स्व. राजीव दीक्षित का अधूरा अभियान पूरा करने आचार्य राजेश कपूर का अद्भुत प्रयास

प्रशिक्षक परिचय

वैद्य राजेश कपूर गोविज्ञान पर अनेक वर्षों से अध्ययन और शोध कार्य कर रहे हैं। इन्होंने पंचगव्य के अनेक शास्त्रीय एवं नए योग बनाए हैं और हजारों गोभक्तों को प्रशिक्षित किया है।

इनके शोध पत्र आयुष विभाग (भारत सरकार) व प्रदेश सरकारों द्वारा छापे गए हैं। विज्ञान भवन दिल्ली में भी शोध पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं। नवीन पंचगव्य उत्पाद बनाने पर इतना शोधकार्य शायद ही किसी और ने किया होगा।

ऊर्जा विज्ञान पर इनकी खोजों के कारण देश ही नहीं, विदेशों में भी इनकी एक पहचान बनी है। सैकड़ों पंचगव्य चिकित्सक इनका मार्गदर्शन प्राप्त कर रहे हैं। यह सब सीखने का अवसर आपको कहीं और शायद ही मिले।

अमर हुतात्मा श्री राजीव दीक्षित जी के अधूरे अभियान को पूरा करने में वैद्य राजेश कपूर जी का ज्ञान अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

शिविर-स्थल परिचय

*सलोगड़ा नाम का छोटा सा कस्बा नैशनल हाईवे 22 पर कालका से 50 किलोमीटर तथा चण्डीगढ़ से 80 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां से शिमला 37 किलोमीटर है। सलोगड़ा रेल्वे स्टेशन भी है। स्टेशन के पास ही सलोगड़ा का बस स्टॉप है।

*यहाँ से साढ़े आठ किलोमीटर की दूरी पर गहरी घाटी में पहाड़ी नदी ‘अश्वनी खड’ के तट पर गणकीसेर ग्राम है।

*इसी ग्राम में “केशव सृष्टी” नामक संस्था के भवन में सरस्वती विद्यामन्दिर है। यही शिविर का स्थान है।

*पास ही प्रसिद्ध ‘हैरिटेज पार्क’ है जहाँ देवी-देवताओं व पौराणिक प्रसंगों की श्रेष्ठ कलाकृतियाँ, मूर्तियाँ बनी हैं।

*अभी यहाँ छोटी सी गोशाला का प्रारम्भ हो रहा है। उत्पाद बनाने का प्रारम्भ हम लोग करेंगे। अतः सीखने, देखने का अवसर अधिक मिलेगा।

यात्रा मार्ग

*दिल्ली, अम्बाला, चण्डीगढ़ से शिमला जाने वाली सभी बसें सोलन, सलोगड़ा होकर जाती हैं। देश के अनेक रेल्वे जंक्शनों तथा दिल्ली से कालका तक ट्रेनें आती हैं। कालका से मिडलगेज की (छोटी) ट्रेने शिमला जाती हैं। आप शिमला की बस या ट्रेन से सलोगड़ा पहुंच सकते हैं।
पर ध्यान रखें कि सायंकाल कालका से ट्रेन नहीं मिलेगी और 6.30 के बाद बस भी मुश्किल से मिलेगी।

* सलोगड़ा से लोकल बस में आप गणकीसेर, सरस्वती विद्यामन्दिर आ सकते हैं। लोकल बसें दोपहर 12 बजे और सायं 4 व 5.15 पर कुल तीन बसें मिलती हैं।

विद्यामन्दिर की एक वैन सायं 6 बजे आगन्तुकों को लेने आएगी। फिर भी कठिनाई होने पर नीचे दिये नम्बरों पर फोन करें। असुविधा से बचने के लिये अपने पहुंचने का समय पहले से सूचित करें।

