कहीं ऐसा न हो कि ‘गढ़ आला पण सिंह गेला’

आज Sc/St एक्ट की जनक काँग्रेस और कांग्रेसियों का भारत बंद हैं।

2014 में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने की एक वजह यह भी थी कि यूपी-बिहार सहित पूरे भारत में भाजपा के परम्परागत वोटरों के साथ-साथ दलितों ने भी जातीय राजनीति को दरकिनार कर मोदी को जमकर वोट दिया। मायावती का ज़ीरो इसका सबसे बड़ा सबूत है।

मोदी के नाम पर नये वोटर बढ़ने के बावजूद भी भाजपा को सिर्फ 34% वोट ही मिले ये भी कड़वा सच हैं। यहीं से साढ़े चार साल पहले विपक्ष की राजनीति शुरू होती हैं।

गुजरात में मोदी का काम देख चुकी पार्टियों को पता था कि ये पाँच साल रहेगा तो अपने काम से 34% को 44% तक ले जायेगा इसलिये उनका सिर्फ एक ही काम था कि इस 34% वोट को कैसे भी कम करना।

इसके लिये विपक्ष ने दलितों को, किसानों को, फौजियों को, पटेलों को, जाटों को, गुर्जरों को, महिलाओं को… या और जो भी मिले उसे मोदी सरकार के खिलाफ भड़काने की पूरी कोशिश की। और ये काम कैसे किया इसकी डिटेल आपको बताने की जरूरत भी नही हैं। सबको पता हैं।

दलितों को पूरे साढ़े चार साल तक भड़काने की सबसे ज्यादा योजनाएं बनाई गई। कभी वेमूला के नाम पर तो कभी ऊना पिटाई के नाम पर, लेकिन उत्तरप्रदेश में भाजपा की भारी जीत और जब गुजरात को मोदी ने काँग्रेस के दाँत में से छीन लिया तो चारों तरफ से निराश काँग्रेस ने अपने ही लोगों से Sc/st एक्ट का दाँव खेला।

राजनीति इसी को कहते हैं। काँग्रेस का दाँव बिल्कुल सही पड़ा लेकिन राजनीति यहीं खत्म नही होती। मोदी ने अध्यादेश लाकर काँग्रेस को चारों खाने चित कर दिया।

लेकिन ये क्या हुआ! दलितों के भड़कने की आस लगाऐ बैठी काँग्रेस को दलित तो नही मिले लेकिन जिन सवर्णों से काँग्रेस को सबसे ज्यादा नफरत हैं… भाग्य से उसे उनका ही समर्थन मिल गया।

काँग्रेस उसमें भी खुश हैं। भागते भूत की लंगोटी ही सही। उन्हें तो 34% को कम करना हैं… भले ही वो सवर्णों के कंधे पर रखकर हो। काँग्रेस अपनी राजनीति में सफल होती दिख रही हैं।

बाकि दुख तो संभाजी को भी बहुत हुआ था जब किला तो जीत लिया था लेकिन अपने खास सेनापति तानाजी मलसुरे को खोना पढ़ा था । तब उनके मुँह से निकला था…’गढ़ आला पण शेर गेला ‘ यानि किला तो आ गया लेकिन शेर चला गया।

अभी भी वक्त हैं संभल जाइए, नहीं तो आप भी यही कहते रह जाएंगे कि… ‘गढ़ आला पण सिंह गेला’।

बुद्धिजीवियों का चोला ओढ़े शहरी नक्सलियों को तो हम पहचानते ही नहीं थे!

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY