योगी से सीख लें नितीश

मुज़फ़्फ़रपुर की घटना को लेकर बिहार सरकार की समाज कल्याण मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा है।

उसके पति की मुख्य अपराधी के साथ सांठगांठ के साक्ष्य सामने आने के बाद नितीश कुमार को यह कार्रवाई करनी पड़ी है।

मीडिया और राजनीतिक मंच पर भारी लानत मलानत के बाद नितीश कुमार की इस कार्रवाई ने नितीश कुमार की प्रशासनिक क्षमता को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है।

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जितनी उम्र है सम्भवतः उतना लम्बा नितीश कुमार का राजनीतिक जीवन है। लेकिन उत्तरप्रदेश के देवरिया जनपद में घटी मुज़फ़्फ़रपुर सरीखी ही घटना पर योगी आदित्यनाथ ने जिसप्रकार त्वरित तत्काल कार्रवाई का उदाहरण प्रस्तुत किया उससे नितीश कुमार को सीख लेनी चाहिए।

ध्यान रहे कि रविवार की रात देवरिया की घटना उजागर होते ही मुख्यमंत्री योगी ने सरकार में सम्बन्धित विभाग की मंत्री समेत उच्च पदस्थ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को अपने निवास पर बुलाकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे और सोमवार को विशेष विमान से अपर मुख्य सचिव तथा एडीजी महिला हेल्प लाइन को देवरिया भेजकर 24 घण्टे में पूरे मामले की रिपोर्ट मंगवा ली थी।

दोनों उच्चाधिकारियों ने पीड़ित बालिकाओं से स्वयं बात कर उनके बयान दर्ज किए थे। इतनी जल्दी इतने उच्चाधिकारियों के देवरिया पहुंच कर जांच सम्भाल लेने से अपराधियों को सम्भलने का मौका ही नहीं मिला था तथा स्थानीय स्तर पर निचले पुलिस और प्रशासनिक तंत्र में उनकी सेटिंग के सारे समीकरणों की धज्जियां उड़ गयी थीं।

परिणामस्वरूप मुख्य अपराधियों समेत उनके सहयोगी आधा दर्जन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

जिलाधिकारी महोदय को लापरवाही बरतने के आरोप में पद से हटाकर चार्जशीट सौंप दी गयी है तथा जिला प्रोबेशन अधिकारी एवं प्रभारी जिला प्रोबेशन अधिकारी को निलंबित कर उनके खिलाफ भी जांच शुरू हो गयी है।

इस पूरी घटना की जांच के लिए एडीजी क्राइम के नेतृत्व में एसपी स्तर के दो अधिकारियों वाली SIT गठित कर STF को इस टीम की सहायता करने का निर्देश दिया गया है, साथ ही साथ मुख्यमंत्री ने इस पूरे काण्ड की जांच CBI को भी सौंप दी है।

खास बात यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह सारी कार्रवाई मात्र 48 घण्टे के भीतर कर डाली है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस अफलातूनी कार्रवाई का एक अन्य सुखद परिणाम यह हुआ है कि राजधानी लखनऊ समेत लगभग 2 दर्जन अन्य जनपदों में चल रहे ऐसे सभी बालिकागृहों में सरकारी अमला निरीक्षण करने जा पहुंचा। अन्य जनपदों में इस कार्रवाई से हड़कम्प मच गया है।

इसका तात्कालिक सुखद परिणाम यह हुआ है कि गिरोहबाज NGO’s के भरोसे चल रहे ऐसे बालिकागृहों में नारकीय परिस्थितियों में रह रही बालिकाओं को उन परिस्थितियों से मुक्ति मिली है।

क्योंकि विपक्ष हल्ला मचा रहा था, दबाव बना रहा था इसलिए लगभग 3 महीने तक मुज़फ़्फ़रपुर की घटना को अनसुना अनदेखा करते रहे नितीशकुमार को उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीख लेनी चाहिए।

क्या होती है किसी सरकार के काम की कसौटी?

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