सीओ साहब, घास कटाई बहुत हुई, अब आप भी जागें

फौजें पीस पोस्टिंग में क्या करती हैं?

करने को बहुत कुछ है।

ऑफिशियली कहें तो पीस पोस्टिंग वॉर की तैयारी के लिए होता है। पर सचमुच में देखें तो पीस पोस्टिंग ज्यादा व्यस्त समय होता है।

एडम-इंस्पेक्शन, पीपीटी, बीपीईटी, फील्ड फायरिंग, GOC-विजिट, कॉर्प्स-कमांडर की विजिट, बैटल ऑनर डे, कोर-डे, विजय-दिवस, पागल-जिमखाना, सैनिक-सम्मेलन, सीओ साहब का दरबार, सीओ साहब की मेमसाब का फैमिलीज़ का दरबार…

कुछ ना कुछ चलता ही रहता है। और फिर इन सब की तैयारी में सबकुछ चमकता दमकता रहता है। हर दीवाल की, हर पेड़ की गेरू चूना से पुताई, घास-कटाई… फौज व्यस्त रहती है।

2001 में एकाएक संसद पर हमले के बाद लड़ाई के लिए मोबिलाइज़ेशन का ऑर्डर आ गया। हम चल तो पड़े, पर हमारा ईएमई ऑफिसर खुश नहीं था।

पहले कभी भी वह सीओ के पास जाता था गाड़ियों टैंकों की शिकायत लेकर तो सीओ कहता था – बॉल्स!… अब सीओ की भी चिंता के मारे बुरी स्थिति थी। सारे टैंकों की बुरी हालत थी। गन्स जैसी तैसी हालात में थे, ट्रैक्स खराब थे।

खैर, उस बन्दे ने लगातार महीने भर तक दिन रात काम किया। लगभग चौबीसों घंटे काम चला। गन बैरल की सफाई हुई। आधे टैंकों के ट्रैक्स ऑर्डिनेंस से लाकर बदले गए। सारी गाड़ियों की सर्विसिंग हुई, आयल-फिल्टर्स बदले गए। बन्दे ने सीओ को खूब गालियाँ निकालीं, पर महीने भर में गाड़ियों और टैंकों को लड़ाई के लायक बनाया।

2014 से आज तक बहुत समय बर्बाद हुआ है। विकास के नाम पर गेरू-चूना और घास कटाई हुई है। सीओ साहब के दरबार में मन की बात हुई है। जिनपिंग और ओबामा की विज़िट हुई है। मने पीस टाइम काम खूब हुआ है, पर लड़ाई की तैयारी नहीं हुई है। दुश्मन आज भी ठाठ से घूम रहे हैं सत्ता के गलियारों में…

2019 आज फिर एक लड़ाई है। अस्तित्व के संघर्ष का प्रश्न है। सीओ साहब को पता नहीं क्या लगता है… कि चुनाव आते जाते रहेंगे? लोकतंत्र का महोत्सव चलता रहेगा? मगर हमें पता है कि अगर यह हारे तो दोबारा खड़े होने का मौका नहीं मिलेगा।

चाहे जितनी गालियाँ निकाल लो… करने को बस इतना ही है कि लड़ना है। जो तैयारी आज तक नहीं हुई वह करनी है और लड़ाई पर चलना है… सीओ साहब, घास कटाई बहुत हुई… आप भी जागें…

याद रखो, तुम जीतोगे, क्योंकि तुम उन हरामज़ादों से बेहतर इंसान हो…

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