अराजकता इनकी खाद है, दंगे इनका विटामिन और लाशें इनका पौष्टिक आहार!

भारत में एक ग़लतफ़हमी है और वो बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है… भारत में कम्युनिस्टों को लेकर। भारत में जबसे कम्युनिस्ट हुए हैं वो ‘तथाकथित कम्युनिस्ट’ तबसे सिर्फ दलाली करते रहे हैं।

भारत में इनकी भूमिका को समझने के लिए एक फिल्म देख लीजिए… ‘हासिल’ जिसमें आशुतोष राणा, इरफ़ान खान, जिमी शेरगिल थे।

इन्होंने तो उत्कृष्ट अभिनय किया लेकिन पूरी फिल्म एक ख़ास रोल के बिना अधूरी है… वो है राज ज़ुत्शी उर्फ़ जैक्सन का रोल।

पहले वो आशुतोष राणा के गैंग में रहता है और बाद में उसके भाई से साथ… जब इरफ़ान गैंग घर पर हमला करता है तब ये छिप जाता है।

जब इरफ़ान इसको ज़िंदा पकड़ता है, पूछता है कि तुम्हारे भैया तो गए, अब तुम्हरी रोटी-सब्ज़ी-ब्रेड कैसे चलेगी? ये तुरंत पलट के इरफ़ान को बोलता है कि ‘आप खिलाओगे ब्रेड…’।

और फिर ये दलाल बन जाता है, आशुतोष राणा के भाई के गैंग में इरफ़ान का जासूस… जब तक पकड़ा नहीं जाता तब तक खूब डींगे मारता है, मौज मस्ती की ज़िंदगी काटता है .. खूब क्रान्तिकारी बातें करता है…

लेकिन जब पोल खुलती है तब भी ऐसे ढिठाई से नाटक करके झूठ बोलता है कि सामने वाला विश्वास ही कर ले, लेकिन अंत में कुत्ते की मौत मारा जाता है… बिलकुल यही है करैक्टर भारत के तथाकथित कम्युनिस्ट का …

देखा जाए तो विश्व भर में कम्युनिस्टों ने देश बनाए – तोड़े नहीं… चाहे सोवियत संघ (USSR), क्यूबा, चीन, कम्बोडिया, वेनेज़ुएला… जो भी हो यहाँ के कम्युनिस्टों ने देश नहीं तोड़े…

कैसे देश चलाया, अपने पुरुषों को भिखारी और महिलाओं को वेश्या बना के रखा, वो अलग विषय है लेकिन देश की सीमाओं को नहीं तोड़ा… लेकिन भारत में ये कम्युनिस्ट अलग प्रजाति है, जितना नीचे आप समझ सकते हैं उससे भी निचले पायदान पर बीमारी फैलाने वाले घिसटते कीड़े हैं…

इन्होंने आज़ादी के पहले मुसलमानों के साथ मिलकर भारत को तोड़ने, देश में दंगा कराने से लेकर अंग्रेज़ों की दलाली करके, यहाँ तक कि कांग्रेस के नेताओं को भी जेल में ठुंसवाया…

प्रत्येक देशभक्त संस्था से लेकर आज़ादी के असली नायकों और भारत विभाजन के विरोधियों के खिलाफ रहे हैं ये हमेशा… नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के बारे में अगर इनके विचार पढ़ेंगे तो इन पर थूकेंगे… राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चलते ये उम्मीद से कम हिन्दू और सिक्ख मरवा सके और देश का ज्यादा विभाजन नहीं करवा सके इसलिए ये आरएसएस के खिलाफ हैं।

पाकिस्तान के मुसलमान नेताओं को इनकी असलियत पता थी तो आज़ादी के बाद वहाँ पहुँचते ही इनको जम के ठोका, मारा, जेल भेजा और फिर नंगा करके वापस भारत में भगा दिया… लेकिन इधर भारत में इन्होने तुरन्त नेहरू के चरण पकड़ लिए… चरणभट्टई करने में इनको महारथ है अंग्रेज़ो के समय से… तो इन्होने रोटी, ब्रेड, दारू गांजा, पोस्टिंग वगैरह सब बदले में पाकर नेहरू को महामानव बना डाला।

अभी भी इनको उम्मीद है कि कोई नेहरू है जो इनको बचा ले जाएगा… लेकिन मुश्किल है… अब समय बदल चुका है… इनकी असलियत खुल रही है और ये पोल खुलते ही रहना चाहिए।

इसकी तोड़क विचारधारा ही नारे लगाने से लेकर दक्षिणी भारत राज्यों का अलग देश बनाने, जाति में बांटने आदि की प्रेरणा देती है… अराजकता इनकी खाद है, दंगे इनका विटामिन है, लाशें इनका पौष्टिक आहार।

अव्वल दर्ज़े की दुष्ट और बदमाश प्रजाति है कम्युनिस्ट… ये हरामखोर सपना देखते हैं कि भारत में कम्युनिस्ट राज लाएँगे… लेकिन ये मूर्ख इतना भी नहीं जानते कि दलाल, हरामखोर, चन्दाखोर, दारुबाज़, गांजाबाज़ और देशतोड़क लोगों का चिल्लर समूह कभी ‘लेनिन’, ‘स्टालिन’ या ‘माओ त्से तुंग’ नहीं पैदा करता… दलाल और फ्री के टुकड़ों पर पल रहे हो, एक दिन कुत्ते की मौत मारे जाओगे खुद ही आत्महत्या करके।

आदमज़ात के सबसे बड़े और पहले दुश्मन हैं ये वामपंथ जनित लाल आतंकवादी

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY