बाढ़ का पानी तो उतर जाएगा, लेकिन काँग्रेस की नीचता का ज्वार उतरना मुश्किल

उत्तराखंड की त्रासदी के समय राहुल गांधी विदेश यात्रा पर थे। त्रासदी की खबर मिलने के बाद भी वे भारत नहीं लौटे।

17 जून 2013 को आपदा के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार ने राहत सामग्री भरकर 25 ट्रक तैयार करवाए, जिन्हें राहुल गांधी हरी झंडी दिखाने वाले थे।

राहुल गांधी को आते-आते छह दिन लग गए। इस बीच ट्रकों पर लदी राहत सामग्री सड़ना शुरू हो गई।

23 जून को राहुल गांधी के हाथों झंडा दिखाकर ट्रक रवाना किये गए जबकि राहत की फौरन आवश्यकता थी।

इसके बाद डीज़ल खत्म हो गया तो ट्रक फिर रास्ते में खड़े हो गए। ये ट्रक कभी उत्तराखंड नहीं पहुंच सके।

तत्कालीन काँग्रेस नीत यूपीए सरकार हालातों से निपटने में असहाय नज़र आ रही थी। पांच हज़ार से ज्यादा लोग मारे जा चुके थे।

ऐसे में जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात की ओर से मदद की पेशकश की तो दंभ में उसे ठुकरा दिया गया।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने तीन ट्रक भर राहत सामग्री भेजी जिसे उत्तराखंड की तत्कालीन काँग्रेस सरकार ने लेने से इनकार कर दिया। मोदी को ताना मारते हुए कहा गया कि वे ‘आपदा पर्यटन’ पर निकले हैं।

अब केरल की बाढ़ के समय कांग्रेस नेता शशि थरूर कटोरा लेकर यूएन पहुंच गए। ये बताने के लिए कि वर्तमान सरकार कुछ नहीं कर रही।

कांग्रेस को अरब के पैसों से मदद में कोई एतराज नहीं है। केरल पर राजनीति में ये लोग सीमा पार कर गए हैं।

क्या इन्हें याद दिलाना पड़ेगा कि इनकी सरकार ने 25 ट्रक में भरी राहत सामग्री इसलिए सड़ा दी कि उनके युवा नेता की रंगरलियां विदेश में पूरी नहीं हो सकी थीं।

केरल और उत्तराखंड त्रासदी में राहत कार्यों की समीक्षा कीजिये। केरल में बाढ़ की तीव्रता उत्तराखंड से बहुत अधिक थी। इसके बावजूद हज़ारों लोगों को बचा लिया गया। अधिकांश मौते भू स्खलन से हुई।

केरल में मदद अभियान फौरन शुरू किया गया जबकि उत्तराखंड में पहाड़ों पर ही कितने लोग महज भूख-प्यास से मारे गए थे।

थरूर का कटोरा भारत के आत्मसम्मान को गिराने का प्रयास भर है और कुछ नहीं। भारत इस आपदा से निपटने में सक्षम है।

बाढ़ का पानी तो उतर जाएगा लेकिन कांग्रेस की नीचता का ज्वार उतरना मुश्किल है।

भारत अहसानमंद है मुंबई पुलिस के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर तुकाराम ओम्बले का

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