पावन मंत्र जो गुरु की स्तुति में कहे गए शास्त्रों में

ॐ ज्ञान मूर्तये नमः

ॐ ज्ञान योगिने नमः

ॐ तीर्थ स्वरूपाय नमः

ॐ जितेन्द्रियाय नमः

ॐ उदारहृदयाय नमः

ॐ भारत गौरवाय नमः

ॐ पावकाय नमः

ॐ पावनाय नमः

ॐ परमेश्वराय नमः

ॐ महर्षये नमः

शास्त्रों मे ज्ञानदाता, भक्ति दाता गुरु की स्तुति में बड़े सुन्दर मंत्र हैं, मंत्र इस प्रकार हैं :-

ॐ अविनाशिने नमः

ॐ सच्चिदानंदाय नमः

ॐ सत्यसंकल्पाय नमः

ॐ संयासिने नमः

ॐ श्रोत्रियाए नमः — श्रोत्रियाए – माने जो सारे शास्त्रों का रहस्य जानते है, ऐसे गुरु को हम प्रणाम करते है।

ॐ समबुद्धये नमः — वे सम बुद्धिवाले हैं, पक्षपात नहीं हैं जहाँ।

ॐ सुमनसे नमः – उनका मन कैसा, बोले मन सुमन हैं, खिले हुए फूल की तरह; खिला हुआ फूल जैसे सब को सुगंध देता हैं, ऐसे वे सबको सुगंध, दिव्य जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं, इसलिये गुरु की यह मन्त्र बोलकर स्तुति की। ॐ सुमनसे नमः – उनके संपर्क में आते रहने से हमारा मन भी सुमन हो जाता है। फूल की तरह खिला हुआ रहता है; उदास, बेचैन, उद्विग्न, परेशान नहीं रहता।

ॐ स्वयं ज्योतिषे नमः — माने साधक का भविष्य कैसे सुखद होगा, वो बता देते हैं।

ॐ शान्तिप्रदाय नमः — वो सबको शान्ति का दान करते हैं, मन की शान्ति।

ॐ श्रुतिपारगाये नमः – श्रुति माने वेद-उपनिषद।

ॐ सर्वहितचिन्ताकाय नमः — सबके हित का ख्याल करने वाले और सबके हित की बात करनेवाले गुरु को प्रणाम है।

ॐ साधवे नमः — जो सच्चे साधु हैं, सच्चे संत हैं वास्तव में, उन्हे हमारा प्रणाम हैं।

ॐ सुहृदे नमः — जो सबके सुहृद हैं, जैसे भगवान सबके सुहृद हैं, ऐसे सद्गुरु भी सबके सुहृद हैं।

ॐ क्षमाशीलाय नमः — जो क्षमाशील हैं, हमारे दोषों को माफ कर देते हैं, ऐसे गुरु को हमारा प्रणाम हैं।

ॐ स्थितप्रज्ञयाय नमः

ॐ कृतात्माने नमः

ॐ अद्वितीयाये नमः — अद्वितीय हैं, माने उनसे श्रेष्ट कोई नहीं हैं, ऐसे गुरु को हमारा प्रणाम हैं।

ॐ करुणासागराये नमः — जो करुणा के सागर हैं, ऐसे गुरु को हमारा प्रणाम हैं।

ॐ उत्साहवर्धकाय नमः

ॐ उदारहृदयाय नमः — जिनका हृदय उदार हैं, ऐसे गुरु को प्रणाम हैं।

ॐ आनंदाय नमः — आनंद और शांति का दान करनेवाले गुरु को प्रणाम हो।

ॐ तापनाशनाय नमः — आदिदैविक ताप, आदिभौतिक ताप, आध्यात्मिक ताप – इन तीन तापों को दूर करनेवाले गुरु को प्रणाम है।

ॐ दृद निश्चयाय नमः — दृद निश्चय होने की प्रेरणा देने वाले गुरु को प्रणाम है।

ॐ जनप्रियाय नमः — जो सबके प्रिय हैं, ऐसे गुरु को प्रणाम है।

ॐ छिन्नसंषयाय नमः

ॐ जितेन्द्रियाय नमः — जो जितेन्द्रिय हैं, जिनके सुमिरन से हम भी जितेन्द्रिय हो सकते हैं। इन्द्रियों को जीतनेवाले ऐसे गुरु को प्रणाम है।

ॐ द्वन्द्वातीताय नमः — जो द्वन्द्वों से परे हैं, ऐसे गुरु को प्रणाम है।

ॐ धर्मसंस्थापकाय नमः — धर्म का रहस्य बताने वाले और जन-जन के हृदय में धर्म की स्थापना करनेवाले गुरु को प्रणाम है।

ॐ नारायणाय नमः — गंगाजी कोई साधारण नदी नहीं हैं, हनुमानजी कोई साधारण वानर नहीं हैं, उसी प्रकार गुरु भी कोई साधारण नर नहीं हैं, वो साक्षात नारायण हैं।

ॐ प्रसन्नात्मने नमः — जो सदैव प्रसन्न रहते हैं और सबको प्रसन्नता बाँटते हैं, ऐसे गुरु को प्रणाम है।

ॐ धैर्यप्रदाय नमः — जिनके दर्शन से, अपने आप धैर्य और शान्ति आ जाती है।

ॐ मधुरस्वाभावये नमः — जिनका मधुर स्वभाव है, ऐसे गुरु को हमारा प्रणाम है।

ॐ बंधमोक्षकाय नमः — बंधनों से मुक्ति दिलानेवाले गुरु को प्रणाम है।

ॐ मनोहराय नमः — हमारे मन का हरण करने वाले गुरु को प्रणाम है। व्यक्ति के अन्तर मन में से संसार का आकर्षण हट जाता है, गुरु के प्रति, ईश्वर के प्रति, ईश्वर के नाम के प्रति स्वभाविक ही रुचि होने लगती है।

पुष्य नखत सिर ऊपर आवा, हौं बिनु नाह मन्दिर को छावा।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY