Beware of Chat Traps : चैट, चस्का और चीटिंग

बस एक भूल और ज़िंदगी बेज़ार हो जाती है – यह कोई फिल्मी डायलॉग नहीं बल्कि साइबर क्राइम के शिकार हुए लोगों की हकीकत है। आजकल सोशल मीडिया पर सेक्स, एंटरटेनमेंट, एक्साइटमेंट और धोखाधड़ी का धंधा जोरों पर है। इंटरनेट पर ऐसी भूल न करें। अगर गलती हो भी जाए तो उससे निपटने के तरीके क्या हो सकते हैं, एक्सपर्ट्स से बात कर पूरी जानकारी दे रही हैं अनु जैन रोहतगी

केस-1: गले पड़ी गलती

34 साल की रीमा (बदला हुआ नाम), एक मल्टी नैशनल कंपनी में अच्छी पोस्ट पर हैं। शादीशुदा हैं और 10 साल का बेटा भी है। पति का बड़ा बिजनेस है और काम के सिलसिले में अक्सर बाहर रहता है। पैसों की कमी बिल्कुल नहीं है। रीमा को भी ऑफिस के काम के लिए बाहर जाना पड़ता है इसलिए घर नौकर-चाकर के भरोसे चल रहा है।

रीमा काम के साथ-साथ मौज-मस्ती के लिए भी पूरा समय निकाल लेती हैं। वीकेंड पार्टी या फिर फेसबुक चैटिंग में गुजर जाता है। एक दिन अचानक रीमा की जिंदगी में जैसे भूचाल आ जाता है। उसे एक मेल आती है और उसका टाइटल भी कुछ चौकाने वाला होता है। Read the mail and act wisely (मेल पढ़ो और समझदारी से काम करो)। रीमा उत्सुक होकर मेल खोलती है, तो उसके होश उड़ जाते हैं। मेल में रीमा की कुछ बिना कपड़ों के फोटो हैं। साथ में लिखा है 5 लाख रुपये चाहिए, नहीं तो ये फोटो तुम्हारे पति को भेज दी जाएंगी।

कुछ समय पहले ही रीमा ने अपने एक नए फेसबुक फ्रेंड के दबाव में और शराब के नशे में उत्तेजित होकर फेसबुक पर चैट के दौरान अपने कपड़े उतार दिए थे। उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि चैट के दौरान उसकी बिना कपड़ों के फोटो खींची जाएगी और उसे ब्लैकमेल किया जाएगा। शर्म में डूबी रीमा बहुत डर गई और किसी को बताए बिना ही पहली बार 5 लाख और दूसरी बार 3 लाख रुपये देकर अपनी जान छुड़ाई। इस बात को काफी समय हो चुका है, लेकिन अभी तक रीमा डर के साये में जी रही है। एक साइकायट्रिस्ट के पास उसकी अभी तक काउंसलिंग चल रही है।

केस-2: फेक फ्रेंड का फेर

28 साल के रवि (बदला हुआ नाम) दिल्ली में अकेले रहता है। अच्छी जॉब है। परिवार से दूर होने के कारण रात का समय फेसबुक, वाट्सअप चैट पर ही गुजरता है। कई वट्सऐप दोस्त भी बन गए हैं। लेकिन फेसबुक की यह दोस्ती एक दिन रवि को बहुत भारी पड़ गई।

फेसबुक नोटिफिकेशन चेक करते समय अचानक एक सुंदर लड़की का चेहरा सामने आकर रवि से दोस्ती की पेशकश करता है। अकेले रह रहे रवि की तो जैसे मन की मुराद पूरी हो गई। दो-तीन दिन लगातार देर रात तक बातें होती रही और दोस्ती प्यार में भी बदल गई। एक दिन लड़की ने रवि के सामने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। उसने रवि को भी ऐसा करने पर उकसाया। लड़की का जुनून रवि के सिर पर सवार था और उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए।

कब, कैसे उसने लड़की की अदाओं पर रीझ कर मैस्टरबेशन भी कर लिया। अगले ही दिन रवि की सारी खुमारी उतर गई, जब चैट पर उस लड़की के बजाय उसे एक लड़के ने संबोधित किया और धमकाया कि उसके पास मैस्टरबेशन करते हुए रवि की सेक्स रिकॉर्डिंग है। अगर 10 लाख रुपये नहीं मिले तो वह विडियो उसके परिवार और दोस्तों को भेज दिया जाएगा।

