शकुन शास्त्र : गिलहरी का आगमन

परसों मेरे कमरे में कहीं से एक गिलहरी आ गयी और जहाँ मेरे कपड़े टंगे थे उन्हीं के बीच दुबककर बैठ गई. मेरे कमरे में आज तक कभी कोई गिलहरी नहीं आयी. ये मेरे लिए बिलकुल नया अनुभव था.

मुझे बाहर जाना था तो मैं उससे पहले उसे कमरे से निकाल देना चाहता था. लेकिन वो मुझसे डरकर कपड़ों के पीछे छिपने लगी. मैंने उससे कहा कि डरो नहीं, ये किसी मलेच्छ का घर नहीं है बल्कि रामभक्त का घर है. यहाँ आकर तो निर्भिक हो जाओ, खिड़की खुला छोड़कर जा रहा हूँ, जब मन करे चले जाना. ये बोलकर मैं बाहर चला गया.

दिल्ली विश्वविद्यालय में वर्षों से शिक्षकों के परमानेंट वेकेंसी कोर्ट, सरकार इन्हीं की परिक्रमा करते हुए लटकी पड़ी है. हजारों गेस्ट शिक्षकों की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी रहती है. उन्हें बिना कोई कारण बताये कहीं से हटा दिया जाता है और उसके स्थान पर दूसरों से काम लिया जाता है. जिन अभागे शिक्षकों का स्वयं का भविष्य अनिश्चितता के अधर में झूल रहा है उनके कमजोर कंधों पर राष्ट्र निर्माण का दायित्व है. भाजपा की सरकार चार साल से यथास्थिति को बरकरार रखे हुए है.

इस बार बार अधिकांश शिक्षकों को निकाल कर उनके जगह नये शिक्षकों को नियुक्त कर दिया गया. राइट विंग के लोगों को टारगेट करके चुन-चुन कर निकाला गया. मैं तो घोषित दक्षिणपंथी हूँ, इसलिए मुझे भी निकाल दिया गया. परसों मैं इसी सिलसिले में ऑथोरिटी से बात करने जा रहा था कि मुझे किस आधार पर निकाला है, इसका जवाब दे.

बच्चे मेरे पढ़ाने के अंदाज को बहुत पसंद करते हैं. बोरिंग टॉपिक को भी रोचक बना देता हूँ, पढ़ाने लगता हूँ तो समा बंध जाता है. एकबार पहले भी सिस्टम ने साजिश के तहत मुझे निकाला था. कॉलेज के मेरे सारे स्टूडेंट्स ने लिखित में वाइस चांसलर से डिमांड की कि हमें राहुल सर से ही पढ़ना है. उस समय अचानक हड़कंप मच गया कि आखिर ये कैसा पढ़ाता है कि यूनिवर्सिटी की टॉपर लड़कियाँ अड़ गयी हैं कि हमें इसी सर से पढ़ना है.

बच्चों की ज़िद के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा, पर मेरे प्रति उन लोगों ने खुन्नस पाल ली. अभी सुअवसर देखकर अन्य शिक्षकों के साथ मुझे भी निकाल दिया. उस दिन जब मैं मिलने गया तो उन्हें जरा सा इशारा कर दिया कि बच्चों के जिस लेटर से बवाल मचा था, वो स्ट्रांग एविडेंस मैं आज भी संभाल कर रखा हूँ. वो थोड़ा झल्लाये, पर फिर से नया बवाल नहीं करना चाहते थे इसलिए मुझे फिर से रख लिया.

मैं जब देखता हूँ कि एक शिक्षक कितना निरीह होता है तो मुझे बहुत दुख होता है. बच्चों को पढ़ाना मेरा पसंदीदा काम है, पर शिक्षकों की ये दयनीय स्थिति देखकर इस प्रोफेशन पर एक गुस्सा है. हमेशा मुसीबत में मेरे भीतर के एडवोकेट ने ही मेरे सम्मान की रक्षा की है. यूरोप और अमेरिका में शिक्षकों का बहुत सम्मान है. मुझे बेल्जियम में हिन्दी पढ़ाने के लिए अवसर मिल रहा है, वो भी अपनी एम्बेसी के द्वारा, लेकिन दिल है कि जलील होता रहेगा पर अपनी मिट्टी छोड़कर कहीं जाना नहीं चाहता है.

शाम को पढ़ाने का अप्वॉइंटमेंट लेटर लेकर जब घर लौटा तो गिलहरी पर ध्यान गया, वो नहीं थी, वो खिड़की से चली गई थी. फिर मुझे याद आया कि ये सुबह-सुबह गिलहरी का कमरे में पहली बार आना एक शुभ शकुन था. भगवान श्री राम के सेतु निर्माण में गिलहरियों ने अपना श्रम-दान किया था. वे रेत में लोटती थीं और उस रेत को सेतु पर डाल देती थीं. उनके ऐसा करने से वानरों को बहुत परेशानी हो रही थी क्योंकि वे विशाल शिलाखण्डों को उठाकर ला रहे थे और गिलहरियों पर पाँव न पड़ जाये इस चक्कर में कई बार संतुलन खो दे रहे थे.

इसी कारण एक वानर ने गुस्से में एक गिलहरी को उठाकर फेंक दिया, जो भगवान श्री राम के प्रताप से उनके हाथों में जाकर गिरा. भगवान ने वानरों को समझाया कि आपलोगों के विशाल पत्थरों के बीच जो खाली स्थान रह जा रहा है वो इन गिलहरियों के रेत से भर रहा है, जिस कारण सेतु स्थाई और मजबूत बनेगा. ये कहते हुए भगवान ने गिलहरी के ऊपर स्नेह से अपनी ऊँगलियों को फेरा, जिससे गिलहरी के पीठ पर प्रभु श्री राम के तीन ऊँगलियों के निशान पड़ गये.

निस्संदेह ये सब बातें विज्ञान की नजर में सारहीन हैं, पर मेरे घर में पहली बार गिलहरी का उसी दिन आना जिस दिन मैं विवाद करने जा रहा हूँ और उस समर में सफल होना जहाँ मुझे छोड़कर मेरे दक्षिणपंथी खेमे के लगभग सभी लोग परास्त हो गए हों, को हम प्रभु के आशीर्वाद का शकुन नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे?

ज्योतिष एवं वास्तु सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण और अद्भुत जानकारियाँ

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY