इस वर्ग के छोटे से भी हिस्से में हिन्दू एकता, हिन्दू राष्ट्र का भाव जागे, तो ही पा सकेंगे लक्ष्य

Sc St Act कठोर है… झूठे फंसाते हैं… समाज में ज़हर फैलता है… वगैरह वगैरह।

पॉस्को एक्ट तो मानो बिलकुल ही मानवीय एक्ट है ना! कितने ही भले घर के भले लोग बेमतलब ही गैंग रेप का आरोप झेलते हैं या फिर ब्लैकमेलिंग का शिकार होते हैं।

दहेज़ और दहेज़ एक्ट भी मानो बहुत बढ़िया एक्ट है ना!

क्या इस एक्ट में मुकदमा दर्ज होने पर किसी भी नामज़द को कहीं से कोई राहत मिल पाती है? ना जाने कितनी ही बेकसूर ननद, देवर, जेठ, बूढ़े सास ससुरों की ज़िन्दगी बर्बाद करी है इस एक्ट ने।

व्यापार के क्षेत्र में आवश्यक वस्तु अधिनियम की एक धारा हुआ करती थी 3/7… पता है ये कितनी भयंकर धारा थी?

मुकदमा दर्ज होते ही व्यापारी गिरफ्तार… सारा माल ज़ब्त और 6 महीने तक कोई सुनवाई नहीं… सुनवाई भी ज्यूडिशरी में नहीं बल्कि DM के यहाँ।

व्यापारी की तीन-तीन पीढियां बर्बाद हो जाती थीं, इस मुकदमे के लगने के बाद… ना जाने कितने हार्ट अटैक के केस सुनाई पड़ते थे इस मुकदमे के साथ।

व्यापारी समाज, जो कि झगड़ा होने पर गड़ी हुयी ईंट उखाड़ता है… उसी व्यापारी समाज ने नारा लगाया था “3/7 नहीं भले ही 307 हो जाय, सरकारी अधिकारी के ऊपर गोली चला दो, लेकिन 3/7 मत होने दो…”।

दशकों तक ये कानून व्यापारी समाज ने झेला था।

और SC-ST अभी तक चल नहीं रहा था क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने यदि कोई रूलिंग दे दी… तो उछल पड़े भाजपा विरोधी दल… मिल गया उनको घेरने का मौक़ा भाजपा को… सब के सब टूट पड़े भाजपा पर।

भाजपा क्या करती? क्या हिन्दू एकता के विरोधी सम्पूर्ण विपक्ष को यूँ ही तांडव करने देकर उनकी मुंह मांगी मुराद पूरी कर लेने देती?

क्या बेमतलब ही दलित वंचित वर्ग को हिन्दू समाज के अन्दर अलगाव का अहसास करने देती?

क्या ये विरोधी लोग, दलित आदिवासी वंचित वर्ग को भाजपा से स्थायी रूप से नहीं छीन लेते?

और भाजपा नेतृत्व ये सब किस कीमत पर करता?

सवर्णों की कीमत पर ही ना!

कितने हैं सवर्ण? और कितनी एकता है इनमें?

1995 में जब भाजपा और संघ परिवार ने मायावती को मुख्यमंत्री बनवाया तो ब्राह्मण वर्ग ने ही सर्वाधिक तीव्र प्रतिक्रिया दिखाई… लेकिन फिर सबसे पहले ब्राह्मणों ने ही मायावती का दामन थामा।

2003 में राजा भैया के उत्पीड़न पर ठाकुर एक ओर भाजपा के खिलाफ झंडा बुलंद किये हुए थे… उसी दौरान हुए उप चुनावों ने ठाकुरों ने तीन सीटों पर BSP को वोट दिए थे… हैदरगढ़ की राजनाथ सिंह द्वारा छोड़ी गयी सीट पर भी।

