अक्सर बड़ी हिंसा को जन्म देता है, छोटी हिंसा का भय

हालाँकि मामला कोर्ट की निगरानी में है, किन्तु ASSAM NRC (National Register of Citizens) का अवैध प्रवासियों वाला ही मोदी सरकार की रीढ़ का असल लिटमस टेस्ट है।

यदि मोदी सरकार इसपर हिन्दू भावनाओं की राजनीति भुनाने तक सीमित रहेगी तो देशहित को भयंकर नुकसान होना तय समझें।

हाँ, यदि आगे बढ़कर अवैध प्रवासियों की नागरिकता एवं मताधिकार खत्म करने की हिम्मत दिखायेंगे तो भारत से सेक्युलर राजनीति की जड़ें उखड़ने लगेंगी।

यह मान लेना ठीक होगा कि दूसरे मौके के उपरांत भी 25 से 30 लाख अवैध मुस्लिम बंगलादेशियों के नाम नागरिकता की सूची से हटे रहेंगे।

फिर यदि मोदी सरकार निर्णायक रूप से मतदाता सूची एवं सरकारी लाभार्थियों की सूची से हटाने की पहल करे तो उत्तर भारत के प्रत्येक गाँव से इस्लामपरस्त मुल्लाओं का हिंसक प्रदर्शन दिखाई देगा।

ऐसा प्रदर्शन विखंडित भारत के इतिहास में कभी भी नहीं हुआ है। सेक्युलकरवादियों की शांति की अपील भी इस्लामवादियों को हिंसा से रोक नहीं पायेगी।

मोदी को इसका चुनावी फायदा मिल सकता है, किन्तु इस्लामवाद को जो चोट मिलेगी वो एक उदाहरण बनेगी।

इस्लामवाद अपने सबसे बड़े हथियार यानी जनसंख्या की ताकत को चुनौती देने पर कत्तई शांत नहीं बैठेगा।

मोदी सरकार को इस संभावित हिंसा से निपटने की कठोर तैयारी करनी पड़ेगी, सेक्युलकरवादियों और इस्लामवादी जमात को स्पष्ट संदेश देना होगा कि या तो चुपचाप बिल में घुस जाओ वरना जान जा सकती है।

इन सबके बीच भारी हिंसा होने की संभावना है, और यदि इस संभावित हिंसा से भय ख़ाकर मोदी सरकार निर्णायक कार्यवाही या ASSAM NRC से पीछे हटती है तो देश को इसकी कीमत संभावित गृहयुद्ध से चुकानी पड़ेगी।

छोटी हिंसा का भय अक्सर बड़ी हिंसा को जन्म देता है।

भारत का विभाजन इसलिये हुआ क्योंकि नेहरू-पटेल और काँग्रेस, मुस्लिम लीग के छुरे से होने वाली छोटी सी हिंसा से डर कर घुटने टेक गए थे।

मुस्लिम लीग से लड़े जाने वाले गृहयुद्ध में विभाजन से अबतक हुई हिंदुओं की हत्याओं से कई गुणा कम जानें जातीं।

इतिहास ने हमें फिर ऐसे ही एक मोड़ पर खड़ा कर दिया है जहाँ हमारे नेतृत्व को हिंसा और कायरता के बीच एक का चुनाव करना है।

नरेंद्र मोदी के पास अवसर है कि वह 1947 के विभाजन की कायरता के श्राप से भारत को मुक्त करें या फिर स्वयं नेहरू-पटेल बन जाते हुए भाजपा को काँग्रेस बना दें।

काँग्रेस के 6 दशक के शासन के बावजूद पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाए हम

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY