रफ़ाल से आगे भारतीय डिफेन्स

Make In India की सफलता की शानदार उपलब्धि… L&T ने भारत में बना पहला K9 Vajra-T, the 155mm/ 52 calibre self-propelled gun को अपने गोदाम से निकाला और दिखाया।

ये भारत की सेना को मिलेगा और वो इसको रण, कच्छ और पहाड़ी क्षेत्र में ले जाकर इसका परीक्षण करेगी।

वायु सेना के लिए रफाल हवाई जहाज़ के बाद भारत की थल सेना को तोपों की ज़रूरत थी। नई तोपें जल्द से जल्द चाहिए थीं।

भारत की मोदी सरकार ने इस पर कदम बढ़ाया… भारत में डिफेन्स में FDI के साथ कुछ नए का ऑर्डर भी देना था।

काफी काम करने के बाद ये तय हुआ कि नई तोपें इधर ही बनाई जाएं। इसके लिए कई देशों की कंपनियों ने अपनी इच्छा ज़ाहिर की।

आखिर में कोरिया की कंपनी Hanwha Techwin को FDI की अनुमति मिली। लेकिन भारत में उसको इसके लिए एक पार्टनर चाहिए था और उसने भारत के L&T के साथ JV (संयुक्त उपक्रम) करना तय किया।

भारत की कंपनी L&T Heavy Engineering का इसमें कोई पुराना अनुभव नहीं था। टेंडर में फिर भी L&T Heavy Engineering को 4500 करोड़ का ऑर्डर हुआ है।

अगले 42 महीनों में L&T कुल 100 155mm/52 calibre Tracked Self-Propelled Gun सप्लाई करेगा।

हालाँकि L&T Heavy Engineering ने पहले कभी इस तरह के काम को नहीं किया था, फिर भी 2011 में निकले Global Tender में उसने बिड किया।

न जाने क्या कारण था कि 2014 तक टेंडर प्रक्रिया ही आगे नहीं बढ़ी! फिर अब मोदी सरकार ने ढाई साल लगकर टेण्डर को फाइनल किया।

आसान है अम्बानी का नाम पकड़ा देना और पब्लिक भी फटाक से कूद पड़ती है। आज लोग TATA और बिड़ला को देशभक्त उद्योगपति बोलते हैं…

लेकिन कम्युनिस्टों की बौद्धिक चटाई पर चलने वाले काँग्रेसियों ने इनके साथ मिलकर हर समय किसी न किसी औद्योगिक समूह को भारत में खलनायक के रूप में प्रस्तुत किया है… जबकि चन्दा और उगाही भी इनसे लेते रहे।

जो 1970 के पहले के हैं वो जानते होंगे कि उस जमाने में TATA और बिड़ला को खून पीने वाला खलनायक घोषित हुआ था।

समय बदला तो 70 से 90 तक सिंघानिया तथा डालमिया वो खून पीने वाले खलनायक घोषित किए गए।

कम्युनिस्ट और कांग्रेस ने सिंघानिया तथा डालमिया से उगाही का धन खाने के लड़ाई में पूरे कानपुर शहर के साथ 10 लाख मजदूरों कामगारों को बर्बाद कर दिया था। (कैसे किया इसको आप मेरे लेख ‘हत्या एक खूबसूरत शहर की : वामपंथी कारगुजारी और कांग्रेस की राजनीति‘ में पढ़ सकते हैं)।

इसके बाद इनके निशाने पर अम्बानी – अडानी आ गए हैं और अब एस्सेल समूह भी आने लगा हैं।

कम्युनिस्ट और कांग्रेस हर संभव उस का विरोध करेंगे जो देश की जनता को समझदार, सशक्त और कामगार बना देगी… क्योंकि अनपढ़, अबूझ और कमज़ोर समाज ही इनके उर्वर खाद है।

देश तथा समाज हित में कांग्रेस और कम्युनिष्ट का बर्बाद हो जाना अच्छा है।

हत्या एक खूबसूरत शहर की : वामपंथी कारगुजारी और कांग्रेस की राजनीति

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