व्यंग्य : गिर गया SC/ST संशोधन विधेयक

कल संसद में SC/ST संशोधन विधेयक (amendment bill) पास नहीं हो पाया। सदन में भारी हंगामा हुआ, तोड़फोड़, आगजनी और गोलियां चलीं, मोदी सदन से भागे।

जैसे ही बिल टेबल हुआ ज़बरदस्त हंगामा हुआ। देश के एकमात्र असली ब्राह्मण (जनेऊ धारी ब्राह्मण पढ़ा जाए) उचक कर सदन के well (कुआं नही, उसे वेल ही कहते हैं) में कूद पड़े।

वे अपना जनेऊ निकाल कर बोले, “देखो मेरी जनेऊ मैं ही असली ब्राह्मण हूँ, मैं ब्राह्मणों के हित की रक्षा करूँगा, कांग्रेस ने हमेशा ब्राह्मणों और सवर्णों की बात की है।”

“मेरे पापा भी ब्राह्मण थे और इस से पहले 11 सितंबर 1989 को भी हमनें ब्राह्मणों और सवर्णों के हितों के लिए कानून बनाया था SC/ST Atrocities Act, जिसमें बिना कोई तहकीकात के ब्राह्मणों और सवर्णों को जेल में डालने का कानून बनाया था।”

“बतौर असली जनेऊधारी ब्राह्मण मेरे पापा को पता था ब्राह्मण गरीब होता है उसके पास खाने के लिए रोटी नही होती, इसलिए मेरे पापा ने सभी ब्राह्मणों के भोजन की व्यवस्था जेल में की थी, ताकि सभी को भर पेट भोजन मिल सके।”

“हम ब्राह्मणों और सवर्णों के हितों का खयाल रखनी वाली एकमात्र पार्टी हैं, लेकिन आप सबने उसे गलत समझ लिया और अपने विरोध में समझ लिया। मेरे पापा तो आपकी दो जून की रोटी का इंतज़ाम कर रहे थे, जो गलती मेरे पापा ने की थी मैं उस कलंक को मिटाने आया हूँ मैं किसी भी हालत में इस बिल को पास नही होने दूंगा।”

(अगर आपको लगता है कि एक ही लाइन में कहानी पूरी तरह से पलट गई है तो @#$ का एक डोज़ लें… किरपा आनी शुरू हो जाएगी फिर सब सही लगेगा)

“ये बिल अगर पास होगा तो मेरी लाश पर पास होगा जैसे देश के तीन टुकड़े चतुर बनिये की लाश पर हुए थे। सरनेम एक ही है तो लक्षण भी एक ही होंगे।”

ऐसा कह कर वापस अपनी सीट पर जा बैठे और और विरोध करते हुए बिल पास करने वाला बटन दबा दिया जैसा कि धोखा दे कर देश को तोड़ने वाला बटन 1947 में दबाया गया था।

दूसरी तरफ टोंटी चोर के पिताजी कूद पड़े और बोले, “ये बिल जान-बूझ कर हमाई जाति के विरोध में लाया जा रहा है। सबसे ज़्यादा इसका दुरुपयोग हमाये जाधव बंधुओं के खिलाफ ही होता है। चुनाव जीतने के बाद जब हमाये लड़कों के पास आतिशबाज़ी कम पड़ जाती है तो वे घरों में आग लगा कर उस कसर को पूरा करते हैं।

“मुम्बई से बार गर्ल आने में समय लगेगा सोच कर जो लड़की मिलती है उसके कपड़े फाड़ कर नचवा लेते हैं और जश्न पूरा कर लेते हैं। लड़के हैं, लड़कों से गलतियां हो जाती हैं। मोदी जी हमाये लोगों को जेल में डलवाना चाहते हैं ताकि वे चुनाव में बूथ कैप्चरिंग ना कर पाएं।”

ऐसा कह कर उन्होंने भी बिल का जबरदस्त विरोध करते हुए बिल के विरोध में MY वाला बटन दबा कर वोट दे दिया। अरे समझा कीजिये MY मने Muslim Yadav वाला हरा बटन, लेकिन मोदी ने चालाकी से हरे बटन का मतलब बिल पास करने वाला बटन रखा था, इसलिए गलती से पास हो गया।

भैंण जी ने कहा, “हमारी पार्टी ब्राह्मणों और सवर्णों की पार्टी है। हमारा नारा ही देख लीजिए ‘ब्राह्मण शंख बजायेगा हाथी बढ़ता जाएगा’, इसलिए हम इस बिल का पुरजोर विरोध करते हैं, किसी भी हाल में इस बिल को पास नही होने देंगे।”

“ये बिल ब्राह्मण और सवर्ण विरोधी बिल है”, ज़ोरदार विरोध करते हुए और “तिलक तराज़ू और तलवार इनमें मारो जूते चार” का नारा लगाते हुए (गलती से पुराना पर्चा बीच में आ गया था) हरा बटन दबा दिया जिस से बिल पास ही गया। लाल वाला हिंदुत्व का होगा, ये सोच कर नहीं दबाया था। अरे भैया हरा सेक्युलर जो है।

कमोबेश यही हाल बाकी की पार्टियों का भी रहा। सभी ने जोरदार विरोध किया, बस एक निकम्मे मोदी ने ही बिल पास करवा दिया।

कट्टर झट्टरों की मानें तो कुछ ऐसा हुआ था संसद में, जबकि जो हुआ वो आप सबको मालूम है। बिल टेबल होते ही ध्वनिमत से पास हो गया, एक भी पार्टी का विरोध में स्वर सुनाई नही दिया।

अरे विरोध तो सब करना चाह रहे थे लेकिन मोदी ने सबकी कनपटी पर पिस्तौल लगा दी थी कि अगर आवाज़ निकाली तो गोली मार दूँगा। सांसदों की सीट के नीचे बम लगा दिए थे कि अगर विरोध किया तो रिमोट का बटन दबा दूँगा और बम फट जाएगा।

बस इसी डर के चलते बेचारे सभी सांसदों ने बिल पास करवा दिया, वर्ना ये बिल औंधे मुँह गिरता, एक वोट नहीं मिलता।

इस सब में सिर्फ एक आदमी दोषी है मोदी, फांसी चढ़ा दो इसे, मोदी को छोड़ सभी ने विरोध किया इसलिए इस बार मोदी के अलावा किसी को भी वोट दूँगा पर मोदी को नही दूँगा। उधर मेरा कांग्रेसी मित्र रोज़ फ़ोन करके कहता है NOTA दबाओ नोटा।

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