चेत जाइए! अब चला गया संभ्रांत वैचारिक लड़ाई का युग

देश की राजनीति उस कलुषता की ओर बढ़ चुकी है कि राहुल गांधी जैसे अधकचरे, असंस्कारिक, अज्ञानी और हिंदूद्रोही को विश्वास हो चला है कि वह देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री, हिंदुत्व और आरएसएस को गालियों की अश्लील झड़ी लगा कर सत्ता की सर्वोच्च ऊँचाई प्राप्त कर सकता है!

“ज्ञानी से ज्ञानी मिलें… मिले कीच से कीच” यानी सब तरीके की बुराइयां… सोनिया के नेतृत्व में एकाकार हो चुकी हैं… इस विश्वास के साथ कि झूठ, फरेब, देश-सनातन विरोधी सामूहिक शक्तियों की ‘आदर्शवाद-राष्ट्रवाद’ पर अंततः विजय होगी!

राहुल गांधी ने थोथी आक्रामकता को अपना हथियार समझ रखा है… “थोथा चना-बाजे घना”…

बीती शाम की प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी आरोप लगा रहे थे कि विमुद्रीकरण इस लिए किया गया था क्योंकि “मोदी जी अपने 15 व्यापारिक दोस्तों की जेब में किसान, मज़दूर और छोटे व्यापारी का पैसा भरना चाहते थे”…

कोई इस लफ्फाज़ से यह पूछने वाला नहीं था कि जब किसान, मज़दूर और हम सब का धन, बैंक में जमा करने के बाद हमें वापस मिल गया… तो हमारा कौन सा धन अम्बानियों और अडानी की जेब में पहुंच गया?

आज ही आरएसएस को राहुल ने ‘ज़हर’ घोषित कर दिया… ‘खून का सौदागर’ सहित कोई तोहमत और गाली नहीं छोड़ी गई है, जो प्रधानमंत्री जी और राष्ट्रवादियों को नहीं दी गई हो…

आजकल ‘शहरी नक्सली’ शब्द खूब लोकप्रिय हो रहा है… यदि राहुल गांधी की पिछले 4 साल की गतिविधियां देखेंगे तो पाएंगे कि राहुल इसी अराजक नक्सलवाद की नुमाइंदगी करते हैं…

हर देश-विरोधी, हिन्दू विरोधी, राष्ट्रवाद विरोधी गतिविधि का समर्थन राहुल ने किया है… यहां तक चीन, पाकिस्तान, माओवाद और कश्मीरी आतंकवाद-अलगाववाद को राहुल और उनकी पार्टी ने खुल कर समर्थन दिया है…

राष्ट्रवादियों को समझ में नहीं आ रहा है कि 100 बार बोला गया झूठ… पब्लिक कुछ समय बाद सच मानने लगती है… वक्त आ चुका है कि इस सेक्यूलर गठबंधन को शब्दों के साथ स्ट्रेटिजिकल चोट मारी जाय!…

अब संभ्रांत वैचारिक लड़ाई का युग चला गया… जिस गुरिल्ला युद्ध कौशल का प्रयोग 44 सीटों वाली कांग्रेस करती रही है और आपकी नाक में दम करके रखा है… वही युद्ध नीति आपको अपनानी चाहिए थी…

अब अपने सैनिकों के हाथ-पैर और मुँह पर लगा टेप हटाइये और रणभेरी बजने दीजिए… अंजाम की परवाह मूर्ख और डरपोक करते हैं…!!!

सत्ता शीर्ष पर बैठे नवोदित सेकुलरों की कारगुज़ारियों से फिर रौंदे जाएंगे हम

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