शिविर के प्रस्तावित विषय

* अद्भुत ऊर्जा विज्ञान* इस विषय के कारण वैद्य जी भारत के बाहर भी प्रसिद्ध हो रहे हैं।
*वायु शोधन, जल शोधन एवं मिट्टी शोधन की अनुपम तकनीकें।
* पंचगव्य उत्पाद : शास्त्रीय तथा नवीन शोध से बने 15-20 उत्पाद।
* गोवंश की शुद्ध स्वदेशी चिकित्सा।
* पंचगव्य से मानव चिकित्सा।
* पंचगव्य कृषि एवं कृषि उत्पाद।
* केश रंजक व केश वर्धक तेल, गठिया नाशक तेल, रेडिएशन नाशक तेल आदि।
* मार्केटिंग तकनीक।
* अपनी शारीरिक व मानसिक क्षमताएं बढ़ाना।
* ध्यान एवं साधना सबके लिए आवश्यक है।

आहार

सबके लिए सामान्य शाकाहारी आहार उपलब्ध होगा। लहसुन, प्याज न खाने वाले पहले से सूचना दें। कोई विशेष परहेज हो तो वह भी पहले से बताएं, हम प्रयास करेंगे कि उन की व्यवस्था कर सकें।

आवास

महिलाओं व पुरूषों की अलग-अलग सामूहिक आवास की व्यवस्था है। अलग कक्ष उपलब्ध नहीं हैं।

शिविर संबंधी अन्य सूचनाएं

सभी शिविरार्थियों से अनुरोध है कि अपने साथ दो सूती चद्दर, एक टॉर्च, गर्म वस्त्र, 1 आसन बैठने के लिए, थाली-कटोरी- चम्मच गिलास या लोटा साथ लाएं। बर्तन पीतल या कांसे के लाए तो अधिक अच्छा होगा।

*टिकट आकार के दो चित्र, आधार कार्ड तथा शुल्क जमा का प्रमाण अवश्य लाएं।

*शिविर में 25 सितंबर दोपहर बाद तक पहुंचे। सितंबर 25 की रात को शिविर का पहला सत्र प्रारंभ हो जाएगा। पूर्व सूचना पर दोपहर का भोजन भी 25 सितंबर को उपलब्ध करवाया जाएगा। सभी प्रशिक्षार्थी 29 को दोपहर तक शिविर से प्रस्थान कर सकेंगे।

*शिविर की दिनचर्या पर्याप्त कठोर और व्यस्त रहेगी। अतः रोगियों से अनुरोध है कि वे शिविर में आने से परहेज करें।

शिविर शुल्क

20 सितंबर तक 3500 रुपये प्रति प्रतिभागी, उसके बाद 4000 रुपये देने होंगे और अंतिम दिन पंजीकरण करवाने वालों को 5000 रुपये शिविर शुल्क देना आवश्यक होगा। अतः असुविधा से बचने के लिए अपना पंजीकरण 20 सितंबर से पहले करवाएं।

*शुल्क लौटाने का प्रावधान नहीं है। यदि किसी कारण शुल्क जमा करवाने के बाद शिविर में न आ सकें तो अगले 6 मास में किसी शिविर में भाग ले सकते हैं।

शुल्क जमा के लिए खाते का विवरण

“सेवा शिक्षण संस्थान” नामक ट्रस्ट के खाते में शुल्क जमा करवाएं तथा SMS, ईमेल अथवा Whatsapp द्वारा प्रमाण सहित सूचित करें। (खाते का विवरण अनुरोध पर भेजेंगे)

केवल 50 लोगों के लिए रुकने का स्थान है। अतः जो सबसे पहले पंजीकरण करवा लेंगे, उन्हीं 45 लोगों को शिविर में आने की स्वीकृति प्राप्त होगी। शेष को किसी अगले शिविर में आ सकते हैं। ध्यान रहे कि पिछले शिविर के 10 लोग शेष हैं जो इस शिविर में आमंत्रित किये जाएंगे।

सम्पर्क (व्हाट्सएप/मो.) 9805505855,
8199999966.
ईमेल: dr.rk.solan@gmail.com

इस लेख में आप आचार्य राजेश कपूर के बारे में विस्तृत रूप से जान सकते हैं

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