आंसू छलका रही होगी भारत माता

बचपन से ही मैंने सैकड़ों बार मनुस्मृति जलाई जाती देखी, सुनी, पढ़ी है। जिस देश में बही/ पुस्तक को अनजाने में भी पैर लगने पर उससे माफी मांगने वाले ढंग से प्रणाम किया जाता है, उसमें प्रथमतः मुझे वह कृत्य बर्बर और हेतुतः आघात पहुंचाने वाला लगा। लेकिन बाद में जब मेरी सोच कुछ बढ़ी, … Continue reading आंसू छलका रही होगी भारत माता