‘ब्लेम गेम’ खेलनेवाली आम आदमी पार्टी के अलोकप्रिय होने के मुख्य कारण

पिछले दिनों एक साथी ने मुझसे पूछा कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी के बारे में आपके क्या विचार हैं? साथ ही उन्होंने मुझे एक वीडियो दिखाया जिसमें दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया घर-घर संपर्क करके लोगों के हाल-चाल जान रहे हैं। और उनसे कोई समस्या हो तो उसके बारे में बताने का कह रहे हैं।

दरअसल वह साथी चाहता था कि मैं आम आदमी पार्टी के बारे में कुछ अच्छी बातें करूं। लेकिन मुझे लगा कि मुझे निष्पक्ष रहना चाहिए और निष्पक्षता के साथ अपने विचार रखने चाहिए तो मैंने उन्हें बताया कि –

दरअसल दिल्ली की जो स्थिति है, वह सबके सामने है। वह अपेक्षाकृत छोटा राज्य है। करोड़ों की जनसंख्या है, लेकिन बहुत कम क्षेत्रफल में निवास करती है। परंतु दिल्ली की यह स्थिति वहां के राजनेताओं के लिए सहूलियत का काम करती है।

जैसे राजस्थान वगैरह बड़े राज्यों में सरपंच वगैरह का चुनाव होता है तो उम्मीदवार घर-घर जाकर संपर्क करता है। वैसे ही दिल्ली में जब विधायक और सांसदों के चुनाव होते हैं तो वो लोग घर-घर जाकर के संपर्क करते हैं। इसके लिए उन्हें किसी गाड़ी या अतिरिक्त साधन की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

इसी प्रकार से जब किसी मंत्री या नेता के मन में जनता से कुछ विचार विमर्श करने का मानस बने तो वह घंटे आधे घंटे के लिए किसी एक गली में निकल सकता है, और हजारों लोगों से संपर्क कर सकता है। जिसकी बानगी उस वीडियो में भी देखी जा रही है।

आप पार्टी को जनता ने दिल्ली में एकदम से दोनों राष्ट्रीय पार्टियों को नकार करके जिस तरह से स्थापित किया है उसके पीछे जनता का उद्देश्य मात्र यह नहीं था कि नेता जनसम्पर्क कर सकें। वास्तव में आम आदमी पार्टी के जो बहुत बड़े बड़े बदलाव के मुद्दे थे, उन मुद्दों पर सरकार ने कितना काम किया है यह सोचने वाली बात है।

यदि जनलोकपाल, सीसीटीवी लगाना, जनता दरबार लगाना, बिजली और पानी सस्ते करने की और अन्य बहुत सारे जो बड़े-बड़े वादे थे वह यदि लागू नहीं हुए हैं तो फिर मुझे नहीं लगता कि आम आदमी पार्टी कोई अलग पार्टी है। और मैं तो इस से भी ज्यादा बढ़कर के कहूंगा कि यह “पाखंडी पार्टी” के रूप में कार्य कर रही है जो पूरे समय यह दिखावा करती है कि उसे काम नहीं करने दिया जा रहा है। जबकि चुनाव लड़ रहे थे तभी उन्हें पता था कि दिल्ली में जो सरकार होती है उसकी शक्तियां कितनी होती है?

जानबूझकर किसी कार्य को लटकाने के लिए फ़ाईल में कमी छोड़ देते हैं। उसमें कमी रखते हैं तो निश्चित है कि वह फाइल अटक जाएगी। और जब वह फाइल रुक जाती है तो फिर हल्ला करते हैं कि हमें काम नहीं करने दिया जा रहा है।

मैं थोड़े कड़े शब्दों में इस पार्टी के बारे में कहूं तो मैं कहूंगा कि आम आदमी पार्टी दरअसल नक्सलियों का अपडेटेड वर्जन है। शायद आप भी मानते होंगे!

कुछ उदाहरण दे रहा हूँ भारतीय सेना की निंदा करना, जम्मू कश्मीर को आज़ाद करने के लिए पैरवी करना, विदेशी घुसपैठियों के पक्ष में अपनी बात रखना, देश विरोधी नारे लगाने वालों के पक्ष में खड़े होना, सर्जिकल स्ट्राइक को नकारना और हाल ही में ईसाइयों के एक बहुत बड़े सम्मेलन को आयोजित करने में सहयोग करने के उद्देश्य से मुख्य अतिथि बनना आदि गतिविधि है जो मेरी बात को मज़बूती देती है।

दरअसल ये लोग हिंसा को बहुत ही जायज़ ठहराते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि जो इनकी विचारधारा को स्वीकार नहीं कर रहा है वह गलत है । अपनी विचारधारा सही है यह साबित करने के लिए बड़े से बड़ा नेता कहीं किसी भी हद तक गुज़र सकता है। इसकी बानगी आप और हम देख चुके हैं कि किस प्रकार से मुख्य सचिव को घर बुला के पीटा गया।

पार्टी की स्थापना के औचित्य पर भी हमें बात करनी चाहिए। जिस प्रकार से आम आदमी पार्टी को उनके संस्थापक सदस्य छोड़ कर कर जा रहे हैं उसका एक ही कारण है कि उनको वह चीजें इस पार्टी में नहीं दिख रही है जिसकी उनको सम्भावना नजर आती थी।

इसलिए भाई माफ करना लेकिन मैं इस सरकार को पसंद नहीं कर सकता। यदि शिक्षा के क्षेत्र में मनीष सिसोदिया अच्छा काम कर रहे हैं तो निश्चित तौर से यह बहुत अच्छी बात है पर यह काफी नहीं है यह एक छोटा सा कार्य है।

इसके अन्य उदाहरण मैं आपके सामने रखता हूं .

