दुनिया का सबसे बड़ा साम्राज्य है वामपंथी पॉलिटिकल करेक्टनेस

एनएचएस यानि नेशनल हेल्थ सर्विस… दुनिया की बेहतरीन मुफ्त चलने वाली सामाजिक मेडिकल व्यवस्था है।

मुफ्त तो क्या है, 12% नेशनल इन्शुरेन्स पर करने वाले जानते हैं, लेकिन गरीबों, लाचारों और बचे खुचे मुफ्तखोरों के लिए तो मुफ्त ही है।

पर असंतुष्टों के असंतोष के लिए यहाँ से भरपूर खाद पानी मिलता है। व्यवस्था में खामी निकलना, शिकायत करते रहना, कोसना, भड़ास निकालना यह यहाँ की बिगड़ैल जनता के शगल हैं।

पिछले दिनों ऐसे ही एक जागरूक नागरिक से मुलाकात हुई। जनाब काफी बीमार हैं, खाना नहीं निगल सकते। उन्हें एक छोटे से आपरेशन की जरूरत है। पर पिछले आठ महीने से उनका आपरेशन नहीं हो पाया है।

जिस सर्जन से मिलते हैं, उन्हें उस सर्जन की कोई ना कोई बात पसंद नहीं आती और अगले दिन उसकी कंप्लेन लिख मारते हैं।

फिर कहते हैं कि उन्हें उस डॉक्टर पर भरोसा नहीं रहा… क्योंकि उन्होंने शिकायत की है इसलिए डर है कि वह डॉक्टर अब उनका इलाज ठीक से नहीं करेगा।

इस तरह से उन्होंने पूरे एक हस्पताल को अपने विश्वास के दायरे से बाहर कर लिया है। अब दूसरे ट्रस्ट में दूसरे हस्पताल में रेफर किया गया वहाँ भी उनकी शिकायती पारी जारी है।

तो कुल आठ महीने में उनका आपरेशन नहीं हो पाया है। नाक से नली डाल कर खुराक दी जा रही है, आपरेशन के लिए एक काबिल डॉक्टर की खोज जारी है।

पहले दिन जब उनसे मेरी मुलाकात मॉर्निंग राउंड में हुई तो मैं इस रेपुटेशन से वाकिफ था।

उन्होंने अपनी पूरी कहानी फिर से सुनाई… ‘कैसे एनएचएस पब्लिक के पैसे पर चलता है पर पब्लिक की परवाह नहीं करता, कैसे यहाँ शिकायत करने पर सुनवाई नहीं होती, कैसे डॉक्टर अपने आपको खुदा समझते हैं, कैसे वकीलों ने डॉक्टरों की असलियत दुनिया को बता दी है…’ और मैं सारे समय सर हिला हिला कर हूँ-हाँ करता रहा और अपनी खैर मनाता रहा।

पर उस सारे समय मुझे एक ही बन्दा याद आता रहा – इंग्लैंड की लेबर पार्टी का लीडर जेरेमी कॉर्बीन। शक्ल सूरत और कद काठी से ही नहीं, बात और बात करने के झगड़ालू अंदाज़ से भी… और nuisance value में भी। और यह लेख मूलतः जेरेमी कॉर्बीन के बारे में है…

जेरेमी कॉर्बीन यहाँ की राजनीति का कॉमरेड है। लेबर पार्टी के सबसे बाएँ छोर का वामपंथी। ज़िंदगी भर उसने पंगे ही लिए हैं। आज से कुछ साल पहले वह ब्रिटिश राजनीति का तमाशा था, उसे कोई सीरियसली नहीं लेता था। आज वह मुख्य विपक्षी दल का नेता है और एक दिन उसके प्रधानमंत्री बनने का गंभीर खतरा मौजूद है।

मैंने राउंड के बाद अपने जूनियर को कहा कि मुझे यह बन्दा जेरेमी कॉर्बीन जैसा लगा। पर वह जूनियर, जेरेमी कॉर्बीन का प्रशंसक निकला।

वह कहने लगा… ‘कुछ भी कहो, कॉर्बीन है सिद्धांत वाला आदमी। लोगों ने उसका विरोध किया, मजाक उड़ाया, पर उसने अपना स्टैंड नहीं बदला। वह मिलिट्री, मिलिट्री ऑपरेशन्स, न्यूक्लियर हथियारों का विरोधी है, शांति का समर्थक है… और जानते हो, वह क्वीन से हाथ नहीं मिलाता। क्योंकि वह सिद्धांत रूप में राजतंत्र का विरोधी है। हालाँकि वह कहता है कि क्वीन के पास कोई सचमुच की शक्तियाँ नहीं हैं इसलिए वह उन्हें माइंड नहीं करता… ब्रिटिश राजशाही को बदलना उसके एजेंडा में सबसे ऊपर नहीं है… पर वह सिद्धांत रूप में क्वीन को स्वीकार नहीं करता।’

ज़रा सोचें, यह है आज वामपंथ की ताकत। क्वीन अगर क्वीन है तो वह इन वामपंथियों के रहम-ओ-करम पर क्वीन है। ये उसे बर्दाश्त करते हैं, बदलने और हटाने की प्राथमिकता नहीं दिखाते इसलिए क्वीन गद्दी पर है… क्योंकि क्वीन के पास कोई सचमुच की शक्तियाँ नहीं है, वह अपनी ताकत नहीं दिखाती इसलिए वे उसे बर्दाश्त करते हैं… ये है वामपंथियों की धमक। चाहे ये चुनाव नहीं जीतते, चाहे पब्लिक इन्हें नहीं चुनती, पर क्वीन को ये अपने ठेंगे पर रखते हैं। इनके पॉलिटिकल करेक्टनेस को कोई छू नहीं सकता…

और इसका प्रमाण देखना है? यहाँ के शहज़ादे की शादी हुई थी दो-तीन महीने पहले। प्रिंस हैरी की पत्नी मेगन मर्केल एक टेलीविज़न स्टार है, सुंदर है… पर उसकी एक और तारीफ है… वह मिक्स्ड रेस है। उसकी माँ अश्वेत हैं।

और अगर आपने उसकी शादी का समारोह देखा हो तो शायद नोटिस किया हो… एक अश्वेत पादरी घंटे भर का भाषण दे रहा था। दास-प्रथा की कहानी कह रहा था… पूरे समारोह में मेगन का अश्वेत बैकग्राउंड खूब बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया गया। ब्रिटिश राजपरिवार अपने आप को अश्वेतों के नज़दीक और उनका हितैषी दिखाने की मजबूरी के तले दबा दिखाई दिया।

आपने सुना होगा कि पुराने जमाने में राजपरिवार में शादियाँ पॉलीटिकल अलायन्स के लिए होती थीं। यह शादी भी एक पॉलिटिकल अलायन्स ही समझें… ब्रिटिश राजपरिवार का वामपंथी साम्राज्य से अलायन्स… पॉलिटिकल करेक्टनेस से अलायन्स। आज के दिन वामपंथी पॉलिटिकल करेक्टनेस दुनिया का सबसे बड़ा साम्राज्य है…

और आपने उस शादी में भारत की प्रियंका चोपड़ा को देखा था ना। वह मेगन मर्केल की मित्र है। पर मूलतः वह वहाँ क्या कर रही थी? उसे भारत में इस वामपंथी साम्राज्य का राजदूत समझें।

मेगन मर्केल के साथ भारतीय अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा

वामपंथ से जीतना है तो पॉलिटिकल करेक्टनेस को करिए अस्वीकृत और अनधिकृत

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