ऑनलाइन परीक्षाएं! कोई है जो इन बेरोज़गारों के बारे में सोचे?

रोहित, जो आज़मगढ़ का रहने वाला है, का रेलवे टेक्नीशियन पद हेतु ऑनलाइन परीक्षा केंद्र नोयडा क्यों पड़ता है?

कल अर्थात 9 अगस्त को परीक्षा थी… आठ की सुबह आज़मगढ़ से किसी स्पेशल ट्रेन से नोयडा के लिए प्रस्थान करता है।

ट्रेन 12 घंटे लेट हो जाती है… दिल्ली से सीधी टैक्सी करता है, नोयडा सेक्टर 62 स्थित परीक्षा केंद्र डिजिटल ज़ोन पहुचने के लिए।

रास्ते मे ट्रैफिक जाम मिलता है… परीक्षा केंद्र गेट पर सिर्फ 2 मिनट लेट पहुंचता है… लाख सिर पटकने के बाद भी परीक्षा हेतु प्रवेश नहीं मिलता।

रोहित को परीक्षा केंद्र पर फफक-फफक कर रोते कल रात लाखों ने टीवी स्क्रीन पर देखा होगा।

पिछले दिनों आईएएस प्री ऑनलाइन परीक्षा में एक अभ्यर्थी सिर्फ एक मिनट लेट पहुचा… प्रवेश नहीं मिला, अभ्यर्थी ने मुखर्जी नगर जाकर मित्र के PG में जाकर आत्महत्या कर ली।

IITPM ग्रेटर नोएडा में स्टेट बैंक PO प्री परीक्षा में हज़ारों बाहरी अभ्यर्थी आये हुए थे। सबके पास एक बैग और मोबाइल तो ज़रूरी है ही… सेंटर पर इन्हें रखने या अंदर ले जाने की कोई अनुमति नहीं थी।

एक वालंटियर प्रकट हुए… उन्होंने सिर्फ 20 रूपए के मामूली चार्ज पर बैग मय मोबाइल रखने की सुविधा उपलब्ध करवाई।

पचासों अभ्यर्थियों के सामने मोबाइल और बैग रखने के लिए रिस्क के बावजूद अन्य कोई विकल्प नहीं था…

परीक्षार्थी जब परीक्षा देकर बैग, मोबाइल लेने वापस लौटे तो वालंटियर साहेब दर्जनों मोबाइल और बैग लेकर उड़नछू हो चुके थे।

अभ्यर्थियों की स्थिति आप समझ सकते हैं… अनेक के मोबाइल, कपड़ों के अलावा लौटने का टिकट और ids भी बैगों में थे।

कोई मुझे यह बताये कि आज़मगढ़ के अभ्यर्थी की परीक्षा नोयडा… और दरभंगा के अमित की परीक्षा दादर मुम्बई में रखने की ज़रूरत क्या है, जब आज़मगढ़ और दरभंगा में पचासों कॉलेज जहां कम्प्यूटर लैब्स और सैकड़ों क्लास रूम ऑलरेडी उपलब्ध हैं?

अभ्यर्थियों के स्विच-आफ मोबाइल और छोटे बैग उसी कक्षा में क्यों नहीं रखे जा सकते जहां अभ्यर्थी परीक्षा देते हैं?

बस… रखने का स्थान थोड़ी दूर हो… कक्ष नियंत्रकों की इतनी व्यवस्था तो होती ही है कि कोई मोबाइल निकाल कर ‘नकल’ नहीं करने लगेगा।

ईश्वर मुँह से बुरा न निकलवाये… इन हालात में कितने अभ्यर्थी हज़ारों किलोमीटर की यात्रा करते समय अनहोनियों के शिकार होते होंगे? कोई है… जो इन बेरोज़गारों के लिए सोचने का वक्त निकाल सके…???

समस्याओं पर बात करिए, मगर देश को नीचा दिखाकर नहीं

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