क्यूँ उनके गले की फाँस बनते जा रहे हैं मोदी जी?

इस बार के लोकसभा चुनाव, सिर्फ़ और सिर्फ़ – नमो विरुद्ध शेष है।

और राष्ट्र के किसी भी तरह के विकास से संबंधित कार्यों को लेकर इस ‘शेष’ को कोई मतलब नहीं है।

दिवालिया हो चुके हैं ‘ये’, बस सामने एक इंसान दिख रहा है ‘इन्हें’…

यह तो मोदी जी सरीखा इंसान है जो सब देखते/ सुनते/ सहते हुए भी बस राष्ट्र सेवा में लगे हुए हैं।

प्रतिदिन हमें कितनी ही नई बातों के विषय में पता चलता है… पहले (2014 से पूर्व) तो कोई खोज, खबर आती ही न थी, सिवाय इसके कि ‘आज हमारे देश के प्रधानमंत्री जी यहाँ की यात्रा, वहाँ की यात्रा (अपनी पूरे पलटन के साथ) कर रहे हैं’…

देश के अंदर क्या काम हो रहा है, साल दर साल की बात तो छोड़िए, 5 वर्षों बाद भी पता न लगता था…

और अब आलम यह है कि अभी की सरकार तथा सरकार के समस्त विभाग, करीबन सप्ताह या महीने भर में ही अपनी रिपोर्ट जनता के सामने रखते जाते हैं…

जनता अगर कुछ कहती है तो उसे देखा/ सुना जाता है, जहाँ ज़रूरत हो – परिवर्तन लाया जाता है… (in real sense Modi ji’s whole team is showing an exemplary example of – what is ‘inclusive governance’).

मुझे ध्यान नहीं आता है कि आज से पहले (कहने का तात्पर्य है कि 2014 से पूर्व) कभी भी केंद्रीय सरकार से सीधे-सीधे इतना जुड़ाव कभी महसूस किया हो लोगों ने।

(2014 से पूर्व) कहाँ कभी देखा/ सुना कभी भी लोगों को इतना सजग होते हुए सरकार की कामों को लेकर? कभी नहीं..!!!

आज जितना आसान हो गया है सरकार से संवाद, क्या कभी पहले था?

नहीं..!!!

लेकिन कुछ पार्टियाँ/ पार्टी के लोग बस अपने स्वार्थ हेतु पता नहीं क्यूँ नकारात्मक रूप से ग़लत बातें फैला रहे हैं… (कारण सभी को मालूम है क्यूँ मोदी जी उनके गले की फाँस बनते जा रहे हैं?).

कुछ लोगों का मोदी के नाम से डरना ज़रूरी है, उन्हें डरना ही चाहिए

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