बोहरा लड़कों का प्लेट चाटना : सच वही नहीं होता जो सोशल मीडिया दिखाए

कल मैं और ध्यान बाबा सब्ज़ी लेने गए, चूंकि गेहूं भी पिसवाना था तो उन्होंने गेहूं की बोरी बाइक पर आगे टंकी पर रख ली और मैं सब्ज़ी के “कपड़ों से बने थैले” लेकर पीछे बैठ गयी।

चक्की के सामने ध्यान बाबा ने गाड़ी रोकी और कहा जल्दी से उतरो, मैंने देखा चक्की वाले भैया खुद ही उठकर बोरी उठाने आने लगे हैं, तो मैं बैठी रही… कहने लगी अरे आ तो रहा है…

लेकिन तब तक गाड़ी एक ओर झुकने लगी तो मैं तुरंत गाडी से उतरी, देखा तो गेहूं की बोरी बस गिरने के कगार पर थी और ध्यान बाबा बीस किलो गेहूं की बोरी एक हाथ से थामने का प्रयास कर रहे थे।

इतने में चक्की वाले भैया ने आकर बोरी संभाल ली। फिर वहीं ध्यान बाबा का प्रवचन शुरू, “अच्छा हुआ आप फ़ौज में नहीं हैं, आप एक अच्छी सैनिक नहीं बन सकती। आप को जो आदेश दिया जाए बिना अपनी अक्ल लगाए तुरंत उसका पालन कर दिया कीजिये।

फौज में होतीं और यदि कमांडर आदेश देते – फायर और उधर आप ममतामयी और करुणामयी बनकर सोचती रहतीं – हाय सामने वाला जवान तो सच में अभी जवान ही है, देखो तो अभी तो दाढ़ी भी ठीक से नहीं निकली… हाय कितना छोटा है.. उसके बीवी बच्चों का क्या होगा… आप बस ऐसे सोचती रह जातीं और दुश्मन आपके शरीर को छलनी कर डालता।

सांसारिक ही नहीं आध्यात्मिक बातों में भी यदि आप मेरा कहना तुरंत मानें, तो जो यात्रा दस साल में पूरी होनी है दस महीने में हो जाएगी, लेकिन अब आपकी भी क्या गलती जितना भुगतना लिखा है आपका, वो तो आपको भुगतना ही होगा, और आपके साथ मुझे भी।

और मैं वहीं सड़क पर ठहाका मारकर हंसने लगी … गुरुवर कहीं तो बख्श दिया करो… चक्की वाले भैया भी हँसते हुए बोरी उठाकर चल दिए।

आज फिर वही हुआ सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ पड़ा है, जिसमें कुछ लड़के मुस्लिम टोपी लगाए, खाने के बर्तनों के साथ दिख रहे हैं. इस वीडियो को यह कहते हुए प्रचारित किया जा रहा है कि काफ़िरों (विधर्मियों) को खाना खिलाने से पहले ये मुसलमान बर्तनों में थूक कर इसे गंदा कर रहे है… देखिए…सोचिये… क्या अब भी आप मुसलमानों के घर खाना खाएंगे?… और भी पता नहीं क्या-क्या लिखा है… जितने लोगों ने शेयर किया ये वीडियो, उतनी प्रकार की बातें…

वीडियो देखकर और ये सब पढ़कर मुझे भी क्रोध आया और इसके बारे में ध्यान बाबा को बताते हुए शेयर करने ही जा रही थी कि देखो तो कैसे घिनौने लोग है।

तभी ध्यान बाबा ने रोक दिया, “इसे शेयर नहीं करना…”

अरे, लेकिन…

“फिर वही लेकिन… बस कह दिया ना मत शेयर कीजिये… मैं भी देख रहा हूँ दो दिनों से, सोचा कमेन्ट करूं लोगों की पोस्ट पर… लेकिन फिर रुक गया कि सब अपने ही मित्र हैं, समझना है नहीं कुछ… उलटे बहस करने लगेंगे।”

फिर कहने लगे, “मुझे ये वीडियो देखकर बस यही ख्याल आया पहली बात ये आम मुस्लिम नहीं, बोहरा समाज के लड़के हैं, दूसरा वो जिस तरह से प्लेट साफ़ कर रहे हैं, देखकर लग रहा है कि वो लोग अन्न का एक भी दाना बर्बाद न हो इसलिए चाट रहे हैं, और अब ये बर्तन मांजने में जाएंगे। बोहरा समाज के लोग बहुत शांत होते हैं, एक तरह से भारतीयता में रच बस गए हैं, व्यर्थ के धार्मिक झगड़ों में नहीं पड़ते।”

मैं शेयर करते करते तो रुक गयी, लेकिन एक बार फिर मेरा मैं अहम बन गया, ऐसा कहीं होता है क्या, आपने कहा और मैं मान लूं… रुको अभी मैं गूगल पर सर्च मारती हूँ…

सबसे पहले यूट्यूब पर सर्च किया तो वही वीडियो मिला जो सोशल मीडिया पर घृणा के साथ वायरल हो रहा है। फिर गूगल पर सर्च किया तो टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर पढ़कर अचंभित रह गयी…

ध्यान बाबा को पूरी खबर पढ़कर सुनाई… ध्यान बाबा ने हमेशा की तरह अपनी विनम्र मुस्कान के साथ कहा- “आप आज भी वही देखती हैं जो दुनिया दिखाना चाहती हैं, ध्यान से देखा करिए चीज़ों को, ध्यान की आँखों से देखना शुरू कीजिये नज़रें बदल जाएँगी तो नज़ारे बदल जाएंगे, यानी आपकी दुनिया बदल जाएगी।”

ध्यान बाबा का इस वीडियो को देखने के बाद लगाया गया अंदाज़ ही सही था… रमजान के दिनों में कैसे एक भी अन्न का दाना व्यर्थ न जाए उसके लिए ये लोग स्वेच्छा से यह सेवा करते हैं… ठीक वैसे ही जैसे हम झूठे बर्तन धोकर वह पानी, पेड़ों में डाल देते हैं या जानवरों को दे देते हैं… ठीक है, उनका तरीका सही नहीं है, लेकिन उद्देश्य गलत नहीं है…

हिन्दू धर्म में दूसरे का झूठा खाने की भी अनुमति नहीं है फिर भी हम घरवालों या दोस्तों का झूठा खा लेते हैं, लेकिन जिस मज़हब में एक ही थाली में दस लोग खाते हो, उन्हें यह कार्य घृणित नहीं लगता होगा…

कुछ लोग अभी उतने शिक्षित और सभ्य समाज के अनुसार नहीं हो सके हैं लेकिन बोहरा समाज और आम मुस्लिम समाज (सुन्नी, शिया वगैरह) में ज़मीन आसमान का फर्क तो है…

पूरी रिपोर्ट आप टाइम्स ऑफ़ इंडिया के इस लेख पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं। साथ में जो वीडियो दिया है वो भी टाइम्स ऑफ़ इंडिया में उल्लेखित संस्था के नाम का ही ज़िक्र करता हुआ है… कि ये लोग यह कार्य स्वेच्छा से करते हैं ताकि अन्न का एक भी दाना व्यर्थ न जाए…

https://timesofindia.indiatimes.com/city/mumbai/in-holy-ramzan-muslims-urged-not-to-waste-food/articleshow/64338950.cms

सोशल पर वायरल : पास आइये कि हम नहीं आएँगे बार बार…

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