रफ़ाल : रिलायंस और Dassault

पिछले दिनों एक खबर थी जो कि प्रोपेगंडा को सूट नहीं करती थी इसलिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने बताया नहीं।

प्रिंट मीडिया के बस की बात नहीं, लेकिन खबर थी तो खानापूर्ति करनी थी तो थोड़ा सा अपने News portal पर लोगों ने डाला।

खबर तो शानदार थी क्योंकि भारत के उद्योगों के बढ़ते कदम की थी…

पहली खबर ये कि अमेरिका ने एक भारत की कंपनी को पूरे एशिया क्षेत्र की अपनी US Navy की सातवीं फ्लीट के रख रखाव का जिम्मा एक भारतीय कम्पनी को दिया है।

इस फ्लीट में 100 से ज्यादा vessels हैं। पहले इसका मेंटेनेंस सिंगापुर और जापान की कंपनी करती थी। इस ऑर्डर का मूल्य 15000 करोड़ रुपये है अगले 3 वर्षों के लिए।

USA का एक सर्वे दल भारत आया और उसने भारतीय कंपनी का पूरा सर्वे किया, टेंडर में कंपनी ने सिंगापुर और जापान को पछाड़ते हुए ये आर्डर लिया।

US के अधिकारियों के अनुसार इस भारतीय कंपनी की फैसिलिटी अत्याधुनिक है, जैसी जापान वालों की है। इस कंपनी का नाम है Reliance Defence and Engineering Limited (RDEL) जो कि अनिल अम्बानी के Reliance Infrastructure Limited (RInfra) के द्वारा संचालित है।

दूसरी खबर ये है कि भारत की ही एक कंपनी ने भारतीय नौ सेना को ‘श्रुति’ और ‘साची’ नामक Naval Offshore Patrol Vessel की सप्लाई कर दी है।

इसमें 20000 KW का डीज़ल इंजन लगा है जो 25 knots की गति तक चल सकता है और एक बार बिना रुके 25000 KM तक चल सकता है।

इसमें 76 mm की Super Rapid Gun Mount (SRGM) है और 30 mm की AK-630 बंदूकें फिट की हुई हैं, जिससे छोटे और माध्यम दूरी की आक्रामक या रक्षात्मक लड़ाई लड़ी जा सकती है।

नौ सेना के अधिकारियों के अनुसार ये दोनों Patrol Vessel विश्वस्तरीय है, किसी भी रूसी – जापानी या अमेरिकन के समकक्ष।

अब ये कम्पनी ONGC आदि के लिए भी Patrol और transportation vessel बना रही है। ये कंपनी नॉर्वे, नीदरलैंड्स, डेनमार्क को वेसल करने सप्लाई का आर्डर उठा चुकी है।

इस कंपनी का नाम भी Reliance Defence and Engineering Limited (RDEL) है जो कि अनिल अम्बानी के Reliance Infrastructure Limited (RInfra) के द्वारा संचालित है।

2016 में जब भारत सरकार और फ्रांस सरकार के बीच रफाल समझौता हुआ तो Reliance का नाम आया। न्यूज़ के दलालों ने अम्बानी नाम पकड़ा दिया तो संसद से लेकर सोशल मीडिया तक अम्बानी के नाम से रोना पिटना मच गया है।

पहले तो मुझे भी रिलायंस के नाम से अचम्भा हुआ लेकिन जब इस पर तथ्य जुटाए तो कहानी कुछ और ही आती है।

भारतीय वायुसेना के लिए Dassault के बनाए Rafale आएँगे इसका फैसला 2007 में लिया गया था और बात आगे चलाई जा रही थी।

इस समय ही अम्बानी परिवार की Reliance Industries Limited ने 2007 के AGM में ये खुलासा किया कि रिलायंस अब डिफेन्स, Aerostructure, आदि में निवेश करेगा।

इस सबके बीच जब दोनों भाइयों ने बिज़नेस बांटा तो कुछ एग्रीमेंट हुए जो कि यहाँ इस मामले में फिलहाल उपयोगी नहीं हैं।

इसके बाद तत्काल Reliance ने अमेरिका के Tennessee में एक कंपनी Reliance Aerostructure की स्थापना की और बड़े स्तर पर काम शुरू कर दिया… बिना भारत के साथ समझौते का इंतज़ार किए।

इस कंपनी ने वहां निम्नलिखित तकनीकी विशेषज्ञता हासिल की –

1. Commercial and Business Aviation Integrations & Modifications के अंतर्गत Avionics Upgrades, Aircraft Addressing and Reporting System (ACARS), Terrain Avoidance Warning System (TAWS) & Enhanced Ground Proximity Warning System (EGPWS), Tropospheric Airborne Meteorological Data Reporting (TAMDAR), Emergency Locator (ELT) Weather Radar, Traffic Alert and Collision Avoidance System (TCAS), Extended-Range Twin-Engine Operational Performance Standard (ETOPS), Fire/Smoke Abatement System, Regional Aircraft Cargo Conversions, Aftermarket Install of APUs, Dash-8 Rudder Isolation MOD, Anti-Ice, Structural Modification (Composite & Sheet-metal) की सम्पूर्ण दक्षता हासिल की।