घबराए रवि ने तुंरत चैट बंद कर ली और फेसबुक अकाउंट ही डिलीट कर दिया। लेकिन यह उस गलती का हल तो नहीं था जो रवि कर चुका था। अगले दिन रवि को एक मेल मिलती है जिस पर लिखा होता है वॉच एंड डिसाइड (देखो और फैसला करो) मेल में एक क्लिपिंग में रवि की मैस्टरबेशन करते हुए की 2 मिनट की वीडियो थी।

रवि बहुत घबरा चुका था, लेकिन उसने समझदारी से काम लिया और ये बात अपने एक वकील दोस्त से शेयर कर ली। वकील ने उसे फौरन पुलिस में रिपोर्ट लिखवाने की सलाह दी और फेसबुक को इसकी जानकारी देकर, ब्लैकमेल करने वाले की पहचान देने का ईमेल लिखा। इसका असर यह हुआ कि पकड़े जाने के डर से ब्लैकमेलिंग करने वालों ने मेल भेजनी बंद कर दी और रवि की जान में जान आई। साथ ही उसे एक अच्छा सबक भी मिला।

केस-3: वेबकैम का वेब

25 साल की नेहा (बदला हुआ नाम) के मामले में उसे मजा चखाने, बदनाम करने के लिए, उसके ही साथ काम करने वाले एक सहयोगी ने बाकायदा उसके कंप्यूटर को हैक करके उसकी कुछ बोल्ड फुटेज का वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। बात यह थी कि नेहा ने अपने सहयोगी के शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, इससे नाराज होकर उसने नेहा को बदनाम करने की ठान ली। नेहा के बारे में उसने घर के नौकरों और कुछ करीबी सहेलियों से जानकारी ली। पता चला कि नेहा अपने कमरे में बिना कपड़ों के घूमती है और उसका कंप्यूटर का वेबकैम 24 घंटे चालू रहता है। बस उसने नेहा के कंप्यूटर को हैक करके, रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। लगभग डेढ़ घंटे का विडियो बनाया और 5 मिनट की फुटेज नेहा को भेज दी। नेहा का मामला फिलहाल कोर्ट में चल रहा है।

क्या है सेक्सटॉर्शन

आपने ऊपर जो मामले पढ़े हैं वे सभी सेक्सटॉर्शन के हैं। सेक्सटॉर्शन दरअसल, ब्लैकमेलिंग के ऐसे मामलों को कहा जाता है। इसमें स्पाई कैमरे या मोबाइल या वेब कैम के जरिए किसी की सेक्स गतिविधि को रिकॉर्ड करना या किसी की बिना कपड़ों की तस्वीरों को शूट करके उसके जरिए ब्लैकमेल करने को सेक्सटॉर्शन कहा जाता है। सेक्सटॉर्शन के ऐसे मामले पिछले दो-तीन बरसों से ही सामने आ रहे हैं। अहम बात यह भी है कि दूसरे ब्लैकमेलिंग के मामलों की तरह ऐसे केसों की रिपोर्टिंग भी बहुत कम है। पिछले एक-दो बरसों में कुछ लोग हिम्मत करके पुलिस, वकील और डॉक्टरों के पास मदद के लिए पहुंच रहे हैं और पता चलने लगा कि है सेक्सटॉर्शन के इस तरीके से लोगों को ठगा जा रहा है।

ब्लैकमेलिंग के सेक्सटॉर्शन के मामलों की संख्या विदेशों में तो थी ही, अब अपने देश में भी तेजी से बढ़ रही है। आज की मॉडर्न लाइफ में इंटरनेट चैटिंग एक जुनून, एक ज़रूरत, एक स्टाइल बनती जा रही है। चैंटिंग के दौरान पता ही नहीं चलता कि आप कब-कैसे दूसरे आदमी से एकदम खुल जाते हैं, उससे हर बात शेयर करने लगते हैं। जब पता चलता है तो बहुत देर हो चुकी होती है।

