कुछ जवाब देना तो बनता है राहुल बाबा

जर्मनी के Bucerius Summer School on Global Governance में राहुल गाँधी ने कहा कि कि 70 वर्ष पहले ग्रामीण भारत ने शहर की तरफ पलायन करना शुरू कर दिया जिसके कारण जातिगत बंधनो में दरार आने लगी।

राहुल ने कहा, इस बदलाव के कारण सरकार ने दलित, पिछड़ी जाति, जनजाति और अल्पसंख्यकों का समर्थन करना शुरू कर दिया।

उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले की सरकारों ने ऐसे लोगों का समर्थन किया. लेकिन नरेंद्र मोदी के आने के बाद भोजन और रोजगार के अधिकार को कमज़ोर किया गया.

राहुल ने कहा कि नोटबंदी से लघु और मध्यम उद्योगों को होने वाला कैश फ्लो समाप्त हो गया जिससे बहुत से लोगों को गांव की तरफ वापस जाना पड़ा.

राहुल गांधी के मुताबिक़ सरकार ने यह जो तीन कदम उठाएं – भोजन और रोजगार के अधिकार को कमज़ोर करना, दलित, पिछड़ी जाति तथा अल्पसंख्यक को समर्थन ना देना, तथा नोटबंदी – इन कदमों ने जनता को नाराज़ कर दिया. अतः जब आप लिंचिंग, दलितों तथा अल्पसंख्यकों पर हमले की खबर सुनते हैं, तो यह तीन कारण उसके पीछे हैं.

अगर मैं उनके भाषण के समय मौजूद होता तो कुछ प्रश्न पूछता.

सबसे पहले आप की सरकार ने इन 70 वर्षों में क्या किया जिनसे ग्रामीण भारत का शहर की तरफ पलायन ना हो?

दूसरा, आपने क्या नीतियां बनाई जिनसे पिछड़ी जाति पिछड़े ना रहे; दलित, दलित ना रहे?

तीसरा, अगर मोदी सरकार के इन तीन कदमों से दलित, पिछड़ी जाति तथा अल्पसंख्यक नाराज़ हैं तो फिर यह लिंचिंग कौन कर रहा है? इस लिंचिंग के लिए आपने सनातन धर्मियों तथा गौरक्षकों को क्यों दोषी ठहरा दिया?

चौथा, अगर आप की सरकार ने इतने ही महान कार्य किए थे तो क्यों उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावों में आपकी जड़ें उखड़ गई? क्यों आपको भाजपा से चुनाव लड़ने के लिए हर ऐरी गैरी नत्थू खैरी पार्टियों से गठबंधन की भीख मांगनी पड़ रही है? क्यों आप की पार्टी 44 सीटों पर सिमट गई?

अंत में, स्कूल की वेबसाइट के अनुसार आप Bucerius Summer School में पहले भी जा चुके हैं. आपका उस स्कूल से क्या संबंध है?

कुछ जवाब देना तो बनता है!

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