आज अनुपयोगी हो गयी है शालीनता

कबाब पराँठा, बिरयानी, रोग़न जोश संभवतः बहुत स्वादिष्ट होते हैं। मैं इसका अधिकारी पारखी नहीं हूँ मगर इस निष्कर्ष पर पहुँचने का कारण यह है कि आज के दैनिक जागरण में कुलदीप नैयर का लेख ‘हद पार करती भीड़ की हिंसा’ छपा है।

इस लेख में नैयर ने अलवर के गौतस्कर अकबर के वध के कारणों की मनमानी व्याख्या, भारत में 17 करोड़ मुसलमानों की देश के प्रशासनिक मामलों में महत्वहीनता, मुसलमानों में विश्वास पैदा करने में हिन्दुओं की नाकामी, अटलबिहारी वाजपेयी की लाहौर यात्रा जैसी बातें उठायी हैं।

बरसों से मेरे मन में प्रश्न था कि कुलदीप नैयर बेतुकी, वाहियात, बेहूदा बातें क्यों लिखता है?

आज उत्तर हाथ आया कि पाकिस्तान दूतावास का कबाब पराँठा, बिरयानी, रोग़न जोश संभवतः बहुत स्वादिष्ट होता है वरना कोई कारण नहीं है कि 14 सितंबर 1923 को पैदा हुआ, ‘हद पार करती भीड़ की हिंसा’ के कारण, पाकिस्तान से हर प्रकार से कष्ट पा कर, सम्पत्ति लुटा कर, माँ-बहनों की इज़्ज़त लुटती देख कर, किसी तरह जान बचा कर पाकिस्तान से भारत आये धर्मबंधुओं के साथ सियालकोट में पैदा हुआ, 1947 को 24 वर्ष का भारत आने वाला व्यक्ति आज भी भारत के विरोध में ज़हर उगले और पाकिस्तान के गुण गाये।

कबाब पराँठा, बिरयानी, रोग़न जोश तो पाकिस्तान में उपलब्ध था। कभी इस ने ख़ुद से यह सवाल क्यों नहीं पूछा कि ये क्यों तकलीफ़ें झेलता हुआ विभाजन रेखा पार कर भारत क्यों आया? ये सियालकोट में ही क्यों नहीं रहा?

इसने पाकिस्तान में रह कर सैक्युलर सोच का झंडा बुलंद क्यों नहीं किया? 24 बरस की उम्र ख़ासी मैच्योर होती है। इसे पाकिस्तान में रह कर ही गाँधीवाद, सामाजिक एकता, सैक्युलरिज़्म की डुगडुगी पर मर्कट नृत्य करने से कौन रोक रहा था?

ये कह रहा है कि मुसलमानों के मन में विश्वास पैदा करने में हिंदू नाकाम रहे?

टुकड़ख़ोर तू ये बता कि यह काम हिन्दुओं का कैसे हो गया? पूज्य मातृभूमि का विभाजन करने वाले मुसलमान हिन्दुओं में अपना विश्वास बैठाएंगे या हिंदू मुसलमानों में? इसे भारत में 17 करोड़ मुसलमानों की देश के प्रशासनिक मामलों में महत्वहीनता चुभ रही है? अबे… प्रशासन में चयन क्या पजामा उतरवा कर किया जाना चाहिए?

इस गंदे विचारों से भरे ख़बीस के हिसाब से देश का मूड आरएसएस के इरादों से मेल नहीं खाता।

ये भाजपा को हिन्दुराष्ट्रवादी मानता है। पक्का है कि इसकी याददाश्त चली गयी है वरना इसे ध्यान आता कि देश के बहुसंख्यक प्रांतों में इसके हिसाब से हिन्दुराष्ट्रवादी भाजपा का शासन है।

इस्लामी टोपी पहनने से मना कर देने वाला प्रधानमंत्री है और 24 कैरट का खरा हिन्दू सबसे अधिक जनसंख्या वाले प्रदेश का मुख्यमंत्री है।

तेरी अपनी विषैली खोपड़ी के हिसाब से भी देश विविधतावादी नहीं रहना चाहता तो यह असंभव कैसे चल रहा है?

मैं स्वभाव से ही अशिष्ट भाषा, गालियाँ पसंद नहीं करता मगर हर बात की हद होती है अतः यह विषवमन के लिये बाध्य हूँ। लानती, अपना बवासीरग्रस्त मुँह बंद रख और करूणानिधि का साथ निभा।

वरिष्ठ पत्रकार श्री मनमोहन शर्मा बताते हैं कि, “कुलदीप नैय्यर के ससुर भीम सेन सच्चर पाकिस्तान मे मेरे पडोसी थे। वह कांग्रेसी थे मगर पाकिस्तान की घोषणा होते ही उन्होंने घर पर लीग का झंडा लगा दिया था।

इसके बाद उन्होंने अपने मित्र अवतार नारायण गुजराल के साथ कराची जा कर पाकिस्तान संविधान सभा के सदस्य के रूप मे शपथ ले ली। अवतार नारायण पूर्व प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल के पिता थे।

इस पर भी मुस्लिम लीगियों ने उन्हे नहीं बख्शा। इन दोनों के घरों पर हमला हुआ। उन्हे लूटने के बाद जला दिया गया। तब इन्हे सपरिवार भारत आना पड़ा। यही सियाल कोट मे कुलदीप के परिवार के साथ भी हुआ।”

हिंसक भीड़ से हारता क़ानून, या समाज को हिंसक बनाती विधायिका, कार्य पालिका और न्याय पालिका

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