लगभग सारी बीमारियाँ खाने के तुरंत बाद पानी पीने से होती है शुरू!

सबसे पहले आप हमेशा ये बात याद रखें कि शरीर मे सारी बीमारियाँ वात-पित्त और कफ के बिगड़ने से ही होती हैं।

अब आप पूछेंगे ये वात-पित्त और कफ क्या होता है?

बहुत ज़्यादा गहराई में जाने की ज़रूरत नहीं, आप ऐसे समझे की सिर से लेकर छाती के बीच तक जितने रोग होते हैं वो सब कफ बिगड़ने के कारण होते हैं। छाती के बीच से लेकर पेट और कमर के अंत तक जितने रोग होते हैं वो पित्त बिगड़ने के कारण होते हैं। और कमर से लेकर घुटने और पैरों के अंत तक जितने रोग होते हैं वो सब वात बिगड़ने के कारण होते हैं।

हमारे हाथ की कलाई में ये वात-पित्त और कफ की तीन नाड़ियाँ होती हैं। भारत में ऐसे ऐसे नाड़ी विशेषज्ञ रहे हैं जो आपकी नाड़ी पकड़ कर ये बता दिया करते थे कि आपने एक सप्ताह पहले क्या खाया एक दिन पहले क्या खाया! और नाड़ी पकड़ कर ही बता देते थे कि आपको क्या रोग है। आजकल ऐसी बहुत ही कम मिलते हैं।

भारत मे 3 हजार साल पहले एक ऋषि हुए है उनका नाम था वाग्बट्ट। उन्होंने एक किताब लिखी जिसका नाम था अष्टांग हृदयं।! वो ऋषि 135 साल तक की आयु तक जीवित रहे थे। अष्टांग हृदयं मे वाग्बट्टजी कहते हैं कि जिंदगी मे वात्त, पित्त और कफ संतुलित रखना ही सबसे अच्छी कला है और कौशल्य है सारी जिंदगी प्रयास पूर्वक आपको एक ही काम करना है कि हमारा वात्त, पित्त और कफ नियमित रहे, संतुलित रहे और सुरक्षित रहे। जितना चाहिए उतना वात्त रहे, जितना चाहिए उतना पित्त रहे और जितना चाहिए उतना कफ रहे।

तो जितना चाहिए उतना वात्त,पित्त और कफ रहे उसके लिए क्या करना है
उसके लिए उन्होने 7000 सूत्र लिखे हैं उस किताब में।
उसमें सबसे महत्व पूर्ण और पहला सूत्र है :

भोजनान्ते विषं वारी (मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है। )
अब समझते हैं क्या कहा वाग्बट्टजी ने।!

कभी भी खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना।! अब आप कहेंगे हम तो हमेशा यही करते हैं। 99% लोग ऐसे होते है जो पानी लिए बिना खाना नहीं खाते। पानी पहले होता है खाना बाद में होता है।

बहुत सारे लोग तो खाना खाने से ज्यादा पानी पीते है दो-चार रोटी के टुकडो को खाया फिर पानी पिया, फिर खाया-फिर पानी पिया। ऐसी अवस्था मे वाग्बट्टजी बिलकुल ऐसी बात करते हैं कि पानी ही नहीं पीना खाना खाने के बाद। कारण क्या? क्यों नहीं पीना है??

हमारा जो शरीर है शरीर का पूरा केंद्र है हमारा पेट। ये पूरा शरीर चलता है पेट की ताकत से और पेट चलता है भोजन की ताकत से। जो कुछ भी हम खाते हैं वही हमारे पेट की ताकत है। हमने दाल खाई, हमने सब्जी खाई, हमने रोटी खाई, हमने दही खाया लस्सी पी कुछ भी दूध, दही छाछ लस्सी फल आदि।

ये सब कुछ भोजन के रूप में हमने ग्रहण किया ये सब कुछ हमको ऊर्जा देता है और पेट उस ऊर्जा को आगे ट्रांसफर करता है। आप कुछ भी खाते हैं पेट उसके लिए ऊर्जा का आधार बनता है।

अब हम खाते हैं तो पेट में सब कुछ जाता है। पेट में एक छोटा सा स्थान होता है जिसको हम हिंदी मे कहते है अमाशय। उसी स्थान का संस्कृत नाम है जठर। उसी स्थान को अंग्रेजी मे कहते है epigastrium।

ये एक थैली की तरह होता है और यह जठर हमारे शरीर में सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी में आता है ये। बहुत छोटा सा स्थान है इसमें अधिक से अधिक 350 GMS खाना आ सकता है। हम कुछ भी खाते सब ये अमाशय में आ जाता है।

