भयावह है बिहार के आश्रय गृहों की स्थिति : TISS की रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सार्वजनिक की गई टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की रिपोर्ट से बिहार के आश्रय गृहों की डरावनी स्थिति सामने आई है. रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से जिक्र है कि बिहार के लगभग हर शेल्टर होम में कमोबेश मात्रा में यौन शोषण की घटनाएं हो रही है.

राज्य के 110 शेल्टर होम की सोशल ऑडिट के बाद तैयार की गई इस रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा- Grave Concerns’ Institutions Requiring Immediate Attention है,  जिसमें मुजफ्फरपुर शेल्टर हाउस समेत बिहार के कुल 17 संस्थानों का जिक्र करते हुए समाज कल्याण विभाग को सुझाव दिया गया है कि इन संस्थानों को लेकर तुरंत एक्शन लेने की जरूरत है.

TISS की टीम ने बिहार के कुल 110 शेल्टर होम का सोशल ऑडिट किया है लेकिन 110 पन्नों की इस रिपोर्ट में सिर्फ 24 शेल्टर होम के बारे में ही विधिवत जानकारी दी गई है. रिपोर्ट में बाकी 86 जगहों पर सर्वेक्षण टीम ने क्या पाया इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया है.

1. सबसे पहले मुजफ्फरपुर शेल्टर हाउस का जिक्र है जिसमें वहां रहने वाली लड़कियों के हवाले से यौन उत्पीड़न की बात कही गई है.

2. फिर मोतिहारी के बाल गृह के बारे में बताया गया है कि किस तरह से वहां बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न हो रहा है, शारीरिक हिंसा हो रही है और एक बच्चे की गलती पर कैसे सबकी एक साथ पिटाई की जाती है.

3. भागलपुर और मुंगेर का जिक्र किया गया है. बताया गया है कि मुंगेर का बाल गृह और वहां चलने वाला सुधार गृह एक ही परिसर में चलाया जा रहा है. बाल गृह को भी सुधार गृह की तरह ही बैरकनुमा बनाया गया है.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बाल गृह का सुपरिटेंडेंट यहां रहने वाले बच्चों से अपने घर का निजी काम करवाता है और मना करने पर बच्चों की पिटाई करता है. एक बच्चे ने अपने गले पर 3 इंच का घाव दिखाते हुए आरोप लगाया कि ये सुपरिटेंडेंट की पिटाई का ही नतीजा है.

4. गया के बाल गृह के बारे में जानकारी दी गई है कि यहां बच्चों को जबरदस्ती कैद करके रखा जाता है.

5. पटना, मधुबनी और कैमूर के शेल्टर हाउस के बारे में लिखा गया है कि यहां छोटे-छोटे बच्चे भूखे मिले.

6. अररिया के सुधार गृह पहुंची टीम को बच्चों ने बताया कि सुधार गृह में तैनात सरकारी गार्ड उनकी पिटाई करता है. एक बच्चे ने तो यहाँ तक कह दिया कि ‘इस जगह का नाम सुधार गृह से बदलकर बिगाड़ गृह कर देना चाहिए.’

7. उसी तरह पटना के अल्पावास गृह की लड़कियों ने दावा किया कि उनके पास उनके घर का पता है, परिजनों के फोन नंबर हैं फिर भी उन्हें घरवालों से बातचीत नहीं करने दिया जाता. इसी अवसाद में एक लड़की ने आत्महत्या कर ली तो दूसरी लड़की पागल हो गई.

8. मोतिहारी के अल्पावास गृह में मानसिक तौर पर विक्षिप्त महिलाओं और लड़कियों के साथ शारीरिक हिंसा की शिकायत मिली. लड़कियों का आरोप था कि उन्हें सैनिटरी पैड तक नहीं दिए जाते.

9. मुंगेर के अल्पावास गृह में लड़कियों ने शिकायत की कि उनके शौचालयों में कुंडी तक नहीं है. सोशल ऑडिट टीम को एक कमरे में ताला लगा हुआ मिला, खुलवाने पर अंदर एक महिला और लड़की तख्त पर बैठी थी. अल्पवास गृह के कर्मियों ने दावा किया कि ये पागल हैं लेकिन वो टीम के एक सदस्य को गले लगाकर रोने लगी.

10. मधेपुरा के अल्पावास गृह में एक लड़की ने दावा किया कि उसे रास्ते से जबर्दस्ती उठाकर यहां लाया गया है और वापस नहीं जाने दिया जाता. टीम ने पाया कि अल्पावास गृह में बिस्तर तक मौजूद नहीं था और वहां रहने वाली लड़कियों और महिलाओं को जमीन पर ही सोना पड़ता है.

