सोनिया-काल में ना केवल निजी क्षेत्र, बल्कि सरकार भी उधार लेकर चला रही थी काम

जो लोग भारत की अर्थव्यवस्था पर पैनी निगाह रखे हैं उन्होंने ध्यान दिया होगा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के सत्ता में आने के बाद जीडीपी या विकास दर नापने की पद्धति बदल दी गई थी।

यद्यपि इस पद्धति को बदलने का कार्य सोनिया सरकार के समय में शुरु हो गया था, लेकिन नयी व्यवस्था को लागू मोदी सरकार के समय में किया गया।

इसके बदलने से कई लोगों ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के समय में विकास दर आर्टिफिशियल है, पद्धति बदलने से बढ़ गई है। लेकिन अब जब उसी पद्धति को सोनिया सरकार के समय की विकास दर पर लागू कर दिया गया जिससे उस सरकार के पहले 5 वर्ष में विकास दर स्वस्थ दिखाई दे रही है।

अब सबके मुंह बंद हो गए और कांग्रेसी और उनके समर्थक पत्रकार चिल्ला रहे हैं कि सोनिया सरकार के समय में विकास दर अधिक थी जबकि मोदी सरकार के समय में विकास दर गिर गई है। इसका विश्लेषण करने का प्रयास करते हैं।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि अटल बिहारी वाजपेई की सरकार के अंतिम वर्ष में विकास दर 8% थी। इसके अलावा उनकी सरकार के समय में भारत से निर्यात अधिक हो रहा था और आयात कम।

लेकिन सोनिया सरकार के आते ही स्थिति पलट गई; आयात बढ़ने लगा, निर्यात कम होते गए। देखते-देखते उनकी सरकार के अंतिम 5 वर्ष में आयात की दर अत्यधिक बढ़ गई और बजट का घाटा बढ़कर के 6% से अधिक हो गया।

जबकि मोदी सरकार के समय में आयात पर रोक लगी है और निर्यात में बढ़ोतरी हुई है और बजट का घाटा कंट्रोल में लाया गया है।

एक तरह से यूं समझिए कि सोनिया सरकार के समय में ना केवल निजी क्षेत्र उधारी से बिजनेस चला रहा था, बल्कि सरकार भी अपना कामकाज उधार लेकर चला रही थी।

उधार पर धंधा करने का मतलब यह होता है कि आने वाली सरकार और आने वाली पीढ़ियां उस कर्ज को चुकाती फिरेंगी, जिससे वे निवेश नहीं कर पाएंगे और उन पीढ़ियों के विकास में बाधा आएगी।

उधारी ना चुकाने का मतलब यह भी होता है कि वह पैसा कहीं ना कहीं किसी ने गबन कर लिया।

एक-आध महीने की आयात निर्यात उठापटक पर शोर ना मचाएं। जो लोग यह कहते हैं कि मोदी सरकार को आयात में पेट्रोल के दाम कम होने से मदद मिली, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि उनकी सरकार के पहले 2 वर्षों में भयंकर सूखा भी पढ़ा था।

सोनिया सरकार के आते ही आर्थिक सुधार को दरकिनार कर दिया गया तथा दो ऐसे कदम उठाए गए जिसमें भारत की अर्थव्यवस्था का बंटाधार कर दिया।

पहला, इस सरकार ने वित्तीय अनुशासन को भंग कर दिया; बजट का घाटा बढ़ता गया; महंगाई बढ़ती गई और विकास दर से अधिक हो गयी। अगर महंगाई की दर विकास दर से अधिक हो जाए तो इसका मतलब यह है कि आप और गरीब हो रहे हैं। कहने के लिए देश विकास कर रहा है लेकिन महंगाई से आपकी होने वाली आय पहले की तुलना में कम हो गई। महंगाई से अभिजात्य वर्ग को लाभ मिलता है क्योंकि उन्होंने अगर रु. 100 करोड़ लोन का लिया था तो 10% महंगाई दर के कारण एक वर्ष में उसकी वैल्यू रु. 90 करोड़ रह जाती है। जबकि बढ़ी हुई कीमत के नाम पर वे आपसे अधिक दाम वसूलते हैं। रियल स्टेट इस का जीता जागता उदाहरण है।

दूसरा, बैंकों ने एकाएक लापरवाही से बिना किसी चेकिंग के लोन देना शुरु कर दिया। वाजपेई सरकार के कार्यकाल में बैंकों द्वारा लोन देने की दर 18% के आसपास थी। लेकिन सोनिया सरकार के पहले वर्ष में यह दर 31% उसके बाद 37% थी। तदोपरांत लोन देने की दर लगातार काफी अधिक रही।

ऐसे लोन दिए गए जिनके चुकने की कोई आशा नहीं थी। यहां तक कि लोन चुकाने के लिए भी लोन दिए गए। ऐसे सारे लोन मोदी सरकार की झोली में एनपीए या खराब लोन के रूप आ गिरे। तभी प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा था कि सत्ता संभालने के बाद उन्होंने देश के बैंकों की खस्ता हालत को छुपाए रखा, नहीं तो उस समय भारत की अर्थव्यवस्था से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का विश्वास उठ जाता और अर्थव्यवस्था का भट्टा बैठ जाता।

अंत में, एक और बात जो नोट करने लायक है वह यह है कि सोनिया सरकार के दस वर्षो के दौरान भारत की प्रगति 7.7% थी जबकि चीन की प्रगति 10.3 प्रतिशत थी। भारत के समकक्ष अन्य उभरते हुए देशों की प्रगति 6.4% थी।

कहने का मतलब यह है कि चीन तथा अन्य उभरते हुए देश भी प्रगति कर रहे थे जिसका लाभ सोनिया सरकार को मिला। सोनिया सरकार के समय में भारत की दर अन्य विकासशील देशों के दर के समकक्ष थी और चीन से कहीं बहुत कम थी।

लेकिन मोदी सरकार के समय में क्या स्थिति है? उनके सत्ता में आने के बाद से लेकर अब तक भारत की विकास दर 7.4% है, जबकि चीन की विकास दर 6.9% और भारत के समकक्ष उभरते हुए देश 4.5 प्रतिशत की दर से विकास कर रहे हैं। दूसरे शब्दों में, मोदी सरकार के दौरान विश्व में मंदी छाई हुई है जबकि भारत प्रगति कर रहा है और सबसे तेज प्रगति कर रहा है।

काँग्रेस पोषित आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था का रचनात्मक विनाश कर रहे मोदी

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