ये कसाई जो एक हाथ में हरी घास दिखा कर ललचा रहा है, दूसरे हाथ में छिपाए है चाकू

हमारे गांव में एक गाय थी। एकदम भक्क सफेद, गोरी चिट्टी, लंबी कद काठी एकदम गठीला शरीर, इतनी सुंदर कि देखते ही बनती थी।

जब ग्वाला उसे ले कर आया था तब वो बहुत दुबली पतली मरणासन्न थी, लेकिन धीरे धीरे उसकी हालत में सुधार हुआ।

ग्वाला उसे बहुत प्रेमपूर्वक रखता था, खूब खिलाता पिलाता, गाय बछड़ा देने वाली थी सो उसके खाने पीने में बदलाव कर पौष्टिक आहार दिया जाने लगा, सिर्फ हरी घास से काम ना चलने वाला था।

उधर गांव में ही एक कसाई घात लगाए बैठा रहता था। उसका तो बस एक ही सपना था येन केन प्रकारेण गाय उसके हाथ लग जाये। वो सोचता इतनी तंदरुस्त गाय है कितना गोश्त निकलेगा इसे हलाल करने के बाद, उस गोश्त को बेच कर मैं मालामाल हो जाऊंगा।

अब कसाई ने गाय को भड़काना शुरू किया। गाय से कहा ये ग्वाला तुम्हे अच्छा खाना नही देता, हरी घास नही देता, ये तुम्हें मूर्ख बना रहा है, कोई बछड़ा वछडा नहीं होने वाला, इस ग्वाले ने तुम्हें उल्टा सीधा खिला पिला कर कितना बेडौल कर दिया है, पहले तुम कितनी सुंदर थी पूरा गाँव तुम्हारे चर्चे करता था।

गाय ठहरी गऊ, सो कसाई की चिकनी चुपड़ी बातों में आ गयी, और आखिर एक दिन ग्वाले को छोड़ कर कसाई के साथ चली गयी।

कसाई ने सोचा गाय का प्रसव हो जाए तो इसे काट कर इसका गोश्त बेचूंगा और खूब पैसे कमाऊंगा। कुछ दिन बाद गाय ने एक सुंदर सी बछिया को जन्म दिया।

तब कसाई बोला देखा मैं ना कहता था वो ग्वाला तुम्हें मूर्ख बना रहा था, तुम इतने महीने ग्वाले के साथ रहीं कुछ हुआ? मेरे यहाँ आते ही तुम्हें बछिया हुई ये सब मेरी मेहनत का फल है।

गाय अब दूध देने लगी थी, कसाई उसे हलाल करने की सोच रहा था, लेकिन उसने सोचा हलाल तो मुझे इसे करना ही है आज नहीं तो कल, तो जब तक ये दूध दे रही है तब तक इसका दूध बेच कर ही पैसे बनाये जाएं। बाद में हलाल कर के इसके टुकड़े टुकड़े कर के गोश्त बेच कर अलग से पैसे मिलेंगे यानी मुनाफा ही मुनाफा, और फिर तब तक बछिया भी बड़ी हो जाएगी इसे भी काट कर बेच दूँगा।

कसाई का उद्देश्य था गाय से ज़्यादा से ज़्यादा पैसे कमाना, सो उसने गाय का पूरा दूध बेचना शुरू कर दिया। दूध ना मिल पाने की वजह से बछिया कमज़ोर होनी लगी। उधर मुनाफे के लालच में और गाय को हलाल करने का इरादा रखने वाले कसाई ने गाय के खाने पीने में भी जबरदस्त कटौती कर दी।

अब गाय भी कमजोर होने लगी। ग्वाले ने जो खिलाया पिलाया था उस से कुछ समय तो निकल गया लेकिन अब हालात बद से बदतर होने लगी। आखिरकार हालत इतनी खराब हो गयी कि गाय ने दूध देना बंद कर दिया क्योकि उसके शरीर मे अब जान बची ही नहीं थी।

इस से नाराज़ कसाई ने उसे यातनाएं देनी शुरू कर दीं, मारना पीटना शुरू कर दिया। एक दिन उसका कान काट दिया, पर गाय दूध देती कैसे उसका पूरा खून तो कसाई चूस चुका था।

एक दिन कसाई ने सोचा कि अब इस गाय में कुछ बाकी नही बचा है और निर्णय लिया कि कल सुबह इस गाय को काट कर हलाल कर देगा और इसका गोश्त बेच कर पैसे कमा लेगा।

गाय को यह बात पता चल गयी, गाय ने अंधियारी रात में ही ग्वाले को बहुत पुकारा, उसकी आवाज़ सुन ग्वाला भी गाय के पास आ गया। गाय की हालत देख ग्वाला हैरान था, कल तक गठीले बदन वाली सुंदर गाय आज हड्डियों का ढांचा बन चुकी थी। ग्वाले को गाय से बहुत प्रेम था सो वो उसे और बछिया को रात में ही अपने साथ ले गया।

