दूध की शुद्धता के नाम भी उठना चाहिये एक आंदोलन

दूध पीकर डाक्टर से बचा जा सकता है…

चौंकिये मत क्योंकि FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) अब फोर्टीफिकेशन अर्थात दूध और अन्य खाने की पैकेज्ड उत्पादों में आवश्यक मिनरल्स मिलाने को अनिवार्य करने जा रही है।

अभी अभी 6 घन्टे की एकतरफ़ा मीटिंग में जिसमें इस संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO, जोकि भारत सरकार द्वारा चुने हुये सचिव स्तर के IAS हैं) के अलावा देश की जानी मानी दूध व्यापार कम्पनी जैसे मदर डेरी, अमूल, माही, क्रीमलाईन और क्षेत्रीय दुग्ध संघ के मुख्य अधिकारीयों के साथ साथ विभिन्न सरकारी संस्था जैसे NDDB और TATA Trust के विभिन्न पदाधिकारियों की उपस्थिति में पहले तो ये बताया गया कि देश भयंकर कुपोषण की स्थिति में है और ये सब बड़ी-बड़ी कम्पनियां इन कुपोषित लोगों को रासायनिक कम्पनियों जैसे कि टाटा केमिकल्स व अन्य द्वारा निर्मित विटामिन व मिनरल को दूध में मिलाकर सभी उपभोक्ताओं को पिलायेंगे।

अब तार्किक प्रश्न है कि दूध तो सम्पूर्ण आहार है… तो इसमें कोई और बाहरी पदार्थ मिलाने की क्या आवश्यकता है?

और आवश्यकता है भी तो अगर कोई विटामिन जैसे A या D के सप्लीमेन्ट ले रहा है तो क्या ये दूध पीकर विटामिन की अधिक मात्रा का शरीर पर क्या प्रभाव होगा?

बहुत से ऐसे ही प्रश्न घूम रहे थे मन में और 250-300 लोगों की सभा में खड़े होकर प्रश्न किये ताकि विचार-विमर्श हो… पर इसकी अनुमति ही नहीं दी गयी।

दिल्ली के बड़े बडे होटलों के आलीशान कांफ्रेंस हॉल में 250-300 लोग भारतवर्ष के लाखों दुग्ध उत्पादकों के लिये काले क़ानून बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

ये सीधे सीधे ग्रामीण दुग्ध उत्पादन कर आज के कानून के हिसाब से उसे पैक करके बेच रहे सभी छोटे उत्पादकों को क़ानून की परिधि में लाकर या तो उनका धन्धा बंद करायेंगे या फिर दूध को बड़े मगरमच्छों को बेचना उनकी मजबूरी होगी।

कुल मिला कर समझ ये आया कि मगरमच्छ केमिकल्स या इनके जैसी जैसी बड़ी कम्पनियों को अपने रासायनिक उत्पादों को बेचना है और मगरमच्छ दूध कम्पनियों को अपना पाउडर निर्मित या क्रीम निकाला हुआ दूध जैसा पदार्थ बेचने के लिये क़ानून की ओट चाहिये और किसान उत्पादक की मेहनत को 15 रूपये लीटर भी ना मिले पर पानी की बोतल 20 रूपये से कम ना हो।

लिखने को तो बहुत है पर क्या करूँ… किसान का दर्द सीने में छुपा है जिसको ये मगरमच्छ कभी भी समझ नहीं पायेंगे।

एक आन्दोलन दूध की शुद्धता के नाम भी उठना चाहिये…

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