अब अमाशय में खाना जैसे ही पहुँचता है तो यह व्यवस्था है कि तुरंत इसमें आग(अग्नि) जल जाती है। आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है उसी को कहते हे जठराग्नि। ये जठराग्नि है वो अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है। जैसे ही आपने खाना खाया कि जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी।

ये अग्नि तब तक जलती है जब तक खाना पचता है। आपने खाना खाया और अग्नि जल गयी अब अग्नि खाने को पचाती है। अब आपने खाते ही गटागट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया। और कई लोग तो बोतल पे बोतल पी जाते हैं। अब होने वाला एक ही काम है जो आग(जठराग्नि) जल रही थी वो बुझ गयी। आग अगर बुझ गयी तो खाने की पचने की जो क्रिया है वो रुक गयी। अब हमेशा याद रखें खाना पचने पर हमारे पेट मे दो ही क्रिया होती है। एक क्रिया है जिसको हम कहते हैं Digestion और दूसरी है fermentation। फर्मेंटेशन का मतलब है सड़ना और डायजेशन का मतलब है पचना।

आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी तो खाना पचेगा, खाना पचेगा तो उसका रस बनेगा। जो रस बनेगा तो उसी रस से मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डियां मल, मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत मे मेद बनेगा। ये तभी होगा जब खाना पचेगा।

अगर आपने खाना खाने के तुरंत बाद पानी पी लिया तो जठराग्नि नहीं जलेगी,खाना नहीं पचेगा और वही खाना फिर सड़ेगा। और सड़ने के बाद उसमें जहर बनेंगे।

खाने के सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वो हे यूरिक एसिड(uric acid )। कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते है कि मुझे घुटने में दर्द हो रहा है, मुझे कंधे-कमर मे दर्द हो रहा है तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है आप ये दवा खाओ, वो दवा खाओ यूरिक एसिड कम करो।

यह यूरिक एसिड विष (जहर ) है और यह इतना खतरनाक विष है कि अगर अपने इसको कन्ट्रोल नहीं किया तो ये आपके शरीर को उस स्थिति में ले जा सकता है कि आप एक कदम भी चल ना सके। आपको बिस्तर मे ही पड़े रहना पड़े पेशाब भी बिस्तर मे करनी पड़े और संडास भी बिस्तर मे ही करनी पड़े यूरिक एसिड इतना खतरनाक है।

और एक दूसरा उदाहरण खाना जब सड़ता है तो यूरिक एसिड जैसा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते हे LDL (Low Density lippo protein) माने खराब कोलेस्ट्रोल(cholesterol )।

जब आप ब्लड प्रेशर(BP) चेक कराने डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहता है (HIGH BP ) हाय बीपी है आप पूछोगे कारण बताओ? तो वो कहेगा कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है। आप ज्यादा पूछोगे की कोलेस्ट्रोल कौनसा बहुत है? तो वो आपको कहेगा LDL बहुत है।

इससे भी ज्यादा खतरनाक विष हे वो है VLDL(Very Low Density lipoprotein)। ये भी कोलेस्ट्रॉल जेसा ही विष है। अगर VLDL बहुत बढ़ गया तो आपको भगवान भी नहीं बचा सकता।

खाना सड़ने पर और जो जहर बनते है उसमें एक और विष है जिसको अंग्रेजी मे हम कहते है triglycerides। जब भी डॉक्टर आपको कहे कि आपका triglycerides बढ़ा हुआ है तो समझ लीजिए कि आपके शरीर में विष निर्माण हो रहा है।

तो कोई यूरिक एसिड के नाम से कहे, कोई कोलेस्ट्रोल के नाम से कहे, कोई LDL – VLDL के नाम से कहे समज लीजिए की ये विष हैं और ऐसे विष 103 है। ये सभी विष तब बनते है जब खाना सड़ता है।

मतलब समझ लीजिए किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए की खाना पच नहीं रहा है, कोई कहता है मेरा triglycerides बहुत बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट में डायग्नोसिस कर लीजिए आप कि आपका खाना पच नहीं रहा है। कोई कहता है मेरा यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट लगना चाहिए समझने मे कि खाना पच नहीं रहा है।

खाना पच नहीं रहा तो समझ लीजिये विष निर्माण हो रहा है शरीर में। और यही सारी बीमारियों का कारण है। तो खाना अच्छे से पचे इसके लिए वाग्भट्ट जी ने सूत्र दिया।!

भोजनान्ते विषं वारी (मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है )

इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी कभी मत पिये।

खाना खाने के बाद अगर कुछ पी सकते हैं उसमे तीन चीजे आती हैं।!

1) ज्यूस
2) छाछ

– साभार स्वर्गीय राजीव दीक्षित

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