अगले दिन कसाई ने ग्वाले पर बहुत सारे आरोप लगाए कि ग्वाले ने गाय चोरी की है वगैरह वगैरह, ग्वाले को खूब परेशान किया। बेचारा ग्वाला सारे आरोप झेलता रहा और गाय और बछिया की सेवा करता रहा। कभी उसके घर पुलिस आये तो कभी पत्रकार और बार बार उसे तंग करें कि तुमने गाय और बछिया चुराई है।

ग्वाले ने सबको साफ साफ बता दिया कि खुद गाय उसे अपना मालिक मान कर उसके साथ आई है। इसके बाद भी गली के गुंडे इस ग्वाले को गालियां देते रहे उसे चोर उचक्का कहते रहे, उसे मानसिक रूप से परेशान करते रहे। सारी मानसिक परेशानियों को झेलते हुए भी ग्वाला नि:स्वार्थ भाव से गाय और बछिया की सेवा करता रहा।

लगातार अच्छा खाना और प्रेम मिलने से गाय और बछिया दोनों ही दोबारा हृष्ट पुष्ट हो गयी। अब एक बार फिर से दोनों की खूबसूरती देखते ही बनती थी। एक बार फिर गाय की महिमा का डंका पूरे गाँव मे बजने लगा।

गाय जिधर से गुज़र जाए सब उसकी और बछिया की तारीफ करें। गाय को पूरी कहानी समझ मे आ चुकी थी की यह सब ग्वाले की वजह से हुआ है, क्योकि सब कुछ उसने खुद झेला था, लेकिन बछिया को इसकी खबर कहाँ, उसे तो लगा सब उसके दीवाने उसकी अपनी काबिलियत के कारण हैं।

इधर कसाई की नज़र जैसे ही दोनों पर पड़ी वो देख कर हैरान रह गया कि गाय और बछिया दोनों ही इतनी हृष्ट पुष्ट कैसे हो गयी! दोनों को देख कर कसाई की लार टपकने लगी। कसाई ने सोचा अगर मैने इस बार इन दोनों को पटा लिया तो डबल फायदा हो जाएगा, 2-2 गाय काट कर उनका गोश्त बेचूंगा तो वारे न्यारे हो जाएंगे।

कसाई ने अपना जाल बिछाना शुरू किया, गाय को फिर से रोज़ रोज़ भड़काना शुरू किया, कभी इस बात पर तो कभी उस बात पर, कि देखो तुम्हारा कान आज तक कटा है इस ग्वाले ने अभी तक टांके नही लगवाए। लेकिन गाय भुक्तभोगी थी सो उसने तपाक से जवाब दिया कि “कान काटा तो तुम्ही ने था ना? तुम सहानभूति ना दिखाओ”।

बहुत कोशिश के बाद भी कसाई गाय को भड़का ना पाया, तो उसने अपनी स्ट्रेटेजी बदली और सोचा अगर गाय को पिछली सब बातें याद हैं तो उसके बजाए बछिया को पटाया जाए क्योंकि तब या तो बछिया पैदा नही हुई थी या इतनी छोटी थी कि उसे कुछ याद नहीं होगा, और अगर बछिया पट गयी तो गाय को उसके पीछे आना ही होगा।

तरकीब काम कर गयी, उसने बछिया को भड़काया कि देखो तुम्हारी माँ का कान आज तक कटा है, किसी ने भी काटा हो लेकिन अब जब ग्वाला तुम्हारा मालिक है तो उसे सबसे पहले कान सही करवाना चाहिए था, फलाना करना चाहिए था ढिकाना करना चाहिए था।

कसाई एक तरफ बछिया को भड़काता तो दूसरी तरफ अपने हाथ में हरी हरी घास दिखा कर बछिया को ललचाता। एक हाथ में हरी घास और दूसरा हाथ पीठ के पीछे जिसमें चापड़ (चाकू) था। बछिया को कसाई बहुत पसंद आता था। उधर गाय बछिया को बार बार एक ही बात समझाये कि ये कसाई ठीक नहीं, एक दिन हम दोनों को काट कर हलाल कर देगा, पर बछिया को अनुभव कहाँ? वो तो रोज़ ग्वाले को छोड़ कसाई के साथ जाने की बात करे।

बछिया बहुत नाराज़ है, कहती है ग्वाला उसे घुमाने नहीं ले जाता, उसे हरी घास के साथ पौष्टिक आहार नहीं देता, उसे खुश रखने के लिए बांसुरी नहीं बजाता, इसलिए वो ग्वाले को छोड़ कर कसाई के पास जा रही है, कसाई ने उसे खुश रखने का वादा किया है।

कुछ ऐसा ही हाल आजकल देश और राष्ट्रवादियों का है। देश की हालत खस्ता थी तब 1998 BJP सरकार सत्ता में आई। ख़ज़ाने खाली थे उन्हें भरा, देश की रीढ़ अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया।