आपने महाराष्ट्र में सुना होगा कुछ पूर्व सरकारें मूत्र (पेशाब) करके बांध भरने का उलाहना देते थे। विदर्भ में पानी की कितनी किल्लत होती थी? क्या इन वर्षों में आपने वह बातें सुनी?

नहीं सुनी। मतलब वहां की फडणवीस सरकार ने इस संदर्भ में बहुत बेहतरीन कार्य किया लेकिन शायद वह काफी नहीं है। इसी प्रकार से राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था की काया पलट करने का प्रयास किया है। सरकारी स्कूलों का हाल काफी सुधरा है। सब कार्य ऑनलाइन हो रहा है। बहुत अच्छा कार्य हुआ है। पर यह पूरी सरकार की उपलब्धि के रूप में देखें तो यह काफी नहीं है। पूरे देश की बात करें तो हम जानते हैं कि गाहे बगाहे हर महीने या तिमाही में हम “बम विस्फोट” की खबरें सुनते थे। क्या पिछले कुछ सालों में आपने ऐसा सुना है?? इस संदर्भ में भी सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है।

पर यह एक कार्य है। इससे पूरी सरकार को हम बेहतर नहीं कर सकते जब तक सरकार का विज़न क्लियर नहीं है।

किसी भी सरकार का एक मुख्य ध्येय होता है जैसे कांग्रेस की सरकार जन कल्याण को महत्व देती थी। जैसे लोगों को सस्ता अनाज मिलना चाहिए। सस्ती चीजें मिलनी चाहिए। जिससे उनका जीवन यापन चलता रहे। आपने देखा होगा उस समय मनरेगा में रोज की सौ रुपए की मजदूरी हो, 2 रुपये किलो अनाज हो, 5 रुपये किलो आटा हो, यह सब उसी योजना का प्रतिफल था। जिससे आदमी भले ही ऊपर नहीं उठ पाए लेकिन उसका जीवन बसर होता रहे।

BJP का ध्येय यह है कि विनिर्माण क्षेत्र में काम होना चाहिए। बुनियादी सुविधाओं का विकास होना चाहिए जैसे सड़क, अस्पताल, स्कूल। इनकी व्यवस्था सुधारनी चाहिए जिससे सुविधाएं बेहतर होगी जिससे विकास में आसानी होगी। इससे लोगों को त्वरित फायदा नहीं मिलता है। उन्हें सस्ता अनाज नहीं मिलता है। खुद को मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन लंबे समय बाद सामाजिक जीवन स्तर सामूहिक रूप से ऊपर उठता है।

लेकिन मेरे प्यारे दोस्त मुझे ऐसा लगता है कि आम आदमी पार्टी का इस प्रकार का कोई ध्येय नहीं है। हां कुछ चीजें कांग्रेस से मिलती-जुलती जरूर थी। जैसे पानी फ्री दे देंगे, बिजली सस्ती कर देंगे, लेकिन वह सब वह नहीं कर पाए।

वैसे भी आम आदमी पार्टी का सिर्फ और सिर्फ उद्देश्य यही है कि कैसे भी करके एक दूसरे से झगड़ा करना। बेबुनियाद आरोप लगाना। अब देखिए कि जितने भी आरोप लगे थे उन सब पर माफी मांग ली गई । करोड़ों रुपए पहले कोर्ट में खर्च किए फिर माफी मांग ली। क्यों? क्योंकि उन्हें लगा कि यह आरोप यदि साबित नहीं हुए तो कम से कम 5 साल की सजा हो सकती है। और इस प्रकार की सजा के बाद उनकी विधायकी भी चली जाएगी और मुख्यमंत्री वगैरह भी नहीं बन पाएंगे। तो तुरंत सबसे बड़ी ही बेहयाही से माफी मांगनी शुरू कर दी।

कितनी बड़ी विडंबना है कि चिदंबरम जैसे बड़े नेता पर जितने गंभीर आरोप लगे थे। लगता था केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनते ही उन्हें फांसी की सजा हो जाएगी, लेकिन हुआ क्या?? उन्हीं को अपना वकील बना रहे हैं।

शीला दीक्षित बाहर आराम से घूम रही है कह रहे थे 1 महीने के अंदर जेल में डाल देंगे।

भारत एक प्रजातांत्रिक देश है। यहां विचारधारा को स्थापित करने का मौका हर किसी को मिलता है। लेकिन जिस तरीके से “ब्लेम गेम” के माध्यम से यह चीजें अरविंद केजरीवाल करते हैं वह शायद भारत के जनमानस को प्रिय नहीं है। यही कारण है कि आम आदमी पार्टी बड़ी तेजी से अलोकप्रिय हो रही है।

– गोपाल विश्नोई

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY