कब लगाओगे किसी को गले सिर्फ हिन्दू समझ कर? जब देश कराची हो जाएगा तब?

आज जन्माष्टमी है. सुबह सुबह कार में चार घंटे की यात्रा थी, तो भगवदगीता का पाठ लगा लिया. अच्छा संयोग था.

फिर कमरे में पहुंचने के बाद और हस्पताल पहुंचने के बीच में खाने का समय नहीं मिला तो इसे संकेत समझ कर भूखा ही रह लिया.

कभी जन्माष्टमी का उपवास सामान्यतः रखता नहीं हूँ, आज तुम्हारी मर्जी से हो गया. तुम्हारी बोली सुनी, तुम्हारे नाम पर भूखा रह लिया. मर्जी है तुम्हारी… हम कौन होते हैं कुछ करने या ना करने वाले…

और चमत्कार यह सुनिए… अभी अभी भगवान की कृपा से यह जन्माष्टमी का प्रसाद भी चल कर आ गया…

एक सज्जन ने फ़ोन किया – राजीव भाई, कमरे पर हो? कुछ बनाया है, वह लेकर आऊँगा…

ये मित्र हैं कराची के, हिन्दू हैं. साथ काम करते हैं, शर्मीले स्वभाव के. आज तक कभी दो लाइन बात भी नहीं हुई. पर हिन्दू होने का एक सेंटीमेंट था जो उन्हें जन्माष्टमी पर मेरा ख्याल आ गया.

प्रसाद लेकर मेरे कमरे में आये. देकर कहा… मैं कराची का हूँ. पाकिस्तान में एक हिन्दू होने का क्या मतलब है मैं जानता हूँ. इस देश में मेरा अपना कोई नहीं है. जब कोई हिन्दू मिलता है तो अपना सा लगता है…

उनकी आंखें नम थीं. प्रसाद देकर गले लगे और मुँह मोड़ कर चले गए… मेरी भी आंखें गीली हो गई थीं… मैंने भी उन्हें जाने दिया, बैठने भी नहीं कहा.

कभी किसी से मिले हो तो यूँ बिना बात के उसे यह सोच कर गले लगाया है कि वह हिन्दू है? आज जो ब्राह्मण-क्षत्रिय-यादव-दलित बने घूम रहे हो… कब समझोगे इसकी कीमत? कब लगाओगे किसी हिन्दू को गले इस तरह… सिर्फ उसे हिन्दू समझ कर? जब देश कराची हो जाएगा, तब?

इसे भी पढ़ें – कृष्ण तत्व का जन्मोत्सव

ज्योतिषाचार्य राहुल सिंह राठौड़ : शिष्य मक्खलि गोसाल के

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY