Artice 377 : सोहा ‘अली’ ही हो सकती है ऐसी माँ जो बेटी को Lesbian होने का आशीर्वाद दे रही

कौन होगी ऐसी माँ जो अपनी बेटी को ये आशीर्वाद दे कि तुम किसी लड़की के साथ विवाह करो, उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाओ… हाँ सोहा अली है ऐसी माँ जो अपनी बेटी को ऐसा आशीर्वाद दे रही, वरना कौन माँ होगी जो सुप्रीम कोर्ट के ऐसे फैसले में इतनी फूली न समा रही कि आर्टिकल 377 के विरुद्ध अपनी बेटी का ही फोटो प्रमोट कर रही है.

इसी से पता चलता है कि वो खुद भी ऐसे संबंधों में संलग्न रही होगी और आगे अपनी बेटी को भी ऐसे संबंधों के लिए प्रेरित कर रही हैं. और उस पिता पर मुझे दया आती है जो अपनी बेटी के ऐसे फोटो के लिए माँ का साथ देता है.

आज तक हम बेटियों के लिए सपने देखते आ रहे हैं कि उसे अच्छा लड़का मिले, और आजकल की नई नस्ल, जी हाँ इसे मैं नस्ल ही कहूंगी, प्राकृतिक इंसान तो ये हो नहीं सकते.. हाइब्रिड… अपनी बेटियों के लिए लड़कियाँ ढूंढेंगे.

मुझे तो शर्म भी नहीं आती ऐसी नस्ल पर, क्योंकि कसूर इनका नहीं, इस नस्ल को बनाने वाले का है. उनके लिए मांसाहार का अधिकार और आर्टिकल 377 में कोई फर्क नहीं, कहते हैं जैसे किसी को मांसाहार करने का अधिकार है वैसे ही समलैंगिकता का भी अधिकार है, ये अनैतिक नहीं है.

यदि मांसाहार करनेवाला नरभक्षी हो जाए तब भी आप उसका पक्ष लोगे? नहीं ना, फिर कैसे किसी अप्राकृतिक बात को आप स्वतंत्रता के नाम पर प्रमोट कर सकते हो, सिर्फ़ और सिर्फ़ सनातन जीवन शैली के विरुद्ध में खड़े होने के लिए?

और वैसे भी कोर्ट के निर्णय के अनुसार पशुओं और बच्चों के साथ अप्राकृतिक यौन संबंधों के बारे में धारा 377 के अन्य सभी प्रावधान लागू रहेंगे. इसका एक ही अर्थ निकलता है कि बच्चों को पशु के तुल्य रखा गया है. यानी या तो बच्चे या सिर्फ़ फिर पशु ही समझ सकते हैं प्रकृति के नियम. तुम्हारी आधुनिक सोच ने तुम्हें इतना गिरा दिया है कि तुम पशु से भी बदतर हो चुके हो.

ईश्वर के लिए बच्चों को बख्श दो, अपनी इन घिनौनी जीवन शैली में उन्हें शामिल न करो, जिसे तुम प्रकाश की किरण कह रही हो वो अन्धकार भरी डगर है, बचा लो अपनी बेटी को उस गर्त में गिरने से…  बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो, वरना चार किताबें पढ़ कर वो भी तुम जैसे हो जाएंगे…

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