इसी बात का फायदा कुछ साइबर क्राइम में ऐक्टिव गैंग उठा रहे हैं। इनका धंधा ही सेक्सटॉर्शन के जरिए लोगों को फंसाना और पैसा कमाना है। सेक्सटॉर्शन के शिकार लोगों की कोई उम्र सीमा नहीं है। एक तरफ जहां इसमें स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के-लड़कियां शिकार होती हैं, वहीं कई बार 50-55 साल तक के लोग भी लड़कियों से दोस्ती, उनसे संबंध बनाने के चक्कर में सेक्सटॉर्शन का शिकार बन रहे हैं।

बदनामी और शर्म के चलते ऐसे मामले पुलिस के पास बहुत कम पहुंचते हैं, लेकिन कई बार साइकायट्रिस्ट के पास पहुंच जाते हैं। बदनामी, शर्म, ग्लानि के चलते ऐसे लोग डिप्रेशन, घबराहट, काम में मन न लगना, नींद न आना और कई साइकोसोमैटिक (मानसिक बीमारी के कारण शारीरिक बीमारी हो जाना) बीमारियों का शिकार बनकर एक्सपर्ट के पास पहुंचते हैं। वहां भी बहुत मुश्किल से ही कोई बात सामने आती है। साइकायट्रिस्ट की कई-कई दिनों की काउंसलिंग के बाद ही सच्ची बात सामने आती है।

साइकायट्रिस्ट के पास अमूमन दो तरह के मामलों में लोग सलाह या इलाज कराने के लिए आ रहे हैं। पहले वे मामले हैं, जो सेक्सटॉर्शन का शिकार हो चुके हैं और अब डिप्रेशन, नींद न आना जैसी बीमारियों का शिकार बन चुके हैं। दूसरा ग्रुप ऐसे लोगों का है जो नशे, पागलपन में वेब चैट के दौरान सेक्स गतिविधियां कर चुके हैं या अपने किसी दोस्त को अपनी बोल्ड तस्वीर शेयर कर चुके हैं। उन्हें अब रह-रहकर फोटो, वीडियो लीक होने, ब्लैकमेलिंग का शिकार होने का डर सता रहा है। हालांकि, उनकी वेब पर फ्रेंडशिप कायम है, लेकिन एक डर के साथ। ऐसे लोग डर, घबराहट के साथ मदद लेने पहुंचते हैं कि अगर कुछ उलटा-सीधा हो गया तो वह क्या करे?

उनका है यह फुलटाइम धंधा

इस काम में ऐक्टिव कुछ ग्रुप फेसबुक, स्काइप या किसी दूसरे माध्यम का इस्तेमाल करके अपने शिकार को फंसाते हैं। पहले ये इंटरनेट पर अपनी नकली पहचान बनाते हैं। फिर खूबसूरत लड़के-लड़कियों को हनी ट्रैप की तरह इस्तेमाल करके अपने शिकार से दोस्ती करवाते हैं। उन्हें बहुत करीब आने, दोस्ती बढ़ाने के लिए उकसाते हैं। धीरे-धीरे अपने शिकार को वेबकैम के सामने सेक्सुअल ऐक्ट करने, कपड़े बदलने और उतारने के लिए उकसाते हैं।

हैरानी की बात तो यही है कि ज्यादातर लोग इनके चंगुल में फंस जाते हैं। यही कारण है कि इनके शिकार लोगों की संख्या बढ़ रही है। अपने शिकार को फंसाने के लिए इन्हें 10 दिनों से लेकर कई महीनों का समय लग जाता है। ज्यादातर गैंग बहुत ही प्रोफेशनल तरीके से काम करते हैं। टारगेट की माली हालत, परिवार, मैरिटल स्टेट्स, शौक आदि की जानकारियां जुटाई जाती हैं। पता चलने पर कि लड़का या लड़की पैसेवाला है। दिलफेंक है, करीबी दोस्त बनाने पर यकीन करता है, तभी उनको टारगेट किया जाता है और पूरा समय लगाया जाता है। जानकारों के मुताबिक इस समय इस काम में लगे 80 फीसदी इंटरनैशनल गैंग ऐक्टिव हैं, जबकि देसी गैंग की संख्या 20 फीसदी होगी।

