अब ग़ुलाम हुए तो उबर न सकेंगे, क्योंकि खत्म ही हो जायेंगे हिन्दू

अंग्रेज़ी में एक कहावत है can’t see the forest for the trees मतलब कि किसी बात को संपूर्ण परिदृश्य में न देखकर, छोटी बातों की डिटेल में इतना खो जाना कि सामने की महत्वपूर्ण बात नोटिस ही न कर पाना या नज़रअंदाज़ कर जाना।

जैसे किसी परीक्षा में किसी एक सवाल में उलझकर, बुरा परफॉर्म करना या फ़ेल ही हो जाना। लेकिन कई बार इसका अंजाम बहुत बुरा होता है।

हज़ारों साल पहले भी हमने यही गलती की थी जब मुस्लिम आक्रान्ताओं ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था। जब दुश्मन को हमारी कमज़ोरी और हमारा रियेक्शन का पता लग जाता है वो इसका जमकर फ़ायदा उठाता है।

दुश्मन को पता था कि हिन्दुओं के लिये गाय उनकी कमज़ोरी हैं और वो उन पर हथियार नही उठायेंगे, इस जानकारी का फ़ायदा उठाकर उन्होंने गाय आगे कर दीं और हिन्दुओ ने तुरंत गाय को ध्यान में रखकर हथियार नही चलाये कि कहीं गाय न मर जायें… लेकिन क्या हुआ?

गायें तो मरी ही और साथ में मंदिर भी टूटा, हज़ारों हिन्दू मरे, महिलाओं बेटियों का बलात्कार हुआ, धन संपदा गई, खेत खलिहान गये और हिन्दू हज़ार साल तक ग़ुलाम रहा।

आज भी कुछ नहीं बदला है, अभी हिन्दू जागृत हो रहा था, एक हो रहा था और हजार साल की हीनता से बाहर आ रहा था कि हिन्दुत्व के दुश्मनों ने तुरंत एससी एसटी एक्ट आगे कर दिया और हिन्दू इसी में उलझकर रह गये और मोदी को गाली देना चालू हो गये।

तब गाय से आगे नहीं देख पाये और आज एससी एसटी एक्ट के आगे नहीं देख पा रहे हैं। क्या होगा अगर आप इस एक्ट पर अगले साल मोदी को हटायेंगे… और ‘वो’ SC/ST एक्ट तो लायेंगे ही, साथ में साम्प्रदायिक हिंसा बिल भी लायेंगे, हिन्दू को आतंकवादी भी बतायेंगे और हिन्दू धर्म को जातियों में भी तोड़गें और हिन्दू अपनी बर्बादी देखने के लिये अभिशप्त हो जायेंगे।

SC/ST एक्ट के संशोधन के नाम से, मोदी के खिलाफ ज़हर घोल दिया कि दलितों को वापस गुलाम बना दिया जायेगा। कांग्रेसियों और वामियों ने पूरे देश में आग लगा दी। फिर उसी एक्ट के विरोध में सवर्णो को मोदी के खिलाफ भड़का रहे हैं।

इनकी साज़िश को समझिये, दरअसल मुद्दा SC/ST एक्ट है ही नहीं, मुद्दा मोदी-विरोध में लोगों को भड़का कर, किसी भी हद तक जाकर, 2019 का चुनाव जीतना है, चाहे इसके लिये पूरे देश में आग क्यों न लगाना पड जाये।

चूंकि हिन्दू किसी भी तरह से नरेंद्र मोदी दूर नहीं जा रहा था तो कांग्रेस ने न्यायपालिका में बैठे कांग्रेसी प्यादे का इस्तेमाल करते हुये दाँव फेंक दिया ताकि दलितों को हिन्दुओं से अलग किया जा सके।

क्या ये कानून अभी बना है? नहीं ना… दलित वोट बैंक साधने के लिये ये 1989 का कानून है, तब कौन प्रधानमंत्री था? कांग्रेस के राजीव गांधी…

1989 से 2018 तक मीलॉर्ड को यह एहसास नहीं हुआ कि इस कानून का दुरुपयोग हो रहा है? फिर अचानक सुप्रीम कोर्ट को दिव्यज्ञान मिलता है कि एससी एसटी एक्ट का दुरूपयोग हो रहा है, फैसला देते हैं कि तुरंत गिरफ्तारी ना की जाए।

मोदी सरकार ने इस फ़ैसले के विरोध में पिटीशन डाल दी लेकिन बड़ी ही चालाकी से मुस्लिमों तथा ईसाई को और जोड़ दिया।

दलितों पर अत्याचार करने वाले ज़्यादातर मुस्लिम और दबंग ही होते हैं। इस हिसाब से तो मुसलमानों को बुरा लगना चाहिये क्योंकि उनका नाम एक्सट्रा जोड़ा गया है, पर नाराज़ सवर्ण मुख्यत: ब्राहमण हो रहे हैं।

यकीन जानिये मीम-भीम याराना में सेंध इसी कानून से लगेगी और दलित चिंतकों का चेहरा बेनकाब होगा। वरना मीम-भीम एक ऐसा ख़तरनाक गठजोड़ है जिसका तोड़ किसी के पास नही है और इस बार अगर सत्ता में आ गये तो हिन्दुओं की उलटी गिनती चालू हो जायेगी।

दलित हिंदुत्व की शक्ति और रक्षा कवच है जिसके रहते हिन्दुत्व को तोड़ना संभव नहीं है क्योंकि दंगों के समय यही लोग दंगाईयों का जमकर प्रतिकार करते हैं और वो इन्ही से डरते हैं।

इनको हिन्दुओं से अलग कर देंगे तो संख्याबल में ही नहीं कमज़ोर करेंगे बल्कि ताक़त भी खत्म कर देंगे, इसलिये हिन्दुओं को इनकी क़द्र करना चाहिये और इज़्ज़त से पेश आना चाहिये।

कांग्रेस ने यूँ ही राज नहीं किया है, उन्हे पूरा पता हमारी कमज़ोर नस को कब दबाना है। भीमा कोरेगाँव मे दलितों को मराठा के खिलाफ भड़काया, महाराष्ट्र जला दिया, फिर मराठों को दलितों के खिलाफ भड़का कर हिंसा आगज़नी करी।

पटेल आंदोलन के नाम पर गुजरात जला दिया, जाट आंदोलन के नाम पर राजस्थान, गुर्जर आंदोलन के नाम पर हरियाणा, किसान आंदोलन के नाम पर मध्य प्रदेश… और हमारी बेवक़ूफ़ी देखिये फिर हम आपस में ही उलझ गये। कांग्रेस/ विपक्ष जो भड़का रहे हैं उनसे पूछिये कि क्या वो इस एक्ट को खत्म करने के समर्थऩ में है? बात पता चल जायेगी।

मेरी आपसे हाथ जोड़ कर अपील है कि हिन्दुत्व पर छाई इस गहरी साज़िश को समझिये, जातीय दंभ छोड़िये और हिन्दू एकता को मज़बूत करिये और राष्ट्रवादी सरकार के साथ मज़बूती से खड़े रहिये वरना देश एक बार फिर ग़ुलामी के गर्त में चला जायेगा. लेकिन इस बार वापस नहीं लौट पायेगा क्योंकि हिन्दू खत्म हो जायेंगे और इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा।

ऐ कट्टर हिंदुओं… ऐ कड़क राष्ट्रवादियों… : भाग 2

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