भले कुछ नीतियों से क्षुब्ध हों, व्यक्तिगत हितों को चोट पहुंची हो, पर अस्तित्व से बढ़कर कुछ नहीं

हिंदुत्ववादी सवर्णों को गुस्सा बहुत आता है लेकिन अक्सर यह गुस्सा समाजिक प्राथमिकताओं के बजाय मामूली व्यक्तिगत हितों पर केंद्रित रहता है।

गुस्सा सेहत के लिये हानिकारक है। देश की सेहत के लिये, धर्म की सेहत के लिये, खुद की सेहत के लिये।

समाधान हमेशा शांत दिमाग के गहरे चिंतन से निकलता है, भकभकाने से नुकसान होता है।

जो खुद को राष्ट्रवादी और धर्म का रक्षक कहते हैं, उनका पहला मकसद क्या होना चाहिये?

2019 में पूर्ण बहुमत से भाजपा की सरकार बनना… अगर यहाँ चूक हुई तो देश का इस्लामीकरण निश्चित है…

भले कोई सरकार की कुछ नीतियों से क्षुब्ध हो, भले किसी के व्यक्तिगत हितों को चोट पहुंची हो… लेकिन अस्तित्व से बढ़कर कुछ नहीं, वर्तमान में भाजपा का कोई विकल्प नहीं।

कुछ लोग 2019 के लिये नोटा (NOTA) अभियान चला रहे हैं। ये नोटा आपकी गर्दन पर चलने वाली तलवार है बंधु।

काँग्रेस या महागठबंधन की सरकार बनी, इस्लामिक तुष्टिकरण का दौर वापस आया तो देश का हिन्दू, इस्लामिक असहिष्णुता का वो दौर देखेगा जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की है।

मोदी सरकार के शासन में जिस वहशी सांड को नाथकर खूंटे से बांध दिया गया है वो छूटते ही जो तबाही मचायेगा, वो कल्पना रोमांचक है।

भाजपा सरकार पर नथुने फड़फड़ाने से पहले सोचिये, sc st act भाजपा नहीं लायी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटने के लिये, इसे पहले की तरह जैसा का तैसा करने के लिये पुनर्विचार याचिका दायर की है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले, भाजपा के पुनर्विचार याचिका दायर करने से पहले… इस्लामिक आतंकवाद देश के हिंदुओं की सबसे बड़ी समस्या थी और इसके बाद अचानक से sc st act सबसे बड़ी समस्या बन गयी।

इस एक्ट से पीड़ित लोग कुकुरमुत्ते की तरह उगने लगे जबकि कुछ दिन पहले तक कहीं कोई हवा नही थी… तब इस्लामिक आतंकवाद प्राइमरी और आरक्षण सेकेंडरी समस्या थी।

अचानक मानों जादू हुआ और sc st act से देश मे हाहाकार मच गया… इससे पीड़ित अनगिनत मासूम सवर्ण जेलों में ठूंसे जाने लगे।

सवर्णों को गुस्सा बहुत आता है… दलितों द्वारा सवर्णों पर हो रहे अत्याचारों पर बहुत गुस्सा आता है… पर मुझे गुस्सा नहीं आया था… क्योंकि तब मैं बहुत छोटा था और “हरे धोबिया” का मतलब क्या है, ये अपमानजनक है… बहुत बाद में समझा।

अनुसूचित जातियों, जनजातियों को अगर आपके दसवें हिस्से का भी गुस्सा आता तो आप खून के आंसू रो रहे होते… आपका जीना मुहाल हो जाता… बहुत आसान है आपको जेल भिजवाना… अग्रिम जमानत भी नही मिलेगी…

पर कुछ दिनों पहले आप खून के आंसू नहीं रो रहे थे… ये अभी दो चार दिनों से टपक रहे हैं… उससे पहले आप इस्लामिक आतंकवाद, लव जिहाद से जूझ रहे थे… तीन चार दिनों में जादू हो गया।

शुक्र मनाइये कि आरक्षण बना रहे, sc st act बना रहे… दलित सिर्फ इसकी लड़ाई लड़ रहे हैं… बदले की भावना में धधकते आपका उत्पीड़न नही कर रहे… चाहते तो कर सकते थे… हिन्दू संस्कार उन्हें ऐसा करने से रोकता है… वो 80% होकर भी 20% वालों की तरह खूनखराबा, कत्लेआम नहीं चाहते।

भाजपा 15% के भरोसे चुनाव नहीं लड़ सकती… वो भी तब जब 5% वोट भी पक्के नहीं…

जीतने के लिये obc, sc, st वोट साधना एकमात्र विकल्प है। शांतिप्रिय वोट तो मिलने से रहे। आगामी चुनावों के लिये ऐसा करना भाजपा की मजबूरी है, वो भी कुछ नया नहीं किया। जिस चीज से अब तक समस्या नहीं थी उसे वापस लागू करवा रही है।

सवर्ण अपने गुस्से को सही दिशा दें… गलत दिशा में केंद्रित हो रहा ये गुस्सा आपका अस्तित्व लील लेगा।

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