…और ऐसे फंसते जाते हैं हम

इस समय सबसे ज्यादा फेसबुक के जरिए लोगों को फंसाया जा रहा है। इसके बाद स्काइप, लिंक्ड-इन, स्नैपचैट, इंस्टाग्रैम का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

नेट पर दोस्ती: पहले दोनों की रजामंदी से वेबकैम के सामने कपड़े बदलने, सेक्सुअल ऐक्ट करने का सिलसिला शुरू हो जाता है और बाद में यही एपिसोड ब्लैकमेलिंग में बदल जाता है।

कंप्यूटर हैकिंग: इस क्राइम को ज्यादातर बहुत ही प्रफेशनल लोग करते हैं। इसके शिकार वही लोग बनते हैं, जो बहुत ज्यादा अपना समय वेब कैम के सामने गुज़ारते हैं। उसके सामने ही कपड़े बदल लेते हैं या कोई सेक्सुअल ऐक्ट करते हैं। हैकर लगातार आपके कंप्यूटर का वीडियो रिकॉर्ड करते हैं और सेक्सटॉर्शन शुरू कर देते हैं।

सिस्टम में बिना कपड़ों की तस्वीरें : हैकर उन लोगों के भी कंप्यूटर हैक करते हैं, जो फन या एक्साइटमेंट में अपना ही सेक्स वीडियो या बोल्ड तस्वीरें सिस्टम में डाल देते हैं।

फोटो की मॉर्फिंग : कई बार आपकी फोटो को मॉर्फ करके आपका फेस किसी और लड़की या लड़के के शरीर पर फिट कर दिया जाता है, जिसने कपड़े नहीं पहने होते। मॉर्फ फोटो के जरिए ही सेक्सटॉर्शन शुरू हो जाता है।

स्नैपचैट का खेल : आजकल स्नैपचैट का काफी क्रेज़ है। खासकर स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वालों के बीच ज्यादा है। इसे भी सेक्सटॉर्शन के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया गया है। जानकारों के मुताबिक यंग लड़के-लड़कियां अपनी बोल्ड तस्वीरें मेसेज के जरिए एक-दूसरे को भेजते हैं। यह मेसेज अपने आप ही 10 सेकंड में डिलीट हो जाता है, लेकिन कुछ सॉफ्टवेयर ऐसे भी आ गए हैं जिनकी मदद से भेजी गई तस्वीरों को 10 सेकंड में सेव कर लिया जाता है।

जब बन जाएं शिकार…

क्या करें:
– सबसे पहले नजदीक के थाने या साइबर क्राइम सेल में इसकी रिपोर्ट करें।
– अपने परिवार के किसी सदस्य को इसकी जानकारी जरूर दें। बताने में बहुत शर्म आएगी, लेकिन यह बहुत-सी परेशानियों से बचाएगा।
– जिस आईडी का इस्तेमाल करके आपको ब्लैकमेल किया गया है, उसे तुरंत ब्लॉक कर दें।
– अपने इंटरनेट एडमिन को फौरन सूचित करें और ब्लैकमेल करने वाले की आईडी के बारे में जानकरी हासिल करें। जैसे आप फेसबुक पर सेक्सटॉर्शन का शिकार बने हैं तो फेसबुक एडमिन को फौरन सूचित करें।
– जिस प्लैटफॉर्म पर आपको शिकार बनाया गया है, उसको कुछ समय के लिए डीऐक्टिवेट कर दें।
– यह बात ध्यान रखें कि आप जितना डरेंगे, उतना ही आपको डराया जाएगा।
– आपने ब्लैकमेल करनेवाले से जो भी चैट किया है, उसका स्क्रीन शॉट ले लें।
– अगर आपने ब्लैकमेलिंग के लिए ऑनलाइन पेमंट किया है, तो पेमंट कहां गया है, उसे देखकर पुलिस को जानकारी दें।
– ब्लैकमेलर के जरिए दी गई किसी भी जानकारी का पूरा रिकॉर्ड रखें। जैसे कि स्काइप की नाम, आईडी, फेसबुक यूआरएल, वेस्टर्न यूनियन या मनीग्राम का मनी ट्रांसफर कंट्रोल नंबर।

क्या न करें:

