भीड़ को सिर्फ एकता के पक्ष का ही क्यों, अन्याय के विरोध का क्यों नहीं अधिकार

Mob lynching को ले कर हर जगह पक्ष-विपक्ष में ढेरों बातें

जाने क्यों मैं अनछुई रह गई हूँ, जबकि बहुत भावुक हूँ। आँसू और सहानुभूति मेरी नाक पर रहते हैं। निश्चित ही यह चुनावी भेड़चाली बवंडर का असर है। मन में कहीं गहरे बैठ गया है कि यह सब 2019 चुनाव तक चलेगा, जब रेले आएँगे ऐसी ही खबरों के पक्ष-विपक्ष से, अपनी अपनी बातें और विचारधारा को सही ठहराने के लिए। ऐसे में यदि दो चार घटनाएँ सत्य भी हों, तो वे भी असत्य की बाढ़ में बह जाएँगी . . .

अपनी अपनी सोच है।
कुछ का कहना है कि भोजन के आधार पर आप किसी को अपराधी नहीं करार दे सकते।
यदि यह सही है, तो चाराचोर को हम चाराचोर नहीं कह सकते न !! क्यों केस चल रहा है उस पर? क्यों?

खैर, हिंसा गलत है। भीड़ का हिंसक होना निश्चित भयंकर रूप से भयभीत करने वाला है। कभी भी और कहीं भी कुछ भी हो सकता है इस तरह।

इसे रोकने के लिए कानून बनाना पड़ा न? कौन लागू करेगा इस कानून को?

पुलिस?
कोर्ट?

होता है लागू?
क्या कोई उत्तर है?

भीड़ लोगों से बनती है, जो इसी समाज के बाशिंदे हैं। जब उन्हें न्याय नहीं मिलता वर्षों तक हर तरह के नियम कानून मानने और पुलिस, कोर्ट-कचहरी घूमने भटकने-दौड़ने के बाद भी, तो उन्हें भी आता है क्रोध।

हम क्यों भूल जाते हैं कि अच्छी बातों में जब एकता (हिंदू-मुस्लिम एकता नहीं, मनुष्य मनुष्य की एकता) ढूँढी जाती है, तो दुख-क्रोध-कष्ट में कुछ लोग कैसे नहीं एक हो सकते और क्यों नहीं क्रोध और विरोध प्रकट कर सकते?

अतः उन्हें भी अपना मत प्रदर्शित करने की स्वतंत्रता है न? क्या अपना हक अधिकार और expression का freedom केवल मीडियाकर्मियों का ही है?

ऐसे में एक-आध यदि lynched हो ही गए तो कितनी छटपटाहट हो रही है भाई?

निर्भया या उसके जैसियों को जब वर्षों तक न्याय नहीं मिलता – fast track court आदि के बाद भी –

अफजल गुरु के समय आधी रात को कोर्ट खुल जाता है, लेकिन आम आदमी का केस पीढ़ी दर पीढ़ी टलता जाता है –

नन्हीं बच्चियों और बच्चों के साथ जब दुर्व्यवहार रेप होता जाता है –

अच्छे नंबरों से पास करने के बाद भी किसी विद्यार्थी को उसकी उपयुक्त जगह-नौकरी छिन जाए क्योंकि वह सवर्ण है –

अपने देश के विश्वविद्यालय में देश विरोधी नारे लगें क्योंकि ऐसा करना सेकुलरगिरी है –

फौज को गालियाँ दी जाएँ अपना काम करने के लिए –

केवलमात्र मुसलमान होना पासपोर्ट बन जाए हर गलत काम /बात कर के बिना खरोंच छूट जाने का –

तो lynching बनती है, शक नहीं!!

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