2. Government and Military Aviation Integrations & Modifications के अंतर्गत ARC-231 SATCOM, Forward Looking Infra Red Integration (FLIR), Air Warrior MCCS, SAFIRE II FLIR Upgrade, APX-118 Common Transponder, ARC-220 HF Radio, Full Authority Digital Engine Control (FADEC), I/R Strobe, UH-60 Health, Usage & Monitoring System (HUMS), Desert HUMS, Blue Force Tracker (BFT/EDM), MAVIN Cabin Heat, Pegasus IAS-E, CH-47 Common Missile Warning System (ALE-47), ALE-47 Countermeasures Dispensing System, Aircraft Wireless Intercom System (AWIS), Fast Rope Insertion and Extraction System (FRIES), Huey UH-1H-II Conversion की सम्पूर्ण दक्षता हासिल कर ली।

इस बीच हमारा HAL क्या कर रहा था पता नहीं, वो ही जाने… इधर Reliance Aerostructure ने न सिर्फ दक्षता हासिल की बल्कि अमेरिका, फ्रांस आदि के एयर फ़ोर्स को अपनी सर्विसेज़ भी देने लगा।

2012 आते आते Reliance Aerostructure एक पूर्ण रूप से Aviation Expert Technology वाली एक्सपर्ट कंपनी बन चुकी थी।

अब रिलायंस के पास न सिर्फ Naval बल्कि Air Force के जरूरतों के हिसाब से काम करने की तकनीकी उपलब्ध थी। इसलिए Dassault ने HAL दौरे के बाद और Reliance Aerostructure की expertise को देखते हुए करार में Reliance को सिर्फ प्राथमिकता देने को तैयार थी। विभिन्न कारणों से करार नहीं हो पाया UPA के जमाने में…

फिर जब 2016 में करार हुआ तो UPA से अलग ये करार कंपनी से न होकर भारत और फ्रांस सरकार के बीच हुआ जिससे प्रति जहाज 97.23 million Euro सारी तकनीकी, मिसाइल आदि के साथ मिलेगा। साथ ही 32 जगुआर और 2 मिराज भी मिलेंगे जो कि भारतीय वायु सेना के पुराने जहाजों के मेंटेंनेस में सहायक होंगे।

करार का मामला अलग करते हैं इसलिए रिलायंस पर आगे बात करते हैं –

रिलायंस किसी भी तरह से सरकारी डील में नहीं है। रिलायंस के Reliance Aerostructure के expertise देखते हुए वो Dassault को भारत में टेक्निकल सपोर्ट देगा।

वो भारत में रफाल के लिए पहले उसके Wings बनाने की फैक्ट्री डालेगा, और बाद में वो Dassualt के लिए अन्य spares भी बनाएगा जो कि विश्व भर में काम आएंगे।

ये सिर्फ Reliance और Dassault के बीच Company – to – Company की बात है जिसका सरकारों के आपसी समझौते से कुछ लेना देना नहीं है।

जैसे कि मान लीजिए आपने कोई उपकरण जैसे मोबाइल खरीदा तो उसकी service support के लिए आप किसी पास के service centre जाते हैं न कि सीधे उस कम्पनी के फैक्ट्री में जाते हैं।

इस करार में भारत की BEL, Bharat Dyanmics Limited, कांग्रेसी सैम पित्रोदा की कंपनी Samtel भी है जिनको इस करार से काम मिलने का अनुबन्ध है।

फ्रांस की कम्पनी Thales भी रिलायंस के साथ टेक्नोलॉजी का समझौता कर रही है जिससे भारत में एक JV कम्पनी बनेगी और जो नागपुर के निकट मिहन के SEZ में लगाने का प्रस्ताव है।

करार के कुल लागत का 50% Dassault भारत में निवेश करेगा जिसमे HAL, BEL, BDL, Samtel, DRDO और कुछ अन्य को संस्थानों को भी अलग components और parts की तकनीकी देगी।

इसमें से 30% भारत सरकार संस्थाओं को अनुसन्धान के लिए और 20% जरूरत के कल पुर्जे बनाने की भारत में JV के माध्यम से उत्पादन करेगी …

अगर कांग्रेस और उसके लोगों की बातों को माना जाए तो 2007 में ही जब Reliance ने एविएशन तकनीकी और डिफेन्स में घुसने की सोची तो क्या तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने टेंडर के कमर्शियल बिड खुले बिना ही बात को अम्बानी परिवार को लीक कर दिया था जिससे वो इस सेक्टर में घुस जाएँ?

अम्बानी के नाम से चीत्कार करने वाले क्या ये बताएँगे कि जिस तैयारी से Reliance इस सेक्टर में घुसी, क्या उसकी प्रोफेशनल एप्रोच के बिना संभव था कि Dassault भारत में spares और रिसर्च आदि के लिए इतने बड़े निवेश को तैयार होती? क्या Dassault किसी फेसबुकिया जो Reliance का डाटा इस्तेमाल करते हुए रोज 10 बार अम्बानी को गालियाँ दे रहा होता है उस बकबकिया को बुला के कॉन्ट्रैक्ट दे देती …

विषयों पर जरा पढ़ लिख लिया कीजिए जनाब…

संक्षेप में समझिए काँग्रेस के काम करने का तरीका

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