– कभी भी चुप ना बैठें। यह मत सोचें कि एक बार पैसा देकर बच जाएंगे। हो सकता है और डिमांड आनी शुरू हो जाए। आपसे गलती हुई है, इसलिए उसका सामना करें। आत्मविश्वास के साथ लड़ें।
– कभी भी किसी रिकॉर्डिंग, बातचीत, मेल को डिलीट न करें। दरअसल, ये लिंक्स आगे चलकर पुलिस के काम आती हैं।
– कभी भी डिमांड करने वाले से सीधी बात ना करें। फोन पर बात न करें। इससे उन्हें प्रोत्साहन मिलता है।
– ज्यादातर साइबर गैंग फोटो या सेक्स रिकॉर्डिंग्स की क्लिपिंग भेजने के लिए मेल का इस्तेमाल करते हैं, कोशिश करें, उसे बार-बार ना देखें। आप परेशान होंगे।
– पैसा बिलकुल ना दें। एक बार दे दिया तो भी डिमांड आ सकती है। ब्लैकमेलर पैसा लेने के बाद भी वीडियो वायरल कर दे।

कानून को जानें

– सबसे पहले आईटी ऐक्ट के तहत मामला दर्ज होता है। क्योंकि यह क्राइम पैसे के लिए होता है, इसलिए आईपीसी की धारा 384 लागू होगी।
– धारा 292 अश्लीलता से संबंधित है, जिसके तहत मामला दर्ज हो सकता है। इसके अलावा धारा 67, 67ए, बी के तहत भी मामला दर्ज हो सकता है।
– शिकायतकर्ता अगर महिला है तो ‘इंडिसेंट रिप्रजेंटेशन ऑफ वुमन’ ऐक्ट का भी पुलिस इस्तेमाल कर सकती है।
– यदि आप पुलिस में नहीं जाना चाहते और क्रिमिनल केस नहीं चाहते तो सिविल केस दर्ज कर सकते हैं। इसमें नेट ऐडमिन तक को नोटिस भिजवाकर जानकारी मांगी जा सकती है।

बढ़ रहे हैं इंटरनेट मिसयूज़ के मामले

माइक्रोसॉफ्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार 77 प्रतिशत भारतीय किसी-न-किसी रूप में साइबर क्राइम मिसयूज़ के शिकार हुए हैं, इनमें साइबर बुलिंग, ट्रॉलिंग, ऑनलाइन सेक्स संबंधित मेसेज भेजना, तंग करना, सेक्सटॉर्शन जैसे अपराध शामिल हैं। यह स्टडी लोगों को साइबर क्राइम के बढ़ते खतरों से जागरूक करने और उनसे सावधान रहने के लिए की गई थी।

स्कूल-कॉलेज में भी मामले

चिंता की बात यह है कि सेक्सटॉशर्न मामलों में स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले यंग लड़के-लड़कियां भी शिकार हो रहे हैं। कुछ फेसबुक पर चैट के दौरान हनी ट्रैप का शिकार होते हैं तो कुछ बच्चे वेब कैम के जरिए। ये पीडोफिलिक के भी संपर्क में आ रहे हैं। 16 साल की सविता (बदला हुआ नाम है) का अपने स्कूल में पढ़ने वाले एक लड़के से अफेयर हो गया। लड़के ने सविता को प्यार का वास्ता देकर कम कपड़ों में फोटो भेजने के लिए मना लिया। उसी फोटो को, उस लड़के ने अपने एक दोस्त के साथ शेयर कर दिया। बस उसके दोस्त के शैतानी दिमाग ने सविता को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। सविता धीरे-धीरे डिप्रेशन में जाने लगी। पैरंट्स उसे काउंसलिंग के लिए एक्सपर्ट के पास ले गए। 6 सिटिंग के बाद उसने डॉक्टर को बताया। वाकया सुनकर पैरंट्स के होश उड़ गए। प्रिंसिपल को जानकारी दी गई और दोनों लड़कों के खिलाफ सख्त कारवाई हुई।