11. कैमूर के अल्पावास गृह की लड़कियों ने तो वहां के गार्ड पर ही यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं.

12. मुजफ्फरपुर और गया के सेवा कुटीर में लोगों को काम दिलाने के नाम पर लाया गया और वहीं रख लिया गया, वहां लोगों के साथ मारपीट होती है, अवसाद में लोग मानसिक संतुलन खो रहे हैं.

13. पटना के कौशल कुटीर में महिलाओं और पुरुषों दोनों के ही साथ शारीरिक हिंसा होती है, यहां मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें काम दिलाने का झांसा देकर यहा लाया गया और लम्बे समय से यहीं रखा गया है.

शेल्टर होम में अनियमितताओं, बच्चों, किशोरियों और महिलाओं के साथ शारीरिक और मानसिक प्रताडना की दिल दहलाने वाली खबरों के बीच कुछ राहत भरी रिपोर्ट भी है. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की सोशल ऑडिट रिपोर्ट में कुछ ऐसे शेल्टर होम का भी जिक्र है, जो बेसहारा और मासूम बच्चों को समाज से जोडने का काम कर रहे हैं. कई तरह की रचनात्मक गतिविधियों के जरिए अनाथ बच्चों की जिंदगी खुशहाल बनाने के लिए नए-नए प्रयोग कर रहे हैं. दरभंगा, बक्सर, सारण , नालंदा, कटिहार , भागलपुर और पूर्णिया में शार्ट स्टे होम का संचालन करनेवाले एनजीओ के अच्छे काम दूसरी एजेंसियों के लिए प्रेरक हो सकती है.

दरभंगा स्थित ऑब्जर्वेशन होम में रहवासी बच्चों और स्टाफ ने मिलकर किचन और फ्लावर गार्डेन बनाया था. इस काम से बच्चों और स्टाफ को खुशी तो मिलती ही है, खाने के लिए सब्जियां भी उपलब्ध हो जाती है. सुपरिन्टेंडेंट खुद बच्चों को पढ़ाते हैं और उनके साथ आउटडोर गेम भी खेलते हैं जिसके कारण सभी उन्हें पसंद करते हैं.

बक्सर स्थित चिल्ड्रेन होम के कर्मचारियों और बच्चों ने मिलकर लाइब्रेरी बनाई है. लाइब्रेरी के संचालन का काम और किताबों की दोस्ती बच्चों के जीवन पर सकरात्मक प्रभाव डाल रही हैं. यहां के कर्मचारी अपने नियमित जिम्मेदारियों के अलावा बच्चों को पढ़ाते और आर्ट एंड क्राफ्ट भी सिखाते हैं.

टी आई एस एस की रिपोर्ट के मुताबिक सारण की दत्तक ग्रहण एजेंसी में बच्चों की सुविधाओं के लिए पर्याप्त अधोसंरचना थी. बच्चे वहां स्वस्थ और खुश दिख रहे थे.

कटिहार स्थित चिल्ड्रेन होम में एजेंसी ने कुछ बड़े बच्चों को ही छोटे बच्चों को पढ़ाने के काम में लगाया था. इस तरह बच्चे आपस में घुलमिल कर फ्रेंडली वातावरण में शिक्षा ग्रहण करते हैं। बच्चों में नेतृत्व कौशल भी विकसित हो रहा है.

भागलपुर स्थित चिल्ड्रेन होम फॉर गल्र्स में स्टाफ अपने बच्चों के जन्मदिन की पार्टी में अनाथ बच्चों को भी प्यार से शामिल करते हैं. उन्हें एहसास दिलाते हैं कि वे समाज में अवांछित नहीं हैं. इससे बच्चियों और स्टाफ में आपस में अच्छी बॉन्डिंग है.

पूर्णिया के चिल्ड्रेन होम में बाहरी लोगों द्वारा बच्चों के लिए अक्सर शैक्षणिक , मनोरंजक और अन्य गतिविधियां संचालित की जाती है. इससे बच्चे बाहरी दुनिया और समाज से खुद को जुड़ा महसूस करते हैं.

नालंदा स्थित शांति कुटीर की युवतियों को हर शाम नजदीकी मंदिर में जाने की अनुमति है. इसके कारण युवतियों की सोच पर सकरात्मक असर पड़ा है. यहां के संचालक ने बताया कि कभी भी किसी युवती ने इस दौरान यहां से भागने की कोशिश नहीं की.

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