भारत तोड़क शक्तियों की चालों को समझिये

पिछले कुछ दिन सपरिवार चिली – दक्षिण अमेरिका का एक देश – भ्रमण पर था। आज लौटने के बाद दो समाचारों ने ध्यान आकर्षित किया।

पहला, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून, 2018) के दौरान भारत में परिष्कृत तांबे का उत्पादन 47.1% गिर गया है।

इसका मुख्य कारण सोनिया समर्थक NGOs के द्वारा तमिलनाडु के तुतीकोरिन जिले में स्टरलाइट के तांबा स्मेल्टर (फैक्ट्री) को जनता को भड़का के बंद करवाना है।

परिणामस्वरुप, देश के तांबे के आयात में 233% वृद्धि हुई है। स्टरलाइट फैक्ट्री बंद होने के पूर्व भारत परिष्कृत तांबे को निर्यात करता था।

याद कीजिये कि विश्लेषकों ने रुपये के मूल्य में गिरावट के लिए भारत के निर्यात में गिरावट और आयात में भारी वृद्धि को दोषी ठहराया है।

दूसरा समाचार यह है कि 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सभी निर्माण गतिविधियों पर 9 अक्टूबर तक रोक लगा दी है जिन्होंने कूड़ा-कचरा के मैनेजमेंट के लिए कोई नीति तैयार नहीं की है।

छह पेज के फैसले से यह स्पष्ट नहीं है कि कितने राज्यों में निर्माण गतिविधियों पर बैन लग गया है। लेकिन फिर भी गोवा, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा और उत्तराखंड इस बैन के लपेटे में आ गए हैं जिससे अर्थव्यवस्था, रोजगार और कई अन्य मुद्दों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

जिन दो जजों की पीठ ने यह फैसला दिया, उनके नाम न्यायमूर्ति मदन लोकुर और अब्दुल नज़ीर है। न्यायमूर्ति मदन लोकुर ने मुख्य न्यायाधीश के विरूद्ध जनवरी में प्रेस कांफ्रेंस सम्बोधित की थी।

पुनः याद कीजिये कि शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग में 13.5 फीसद और कंस्ट्रक्शन उद्योग में 8.7 फीसद की जबरदस्त वृद्धि दर दर्ज की है।

इन दोनों उद्योगों ने ही इस तिमाही में आर्थिक विकास दर को आठ फीसद से उपर पहुंचाने में सबसे ज्यादा मदद की है।

भारत तोड़क शक्तियों की चालों को समझिये।

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