कैसे पहचानें पैरंट्स

– बच्चा इंटरनेट पर ज्यादा वक्त देता है। रात में कुछ अधिक।
– उसके कमरे का दरवाजा हमेशा बंद रहता है या वह अकेले कोने में बैठना पसंद करता है।
– दरवाजे पर दस्तक देकर अंदर आने पर जोर देता है।
– अपोजिट सेक्स के साथ दोस्ती करने के लिए हमेशा इच्छुक रहता है।
– इंटरनेट पर दोस्तों की लिस्ट काफी लंबी है।
– कई बार डिप्रेशन के शिकार बच्चे भी गलत चीजों में फंस जाते हैं, इसलिए बच्चे की इस बीमारी को गंभीरता से लें।
– दोस्तों-परिवार से कटने लगा है।
– भूख कम हो गई है या बहुत ज्यादा खाने लगा है।
– बच्चा अगर रियल जिंदगी से ज्यादा रील जिंदगी में यकीन करने लगा है।
– किसी लड़के या लड़की से ब्रेकअप हो चुका है।

कैसे बचाएं बच्चों को

– इंटरनेट चाहे कंप्यूटर पर उपलब्ध हो या फोन पर, उसकी समयसीमा जरूर बना दें।
– बच्चों के सामने पैरंट्स भी सोशल मीडिया पर ज्यादा ऐक्टिव न रहें। इससे बच्चों के सामने सही उदाहरण पेश होगा।
– 13 साल से कम के बच्चे फेसबुक, स्नैपचैट पर अकाउंट नहीं रख सकते। आप इस नियम को समझें और बच्चों को भी समझाएं।
– बच्चा अगर लगातार चैट करता है तो कभी-कभी उसके बारे में जानकारी लें।
– बच्चों को बताएं कि वे अपना मोबाइल नंबर या पता फेसबुक या किसी दूसरी जगह पर शेयर न करें।
– बच्चों के साथ दोस्ताना बने रहिए। उनमें हर छोटी-बड़ी बात शेयर करने की आदत डालें, इसके लिए आपको समय निकालना होगा।
– बच्चों को सेक्सटॉर्शन के बारे में जरूर जानकारी दें।
– सोशल मीडिया से मोबाइल नंबर, ईमेल आदि हटवा दें।

ऐसे पेश न आएं बच्चों से

गुस्सा करना: गैजेट्स का इस्तेमाल कम या सीमित करने के लिए बच्चा नहीं मान रहा है तो गुस्सा न करें, डांट बिल्कुल न लगाएं। इससे बच्चा विद्रोह कर सकता है और फिर छुपकर वही काम करेगा।

बातचीत बंद करना: उसके साथ बातचीत के जरिए ही संवाद कायम रखें। इसमें समय लगेगा लेकिन वह आपकी बात मान लेगा।

मोबाइल छीनना: गुस्से में आकर उसका मोबाइल फोन न छीनें। इंटरनेट कनेक्शन न कटवाएं। इससे वह इंटरनेट का इस्तेमाल बाहर कर लेगा, जो ज्यादा खतरनाक है।

गलती को फैलाना: बच्चे की किसी गलती का पता लग गया है तो उसकी गलती का ढिंढोरा नहीं पीटें। इससे पहले से ही परेशान, ग्लानि में डूबे बच्चे का आत्मविश्वास टूट सकता है।

चुप बैठ जाना: चुप बिल्कुल न बैठें। स्कूल से नाम कटवाने के बजाय प्रिंसिपल, संबंधित अधिकारियों से शिकायत करें। वह कॉलेज में है तो पुलिस, एजेंसियों की फौरन मदद लें।

मोबाइल फोन रिपेयर कराने या बेचने से पहले डेटा ऐसे करें डिलीट

– अगर आप अपना फोन फैक्ट्री रीसेट करने के बाद सोच रहे हैं कि आपके फोन से सारी इंफर्मेशन डिलीट हो गई है, तो आप पूरी तरह गलत हैं।

– दरअसल, फैक्ट्री रीसेट किसी भी फोन को उसी अवस्था में ले आती हैं, जिस समय वह नया आया हुआ होता है। इस प्रक्रिया में काफी डेटा स्थायी रूप से डिलीट भी हो जाता है, लेकिन कुछ निजी जानकारियां जैसे फोटो, वीडियो, ई-मेल आदि फोन के किसी फ्री स्पेस या कहें कि इंटरनल मेमरी में ही रह जाती हैं यानी ये जानकारियां फैक्ट्री रीसेट के बाद भी डिलीट नहीं होतीं।

