनी पावर होने के बाद भी मंदिर ना बनवा पाने की छटपटाहट कैसी होगी मोदी जी के दिल में…? वो इंसान जिसने सऊदी अरब में मंदिर बनवा दिया, जब अयोध्या में राम के मंदिर के बारे में सोचता होगा तो कितना बेचैन हो जाता होगा, कभी सोचा है?

‘मंदिर वहीं बनाएंगे, तारीख नहीं बताएंगे’ बोल बोल के बहुत खिल्ली उड़ाई है इसी हिन्दू समाज ने। भूल गए जब ढांचा गिराया था तो तुम ही थे… हां… हिन्दू… तुम ही थे जिसने भाजपा को चुनाव में हरवा दिया था…. ऐसा क्यों किया था? हिन्दुओं तुमने एक गलती की थी उस वक़्त जिसके कारण आज तक राम मंदिर नहीं बन सका… दोष भाजपा को देते हो? मोदी को दोष देते हुए शर्म नहीं आती?

एक बात तो तय है, और कान खोल कर सुन लो व समझ लो, राम मंदिर का निर्माण तभी संभव होगा जब सभी हिन्दू एकजुट होंगे, और भाजपा के साथ खड़े रहेंगे क्योंकि मंदिर बनवाने में हिन्दुओं की सहायता यदि कोई सरकार कर सकती है तो भाजपा सरकार ही करेगी, भाजपा ने पहले भी 3 राज्यों में अपनी सरकार गंवा कर इस बात को प्रमाणित किया है…

कभी मोदी बन के सोचो, सोचो आप वहां होते तो किस बेचैनी में होते, मंदिर ना बनवा पाने की बेचैनी, राम के दर्शन ना कर पाने की बेचैनी… सोचो आप देश के इतने बड़े पद पर बैठ कर अपने आराध्य के दर्शन तिरपाल में करने जाएंगे?

सोचिए आप हैं जिसने कट्टर इस्लामिक देश में मंदिर बनवा दिया पर अपने देश में भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए आप बेबस है, लाचार है क्योंकि आप संविधान से बंधे है, आप देश के सर्वोच्च पद पर बैठे है, जहां से आपको बराबर सबको देखना होगा, सबको साथ ले कर चलना होगा…

सोचिए…..

और हां… मंदिर वहीं बनेगा, बहुत जल्द बनेगा, मोदी ही बनवाएंगे, भाजपा राज में ही बनेगा… जय श्रीराम

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