जिस देश में गंगा रहता है वहां गंवार और डूड के बीच ऐसा संवाद होता है

गंवार : ई एकदम चरका-चरका (सफेद) चावल क्यों खाते हो? इसमें है क्या ? सब तो खत्म हो गया!

डूड : ओये! जस्ट शटअप मैन! बड़ा आया ज्ञान देने! कुछ अता पता भी है राइस के कम्पोजिशन के बारे में??

गंवार : ई जर्सी का दूध काहे पीता है बाबू? ई सही नहीं है!

डूड : मिल्क इज मिल्क ! और ये गाय का ही है। डोंट ट्राई टू टीच मी! अंडरस्टैंड ??

गंवार : ई खड़े-खड़े पानी मत पीयो बाबू! अच्छा नहीं होता!

डूड : वाट नॉनसेंस ! पानी का जो काम बॉडी के अंदर होता है वो तो होता ही है चाहे खड़े पीये या बैठ के। यू इल्लिट्रेट विलेजर्स।

गंवार : गोबर-गोंयठा वाले सब्जी आजकल कहाँ .. सब के सब खाद वाले.. सब पिलपिलवा!!

डूड : ओह! मेन! .. व्हेर डू यू लिव ?? फर्टिलाइजर्स आर आनली फॉर इंक्रिजिंग एग्रीकल्चर प्रोडक्शंस एंड नथिंग एल्स!.. गँवार के गंवार ही रहोगे.. कभी गांव से बाहर निकलो तब पता चलेगा कि साइंस ने कितना तरक्की कर लिया है, नहीं तो गोबर गोंयठे में ही उलझे रहोगे !!

कुछ वर्ष बाद ..
डूड फोन पे “मेन! माय शुगर लेवल इज हाई!”

गंवार बीड़ी फूँकते हुए इधर से “ओह! माई गोट!”

डूड : मेरा ब्लड प्रेशर बहुत बढ़ गया डूड!

गंवार : ओह! माई गोट!

डूड : मुझे हार्ट अटैक का झटका आया डूड !अभी हॉस्पिटल में हूँ!

गंवार दूसरा बीड़ी चढ़ाते हुए : वाट आर यू सेयिंग?? ओह! माई गोट!!!

जे डूड !!

(व्यवहारिक ज्ञान को किताब की कसौटी पे उतारने वालों डुडों का हाल! … अपन तो अभी चार बीड़ी और फूकेंगे!)

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