– ऐसे में आपकी फोटो, वीडियो आदि किसी गलत हाथ में जा सकते हैं। आइए जानते हैँ मोबाइल फोन से कैसे स्थायी रूप में फोटो, वीडियो डिलीट किए जा सकते हैं।

अगर Android फोन है तो…
1. सबसे पहले आपको फोन की स्टोरेज को एन्क्रिप्ट (डेटा को गोपनीय भाषा में बदलना) करना होगा। इसके लिए ये स्टेप्स फॉलो करें:
कुछ एंड्रायड मोबाइल में इस प्रोसेस को अपना सकते हैं:
Settings-Security-Encryption-Factory Reset
– अपने फोन की Settings पर क्लिक करके Security में जाएं।
– इसमें आपको नीचे Encryption का ऑप्शन दिखेगा। इसे ​क्लिक करें।
– यदि आपने माइक्रो एसडी कार्ड का उपयोग किया है तो उसे भी ऐन्क्रिप्टेड करने का विकल्प मिलेगा।
– इसे ओपन करने के बाद इस प्रोसेस में थोड़ा समय लेगा। कुछ ​ही देर में आपके फोन पर ऐन्क्रिप्टेड का मेसेज आ जाएगा।
– इन्क्रिप्शन पूरा होने के बाद मोबाइल को Factory Reset करें।
– फोन को सेटअप करें यानी उसमें तारीख, समय आदि सही कर लें।
– यहां ध्यान रहे कि अपनी Gmail को इस मोबाइल में एक्टिवेट न करें।

जबकि कुछ दूसरे एंड्रायड मोबाइल फोन में इस तरीके से करें:
Settings-Additional Settings-Privacy-Encrypt-Factory Reset
– फोन की Settings पर क्लिक करके Additional Settings जाएं।
– इसमें आपको Privacy का ऑप्शन दिखाई देगा। इसे ​क्लिक करें।
– इसके बाद ऐन्क्रिप्ट के ऑप्शन को टैप करें।
– ऐन्क्रिप्शन पूरा होने के बाद Factory Reset करें।
(नोट: ऐन्क्रिप्शन का विकल्प अलग-अलग फोन, मॉडल और एंड्रॉयड वर्जन के मुताबिक अलग-अलग हो सकता है।)

iPhone फोन है तो…
अगर आप अपना आइफोन बदलना चाहते हैं या फिर उसे बेचना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको अपना पर्सनल डेटा जैसे कि फोटो, मैसेज और दूसरी फाइल्स को सेव करके पूरी तरह से डिलीट करना चाहिए। आप कुछ ही स्टेप में अपने डेटा को सुरक्षित कर सकते हैं।
आपके फोन में डेटा बैकअप की सुविधा होनी चाहिए।
1. सबसे पहले सेटिंग्स अपने आइफोन की सेटिंग में जाएं।
2. Apple ID banner पर जाएं।
3. अब iPhone पर टैप करें।
4. यहां से iCloud Backup के ऑप्शन लें।
5. इसे ऑन करे के लिए switch करें।
6. OK पर टैप करें।
7. आखिर में Back Up Now का ऑप्शन चुनें।
ध्यान रखें कि आपका आइफोन या आइपैड ‌‌‌वाई-फाई से कनेक्ट रहे। अगर बैटरी कम है तो उसे चार्जिंग पर लगा दें।

आइफोन यूजर ऐसे करें डिलीट करें फोन का डेटा:
– अपने आइफोन या आइपैड की होमस्क्रीन से Settings app पर जाएं।
– अब General पर टैप करें।
– ऑप्शन में सबसे नीचे Reset का ऑप्शन चुनें।
– Erase iPhone पर टैप करने पर Erase Now का ऑप्शन आएगा।
– आपसे आपका एप्पल आईडी पासवर्ड पूछा जाएगा। पासवर्ड डालने के बाद डेटा डिलिट होना शुरू हो जाएगा। यह प्रोसेस खत्म होने के बाद आप अपना डिवाइस बेफिक्र होकर किसी को भी दे या बेच सकते हैं।