लेकिन 2003 में कसाई कांग्रेस ने गाय रूपी जनता को बरगला दिया कि कोई इंडिया शाइनिंग नहीं हो रहा, अटल सरकार के कामों को अपना बता दिया। गाय जैसी भोली भली जनता कसाई कांग्रेस की बातों में आ कर अपना वोट दे बैठी।

इसके बाद 10 साल तक सत्ता अपने हाथ में ले कर कांग्रेस ने सत्ता का जो दुरुपयोग किया उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। घोटालों पर घोटाले, देश के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन, देश की जनता पर महंगाई की मार (रु. 250/किलो दाल, 120/किलो टमाटर) दे कर पूरा खून चूस लिया गया।

देश का हाल हड्डियों के ढांचे रूपी गैय्या जैसा कर दिया गया। गाय रूपी जनता को हलाल करने का इरादा था, क्योकि सुपर PM इस देश की थी ही नहीं सो उन्हें इस देश से लगाव होने का सवाल ही पैदा नहीं होता, जबकि दूसरी ओर एक ऐसी पार्टी है जिसकी रगों में RSS का राष्ट्रवादी खून दौड़ रहा है।

जनता को जब समझ मे आ गया कि उसे हिन्दू आतंकवादी, भगवा गुंडे, और कम्युनल वॉइलैंस बिल रूपी हथियार से कसाई कांग्रेस हलाल करने वाली है तो एक बार फिर गैय्या रूपी जनता ने BJP और नरेंद्र मोदी में अपना विश्वास जताते हुए उन्हें PM चुना।

इसके बाद कसाई रूपी कांग्रेस ने रोना पीटना मचाया कि EVM हैक कर ली, कभी असहिष्णुता तो कभी दलित विरोधी बता कर मोदी-BJP को गली के गुंडे रूपी टुच्ची पार्टियों के नेताओं द्वारा खूब गालियां दी गयीं, लेकिन मोदी चुपचाप काम करते रहे।

देश मोदी के राज में फिर से ग्लोबल लीडर बन रहा है, खुद का GPS सिस्टम, अत्याधुनिक हथियारों का निर्माण, ढोला सादिया पुल हो या सैटेलाइट, सब कुछ ग्वाले मोदी ने किया लेकिन कसाई कांग्रेस अब एक बार फिर गाय रूपी जनता को बरगलाने का प्रयास कर रही है कि ये सब तो हमने किया था…

ग्वाले मोदी ने ये नहीं किया वो नहीं किया, आरक्षण और SC/ST Act लागू भले ही हमने किया मोदी ने अभी तक हटाया क्यो नहीं, राम मंदिर क्यो नहीं बनवाया? भले ही हमने रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं थी लेकिन मोदी को तो अभी तक मंदिर बनवा देना चाहिए थे, धारा 370 लगाई हमने थी लेकिन अभी तक तो मोदी को हटवा देनी थी।

ऐसे में पुराने चावल हो चुके राष्ट्रवादी तुरंत कसाई कांग्रेस की चाल भांप लेते हैं और पलट कर सवाल दाग देते हैं कि सब किया धरा तो आपका ही है।

कसाई कांग्रेस को समझ आ गया गाय नहीं पटेगी तो अब बछिया रूपी नए राष्ट्रवादियों पर डोरे डाले जा रहे हैं, 18 से 25 साल की उम्र के लड़कों को भड़काया जा रहा है, उनसे कहा जा रहा है चलो हमने सबकुछ किया पर मोदी को तो हटाना चाहिए था ना, कचरा हमने फैलाया पर अब तक तो मोदी को साफ कर देना चाहिए था ना!

अब ना तो नए राष्ट्रवादियों ने गाय वाली यातनाएँ सहीं, ना कभी कान कटवाया तो उन्हें क्या मालूम कि ये कसाई कितना बड़ा जल्लाद है। जिसने संसद के बाहर साधु संतों पर तो अयोध्या में पूजा करते रामभक्तों पर बिना बात गोलियां चलवाईं थीं, कोठारी बन्धुओं का दिन दहाड़े प्रशासन के द्वारा कत्ल करवाया था, कारसेवकों को मौत के घाट उतार कर यातनाएं दी थी, कान काटा था, क्योकि तब या तो वो पैदा नहीं हुए थे या उन्होंने होश नहीं संभाला था।

इसलिए हे बछड़े और बछियों, कृपया अपने गाय रूपी घर के बड़ों से इतिहास पूछिए, या सोशल मीडिया पर अपने से बड़ों का अनुसरण कीजिये, वर्ना ये कसाई कांग्रेस कम्युनिस्ट जो आपको भड़का कर और हरी घास दिखा कर ललचा रही है इसके दूसरे हाथ में चापड़ छुपा है जिस से आपको काट कर हलाल करने का प्रोग्राम है। समझने वाले समझ गए जो न समझे वो अनाड़ी हैं।

दुश्मन को अगर आप खत्म नहीं कर सकते तो पालतू बना लीजिये

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