दोस्ती के फ़र्ज़ी दावे की नकाब में काँग्रेस के दूत बनकर गए थे सिद्धू

नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पार्टी काँग्रेस सरासर सफेद झूठ बोल रहे हैं। देश की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।

सिद्धू की पाकिस्तान यात्रा को एक दोस्त के निमंत्रण पर दूसरे दोस्त सिद्धू द्वारा की गयी यात्रा बता रही है कांग्रेस। यही राग सिद्धू भी अलाप रहे हैं।

अब जानिये जरा कि इमरान खान के कितने बड़े दोस्त हैं सिद्धू।

जिन मुश्ताक मुहम्मद की अंगुली पकड़कर उनकी कप्तानी में इमरान खान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की ऊंचाइयों तक पहुंचे, उसके बाद जिन आसिफ इकबाल और ज़हीर अब्बास की कप्तानी में इमरान खान बरसों तक खेले, उन तीनों को अपने शपथ ग्रहण में इमरान खान ने ना बुलाया, ना ही वो तीनों उनके शपथग्रहण में गए।

अपने 21 बरस लम्बे क्रिकेट कैरियर में इमरान खान जिन खिलाड़ियों के साथ खेले उनमें से केवल जावेद मियांदाद, वसीम अकरम, वकार यूनुस, आकिब जावेद ही उनके शपथग्रहण में गए थे।

पूरी दुनिया से कोई क्रिकेट खिलाड़ी उनके शपथग्रहण में शामिल नहीं हुआ, सिवाय सिद्धू के। क्या इमरान खान के इतने बड़े और ख़ास दोस्त हैं सिद्धू?

इसका जवाब मेरे यह कुछ सवाल दे देते हैं।

कांग्रेस और विशेषकर सिद्धू को यह बताना चाहिए कि उनके इतने घनिष्ठ दोस्त इमरान खान ने एक के बजाय तीन शादियां की हैं, पर उन्होंने अपने पक्के दोस्त सिद्धू को उन तीनों शादियों में कभी क्यों नहीं बुलाया था?

इमरान खान अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि जिस कैंसर अस्पताल को बताते हैं उसके उदघाटन के शानदार जश्न में उन्होंने अपने घनिष्ठ दोस्त सिद्धू को क्यों नहीं बुलाया था? जबकि उस जश्न में दुनिया भर के कई खिलाड़ियों को बुलाया गया था।

सिद्धू यह भी बताएं कि उन्होंने अपनी खुद की शादी में अपने घनिष्ठ मित्र इमरान खान को क्यों नहीं बुलाया था? उनकी शादी में इमरान खान क्यों नहीं आए थे?

यही नहीं, सिद्धू के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि उनका मंत्री बनना था। सिद्धू ने अपनी उस उपलब्धि के उस जश्न में शामिल होने का निमंत्रण इमरान खान को क्यों नहीं दिया था? इमरान खान उनके शपथग्रहण में क्यों नहीं आए थे?

दरअसल अपने क्रिकेट जीवन के शिखर के दौरान इमरान खान अत्यन्त अहंकारी और बदतमीज़ आदमी हुआ करते थे। उस दौर के अनेक पाकिस्तानी/ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों ने अपनी किताबों में बहुत विस्तार से इसपर लिखा है। यही कारण है कि उस दौर के उनके साथी रहे केवल 4 क्रिकेटर उसके जश्न में शामिल हुए तथा दुनिया का कोई क्रिकेटर शामिल नहीं हुआ।

ध्यान रहे जिस दौर में इमरान खेलते थे उस दौर में सिद्धू औसत दर्जे के वह क्रिकेटर थे जो भारतीय टीम में कभी स्थायी जगह नहीं पा सके और लगातार अंदर बाहर होते रहते थे।

अतः जिन वेंगसरकर और श्रीकांत सरीखे भारतीय कप्तानों के साथ क्रिकेट के मैदान में इमरान खान ने दर्जनों बार हाथ मिलाए, उनके साथ खेले, लेकिन इन सबको छोड़कर औसत दर्जे के खिलाड़ी सिद्धू के साथ उनकी ऐसी कौन सी गहरी दोस्ती कब हो गयी थी?

दरअसल भारत में घुसपैठ करने के लिए पाकिस्तानी फौज जिस तरह आतंकियों को कवर फायर देती है, ठीक उसी तरह सिद्धू को कवर फायर देने के लिए ही इमरान खान ने कपिल देव और सुनील गावस्कर को भी निमंत्रण भेज दिया था।

हालांकि वे भलीभांति जानते थे कि यह दोनों ही नहीं आएंगे क्योंकि उन्होंने जब कैंसर अस्पताल के लिए चंदा मांगा था तब कपिल देव ने उनको मुंहतोड़ जवाब दिया था और गावस्कर ने भी अंगूठा दिखा दिया था।

इसलिए यह जान समझ लीजिए कि इमरान और सिद्धू की कोई दोस्ती कभी नहीं रही। दोनों एक-दूसरे के दोस्त कभी नहीं रहे। दोनों की दोस्ती के फ़र्ज़ी दावे की नकाब में सिद्धू वहां कांग्रेस के दूत बनकर ही गए थे।

सिद्धू की पाकिस्तान यात्रा और वहां उनकी करतूतों के पक्ष और समर्थन में खुलकर खड़े होकर कांग्रेस ने स्थिति को शीशे की तरह साफ कर दिया है।

जब आपकी हैसियत ही नहीं मुद्दों पर बात करने की, तो करने क्या गए थे वहां?

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