Facebook अकाउंट बनाएं सेफ
– अपने फेसबुक अकाउंट से ये जानकारियां हटा लें या छिपा लें: बर्थडे, मोबाइल नंबर, ईमेल, लोकेशन।
– कभी भी अपने पासवर्ड को किसी से भी शेयर नहीं करें।
– अनजाने लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट को न स्वीकार करें।
– फ्री गेम्स, कई प्रकार के लुभावने ऑफर के ऐप को डाउनलोड न करें। ये बहुत बार वायरस, स्पाईवेयर या और किसी सॉफ्टवेयर से लैस होते हैं, जो आपकी सारी जानकारी, फोटो चुरा सकते हैं।
– गलती से भी अपनी कोई आपत्तिजनक फोटो या सेक्स वीडियो फेसबुक, अपने फोन, कंप्यूटर पर अपलोड न करें। हैकिंग के साथ-साथ अगर गलती से कोई और देख ले तो आप परेशानी में पड़ सकते हैं।
– फेसबुक चैट पर भेजे गए लिंक्स को क्लिक करने से बचें।
– इस बात का ध्यान रखें कि फेसबुक पर कई बार लोग भी फेक होते हैं और कई जानकारियां भी गलत और झूठी होती हैं।
– कभी भी किसी ऑनलाइन दोस्त से अकेले में न मिले।
– अगर आपका लैपटॉप हमेशा खुला रहता है तो कोशिश करें कि उसके कैमरे और माइक्रोफोन पर हल्की सी चिट लगाकर उसे ढक दें। यही ख्याल पीसी के वेब कैम पर भी रखें।

मोबाइल में ऐप से सिक्यॉरिटी
अगर आपको शक है कि कोई ऐप आपकी प्राइवेसी भंग कर रहा है या आपके डेटा को गैरवाजिब ढंग से ऐक्सेस कर रहा है तो उसकी शिकायत या रिपोर्ट कर सकते हैं:
एंड्रॉयड के लिए
support.google.com/legal/troubleshooter/1114905
अब जो पेज खुलेगा, उस पर Google Play: Apps चुनें।
आईओएस के लिएः reportaproblem.apple.com/
इसके अलावा गूगल प्ले स्टोर और आईओएस ऐप स्टोर को अगर आप खोलेंगे उसमें सर्च करके इंस्टॉल किए गए ऐप के पेज पर जाएंगे तो वहां आपको नीचे App Support या ईमेल करने का ऑप्शन मिलेगा। यहां इस बात का इंतजाम होता है कि आप जरूरत पड़ने पर उसकी शिकायत कर सकें।

पैरंट्स के लिए कुछ टिप्स
– खुद को सोशल मीडिया के सुरक्षा के तरीकों से लैस रखें। कंप्यूटर और मोबाइल पर उनका इस्तेमाल करें।
– कंप्यूटर हमेशा खुली जगह रखें। बच्चों को बंद कमरे में चैट की परमिशन न दें।
– बच्चों को बताएं कि अगर कहीं से अश्लील वीडियो या फोटो उन्हें चैट पर मिलते हैं तो वे अपने दोस्तों से शेयर करने की जगह पैरंट्स को बताएं।
– उन लोगों की जानकारी रखें जिनसे आपके बच्चे ऑनलाइन चैटिंग करते हैं।
– अपने बच्चे को स्नैपचैट से दूर रखें। इसमें मैसेज तुरंत डिलीट होता है।
(इनपुट: उदित मदान और रितिशा जिंदल)

एक्सपर्ट्स पैनल:
– मदन एम. ओबेरॉय, स्पेशल पुलिस कमिश्नर
– पवन दुग्गल, साइबर लॉ एक्सपर्ट
– विराग गुप्ता, साइबर लॉ एक्सपर्ट
– डॉ. अंजलि छाबड़िया, सीनियर साइकायट्रिस्ट
– डॉ. दीपक रहेजा, सीनियर साइकायट्रिस्ट

– राजेश मित्तल के सौजन्य से

कामना, कृतज्ञता और जादू – 1 : पश्चिम तुम्हें देख अचंभित है, तुम कब झांकोगे अपने मन में पूरब वालों!!

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