आपका जीवन सिर्फ आपका ही नहीं, उससे जुड़ा है पूरा परिवार

किसी की बहन या बेटी अचानक से घर से गायब हो जाये, तो उसके गायब होने का दर्द तो होता ही है, साथ ही समाज व पड़ोसी उसके बारे में बहुत उल्टा सीधा बोलने लगते हैं।

बहुत से घरों की बहन बेटियाँ किसी मनचले की शिकार होकर अश्लील वीडियो बनवाकर उसकी सैक्स स्लेव बन जाती हैं, कई बार मजबूरन कई लोगों के साथ रात गुजारनी पड़ती है।

ऐसे वीडियो पब्लिक हो जायें तो कई बार मां बाप को रहने की जगह – शहर कस्बा बदलना पड़ता है।

हर साल इस प्यार के चक्कर में फंसकर ही देश भर में 60 हजार से अधिक लड़कियां अपने प्यार से धोखा खाकर वेश्यालय में जीवन बिताने को मजबूर हो जाती हैं।

क्या कोई भी व्यक्ति अपनी बहन या बेटी का जीवन इतना बर्बाद होते देख सकता है?

पिछले दिनों में तो सैकड़ों मामले लव जिहाद के भी देखे गये जहां अपना धर्म छिपाकर लड़कों ने लड़कियों को फंसाया और बाद में उन लड़कियों की ज़िन्दगी नरक बना दी।

हमारे भारतीय समाज का तानाबाना ऐसा है कि घर की कोई लड़की इस तरह के मामले की शिकार हो जाये तो सामान्यतः पूरा परिवार बर्बाद हो जाता है। छोटी बहनों की सही घरों में शादी नहीं हो पाती।

इन सब बातों को ध्यान रख कर बताइये कि आपके घर की कोई बहन बेटी अचानक घर छोड़कर किसी के साथ गायब हो जाये, तो आप क्या करेंगे?

‘धड़क’ देखी. और मुझे हीरोइन के बाप का गुस्से वाला होना (बदमाश होना) पसन्द नहीं आया। लेकिन उससे भी गलत लगा हीरोइन का अपने परिवार को जानने के बावजूद हीरो को ‘किस’ के लिए घर आने का चैलेंज। उसके बाद हीरो को बचाते हुये घर छोड़कर भाग जाना…

ऐसी लड़कियां अधिकतर लव जिहाद का शिकार होती हैं, अक्सर उनका अंत कोठे पर होता है। और इसीलिए शायद मैं हीरोइन के बाप या भाई की जगह होता तो शायद मैं भी वही करता जो फिल्म के अन्त में हुआ।

हमारे देश की परम्परा रही है कि बहन बेटी के सम्मान के लिए लोग सिर कटाते रहे हैं और काटते भी रहे हैं। हमारी बहन बेटियों को भी यह समझना चाहिए कि उनका सम्मान और उनकी सम्मान से बीतती ज़िन्दगी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

अगर आप को किसी लड़के से प्यार हो ही गया है तो उसे अपने घरवालों से मिलवाइये, घरवालों को समझाइये। लेकिन अगर आपका परिवार अन्त तक तैयार नहीं हो पाता है तो उस लड़के को भूल जाइये। कम से कम उस लड़के के साथ घर छोड़कर तो मत ही भागिये।

फिर भी कोई लड़की घर छोड़कर भागती है तो याद रखिये ऐसी 10 में से 8 लड़कियां अन्त में कोठे पर ही पहुंचती हैं। और परिवार के सम्मान की चिन्ता न करने वाली ऐसी लड़कियों के साथ वह भी हो सकता है जो ‘धड़क’ फिल्म में होता है।

फिल्म का सन्देश गलत था, फिल्म का उद्देश्य गलत था। मैं ऐसी फिल्मों के विरोध में वोट करता हूँ।

कलाकारों की अच्छी एक्टिंग के बावजूद मेरी तरफ से ‘धड़क’ को 5 में से (सिर्फ अच्छी एक्टिंग के लिए) 1 अंक।

और हां,

जय हिंद।

दासी : लगता है कि मेरा कोई आख़िरी इम्तिहान बाकी रह गया..

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