और बनिए!… इनके लिए तो क्या SC-ST, और क्या ही कोई ठाकुर ब्राह्मण और कोई भी दबंग जाति… दलितों के लिए तो चलो एक्ट है भी… लेकिन दबंगों से इनके मान सम्मान को बचाने के लिए कौन सा कानून है… ये तो हर समय दबंगों के जूते के नीचे रहते हैं।

किसी लहर के अपवाद को छोड़ कर कितनी ही सीटें देख लो जहाँ ठाकुर और ब्राह्मण… बनिया और ब्राह्मणों में तो छोड़ो, इनके ही तमाम वर्ग-उपवर्गों में फूट नहीं रहती हो…

इनके घरों की औरतें मतदान केंद्र तक पहुंचतीं नहीं… आदमी लोग पिकनिक पर निकल जाते हैं।

सम्पूर्ण सवर्ण वर्ग किसी ‘लहर’ के अलावा अभी तक एक नाव में सवार हुआ है क्या?

इस मूर्ख सवर्ण वर्ग के लिए उस वर्ग को इग्नोर कर दिया जाए क्या, जो कि एकमुश्त वोट डालता है… अपना कामकाज छोड़ कर वोट डालता है।

क्या सारे दलित वंचित वर्ग पर मायावती-पासवान की मोनोपली है?… भाजपा को अति दलित वर्ग वोट नहीं देता है क्या? आखिर इस वर्ग को SC-ST Act का प्रोटेक्शन नहीं चाहिए?… क्या इस वर्ग को यूँ ही थाली में सजा कर मायावती को गिफ्ट कर दिया जाए?

यदि कोई कहे आरक्षण को कंटिन्यू… प्रमोशन में आरक्षण… आंबेडकर जी को नमन या इस हालिया SC-ST एक्ट संशोधन के पीछे केवल मोदी जी अमित शाह का मिशन 2019 है… ये सब कुछ भुलावे वाली बात हैं।

हमने 1980 में बाबू जगजीवन राम जी को PM पद पर पेश कर जनसंघ का नामोनिशान मिटाने की कुर्बानी दी हुई है। बार बार मायवती को CM बनवा कर भाजपा को प्रायः मिटाने के स्तर तक पहुंचाने की कुर्बानी दी है। और अब भी ये कुर्बानी का जोखिम लिया जा रहा है।

ये सब कुछ पूरी तरह सोच समझ कर किया जा रहा है…

किसी राजनेता का कोई प्रयास अपने लिए वोट लेने का हो, लेकिन हिन्दू समाज को संगठित करने में लगे लोगों के लिए दलित और वंचित वर्ग सबसे ज्यादा अहम है… वो भी उनमें जागृत स्व और स्वाभिमान के भाव के साथ।

हम समय समय पर दलित वंचित वर्ग के साथ समरसता और सहभोज के कार्यक्रम उन पर कोरा अहसान थोपने के लिए नहीं करते… श्रीराम जन्मभूमि का शिला न्यास हमने किसी सवर्ण से ना करा कर दलित कामेश्वर चौपाल से यूँ ही नहीं कराया? ये सारी कसरतें केवल दलित वंचित समाज में स्व और स्वाभिमान का भाव जागृत कराने के लिए ही की जाती हैं।

अंतत: ये वर्ग ऐसा है जिसने मुस्लिम आक्रान्ताओं के भय या लोभ से इस्लाम धारण नहीं किया, और ना ही इनको इसाई मिशनरीज़ ही ठग पायीं।

आज इस वर्ग के किसी भी छोटे से ही हिस्से में हिन्दू एकता, हिन्दू राष्ट्र का भाव जागृत होता है तो ही हमारा लक्ष्य प्राप्त हो सकता है।

अन्यथा हम यूँ ही मृगतृष्णा में दौड़ लगाते रहेंगे… और राष्ट्र विरोधी लोग दलित –मुस्लिम एकता के लक्ष्य की ओर कछुआ गति से बढ़ते चले जायेंगे।

आइये समर्थन करें, SC-ST एक्ट पर मोदी सरकार के कदम का

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