महागठबंधन को ले डूबेगा शिवपाल यादव का सेक्युलर मोर्चा

कल उत्तरप्रदेश में एक बहुत बड़ी राजनीतिक घटना हुई है… शिवपाल यादव ने नमाजवादी पार्टी से अलग हो कर सेक्युलर मोर्चा बनाने की घोषणा कर दी है।

ये उत्तरप्रदेश में आकार ले रहे महागठबंधन के लिये खतरे की घंटी है… कुछ नासमझ लोग इसे सिरे से खारिज कर देंगे पर ऐसा नहीं है…

महागठबंधन की एक व्यवहारिक समस्या है… कुल 80 सीट हैं। जिसमें से समाजवादी पार्टी के हिस्से में बमुश्किल 35 सीट आएंगी। इसका मतलब ये हुआ कि 45 सीटों से समाजवादियों का पत्ता कट गया… यानी अब उस सीट से किसी भी समाजवादी को टिकट नहीं मिलेगा।

उत्तरप्रदेश की राजनीति में हर सीट पर 8 – 10 ऐसे नेता हैं जो पूरे मनोयोग से उस सीट पर समाजवादी राजनीति करते हैं। वो सब Career Politicians (पेशेवर राजनीतिज्ञ) हैं… मने politics ही उनका career है।

गठबंधन राजनीति उन 45 सीटों के समाजवादी नेताओं को उनके political career से महरूम कर देगी। सिर्फ इतना ही नहीं, अब उन्हें खुद तो लड़ना नहीं बल्कि अपने एक विरोधी को जिताना भी है…

मने अपनी प्रेमिका का ब्याह अपने विरोधी से कराओ, अपने खर्चे पे, और फिर उसकी सुहागरात का इंतज़ाम भी तुम्ही करो… इतना बड़ा कलेजा कम ही लोगों का होता है…

ऐसे में ये शिवपाल यादव का सेक्युलर मोर्चा उन 45 सीटों पर सब गुड़ गोबर कर देगा… शिवपाल उन 45 सीटों पर चुन चुन के समाजवादियों को टिकट देंगे… ज़ाहिर सी बात है कि उनमें यादव और मुसलमान ही ज़्यादा होंगे…

ऐसे में वो 45 सीट पर सेक्युलर मोर्चा का प्रत्याशी कम से कम 50,000 और अधिकतम ढाई लाख तक वोट खींच लेगा… आमतौर पर ऐसे मोर्चों से Moneybags (प्रचंड धनवान) चुनाव लड़ते हैं जो 10 – 20 करोड़ रूपए तक खर्चते हैं और लाख 50,000 वोट तो सीधे सीधे खरीद लेते हैं…

गठबंधन राजनीति की दूसरी समस्या ये कि इसमें 2 + 2 = 4 नहीं होता बल्कि 3 रह जाता है… बहुत ज़ोर मारा तो साढ़े तीन… क्योंकि पार्टी का पूरा वोट, गठबंधन उम्मीदवार को ट्रांसफर नहीं होता…

टिकट न पाने वाले नेता सब भितरघात भी तो करते हैं… ऐसे में सपा बसपा का 20 – 22% भोट मिल के भी 36 – 38% से ज़्यादा नहीं होता… उधर भाजपा के पास 42% से ज़्यादा वोट है जिसे अमित शाह – योगी जी इस बार 50 पार ले जाना चाहते हैं।

फिर भी भाजपा का 42% तो खालिस है, इस 42% में दाग नहीं है… 50 के आसपास सीटें ऐसी होंगी जिनपे मुक़ाबला कांटे का होगा… उनपर अगर शिवपाल के सेक्युलरिस्ट ने अगर 25 – 50 हज़ार वोट भी काट दिया तो गठबंधन की भैंस पानी में चली जायेगी।

इसके अलावा गठबंधन में सबसे बड़ा पेंच काँग्रेस का है… उत्तरप्रदेश में काँग्रेस का अपना कोई वोट नहीं है… वो जो भी वोट काटती है भाजपा या सपा का… हिन्दू खड़ा करे तो भाजपा का और मुस्लिम करे तो सपा बसपा का।

ऐसे में गठबंधन के कारण अगर 70 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार न खड़ा हो तो भाजपा को सीधे सीधे 25,000 से ले के एक लाख वोट तक का फायदा होता है।

राहुल गांधी के रणनीतिकार इसे समझ नहीं रहे और गठबंधन में शामिल होने की ज़िद ठानें हैं। अगर मुझे रणनीति बनानी होती तो मैं गठबंधन से 10 सीट काँग्रेस के लिए ले लेता और शेष 70 सीटों पर बाभन ठाकुर बनिया सवर्ण या OBC प्रत्याशी दे के हर सीट पर भाजपा का 25 – 50 हज़ार वोट काटता…

कुल मिला के शिवपाल यादव का ये सेक्युलर मोर्चा महागठबंधन को ले डूबेगा… यदि शिवपाल ने कायदे से गोटियां चलीं तो उत्तरप्रदेश में भाजपा 65+ रहेगी।

आपको पता होना चाहिए, इस देश में राष्ट्रपति और राज्यपाल को Pidi किसने बनाया?

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