मॉब लिंचिंग : मीडिया एक लाशखोर कुनबा और अराजकता इसका टॉनिक

जब भी कोई जो तस्कर मारा जाता है तो लिंचिंग की खबर खूब चलने लगती है। मैं कुछ समय से ऐसे मामलों को फॉलो कर रहा हूँ।

IndiaSpend ने कुछ डाटा जारी किया, जिसके मुताबिक़ 28 गो-तस्करों की हत्या कर दी गई और 124 अन्य लोगों को मीडिया द्वारा तथाकथित ‘गौ रक्षकों’ द्वारा इन हमलों में घायल कर दिया गया

28 मारे गए, 24 मुसलमान थे… इन मौतों का विवरण Human Rights Watch में सूचीबद्ध और पंजीकृत किया गया है। लेकिन सिक्के का एक दूसरा पहलू भी है… पहले आइए 2014 के बाद से डेटा पर नज़र डालते है :

7 फरवरी 2014 : बरेली में मवेशी तस्करों ने दो ग्रामीणों को मार डाला। रिपोर्ट कहती है, ‘निवासियों ने आरोप लगाया कि यह पहला मामला नहीं है क्योंकि अतीत में कई बार ऐसे असफल प्रयास किए गए हैं… ग्रामीणों ने पहरा लगाया था और तस्कर दिखते ही अलार्म बजाया जिससे गिरोह को भागने के लिए मजबूर हुए, लेकिन इस बार दो ग्रामीणों का क़त्ल करने के बाद।”

Now cattle smugglers kill two in UP ministers village

1 मई 2014 : गुड़गांव के बलियावास में पकड़े जाने के बाद तस्करों ने ग्रामीणों और पुलिस पर गोलियाँ दागी… बाद में इनको पुलिस द्वारा पकड़ लिया गया और आबिद और उमर के रूप में इनको पहचाना गया। (दैनिक ट्रिब्यून की रिपोर्ट)

24 जून 2014 : शाहजहांपुर में पशु तस्करों ने किसान पर गोलियां चलाई क्योंकि उसने अपनी गाय चुराने वालों को पकड़ने की कोशिश की।

20 फरवरी, 2015 : मथुरा में मवेशी तस्कर एक हेड कांस्टेबल सहित दो पुलिसकर्मियों को मार देते हैं, जब पुलिस ने अज़ीज़पुर गांव के पास गायों को लेकर एक वाहन को रोकने की कोशिश की।

10 सितंबर, 2015 : मवेशी तस्कर ने बरेली के फ़रीदाबाद में एक उप-निरीक्षक, मनोज मिश्रा को गोली मार दी।

2 cops killed in attack by cow smugglers in up

और दूसरा

Cattle smugglers shot at sub inspector, dies

10 अक्टूबर 2015 : बजरंग दल सदस्य प्रशांत पुजारी जो अवैध गौ हत्या और गायों की तस्करी को रोकने में सक्रिय रूप से शामिल थे, उनकी गौ तस्करों द्वारा हत्या कर दी गई थी… पुलिस ने बाद में मोहम्मद इम्तियाज़ गनतलकाटते को केस में गिरफ्तार किया।

Tension in Moodbidri after murder

9 जनवरी 2016 : मवेशी तस्करों ने पश्चिम बंगाल में एक BSF कांस्टेबल को मार डाला।

1 जून 2016 : अपनी गाय चुराने को रोकने की कोशिश करने पर एक 16 साल की बच्ची को गौ चोरों द्वारा मृत गोली मार दी गई… एटा जिले में हुई घटना।

6 जून 2016 : उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले में गौ तस्करों द्वारा पुलिस का मुखबिर होने के शक पर एक चौकीदार दाता राम को मार डाला। आरोपी को बाद में जाकिब और इफ्तिकार के रूप में पहचाना गया।

19 जून 2016 : गौ तस्कर ने आगरा के फिरोज़ाबाद जिले में एक दलित को दौड़ा-दौड़ा कर मार डाला जब उसने अपने मवेशियों को चोरी करने से रोकने की कोशिश की।

5 अगस्त 2016 : मवेशी तस्कर ने जौनपुर, यूपी में त्रिलोकी तिवारी नामक 56 वर्षीय कांस्टेबल के ऊपर एक पिक-अप वैन चढ़ा दी।

22 अक्टूबर 2016 : मवेशी तस्कर ने पानीपत, हरियाणा में एक किसान पर गोली चलाई क्योंकि उन्होंने तस्करों को रंगे हाथ पकड़ लिया था।

2 नवंबर 2016 : मवेशी तस्कर ने अपनी भैंसों को चोरी रोकने का प्रयास करने पर एक महिला को गोली मार दी… यह यूपी के एटा जिले के ग्रामीण कोतवाली क्षेत्र के असरौली गांव की घटना है।

25 जून 2017 : मवेशी तस्कर ने सहारनपुर में पुलिस पर वाहन पर चढ़ाने की कोशिश की… आरोपी को एहसान के रूप में पहचाना गया।

2 जुलाई 2017 : एक किसान चरण सिंह द्वारा अपनी भैंस को बचाने की कोशिश करने पर सशस्त्र पशु-चोरों ने गोली मारकर हत्या कर दी यह आगरा के कोटरेकापुरा गांव की घटना है।

इस तरह की अनेकों रिपोर्ट और उनके साथ जुड़ी हुई हर चीज उपलब्ध है। अतः और उदाहरणों को रोकते हैं, लेकिन इस नीचे वाले लिंक को ज़रूर पढ़ें…

Rajasthan: Cow smugglers open fire at police, policeman injured

अगर आप सभी हत्याओं को जोड़ते हैं, तो आपको पता चलेगा कि पशु तस्करों की तरफ से बहुत हत्याएं हुई हैं।

आश्चर्य की बात यह है कि इन किसानों, गौ पालकों और पुलिस की हत्या के जुर्म को ‘आपराधिक अधिनियम’ के रूप में पंजीकृत किया जाता है, वे किसी भी ‘Human Rights Watch’ में नहीं आते।

ये घटनाएं स्थानीय पत्रों द्वारा रिपोर्ट की जाती हैं और कभी भी राष्ट्रीय समाचार पत्र इसको नहीं उठाते क्योंकि एक विशेष वर्ग और मीडिया पूरी तरह से anti-Hindu नैरेटिव गढ़ने में और अपना एजेंडा फैलाने में व्यस्त है।

मानते हैं कि किसी भी सभ्य समाज में हत्या निंदनीय है… लेकिन क्या ये लिंचिंग है… पशु माफिया द्वारा नियमित रूप से लुट रहे हैं किसान और गरीब।

आइए समझते हैं कुछ और…

मैं गावों, कस्बों, शहरों की पगडण्डियों और सडकों पर घूमने वाला एक आम इंसान हूँ। लोगों के पास गौ वाला मामला सही ढंग से नहीं पहुंचा है, तो सोचा आज डाटा के साथ बता दूँ।

मान लीजिये कि किसी गाँव में 3-5 बीघे ज़मीन वाला कोई काश्तकार है और उसके पास एक जोड़ी गाय – भैंस है… ये रोज़ 20 लीटर दूध देती हैं जिसमें से 3 लीटर अपने बच्चों के लिए बचा के बाकी बेच देता है।

इससे उसके परिवार की ज़रूरतें पूरी होती हैं और वो ठीक-ठाक आम जीवन व्यतीत करता है। फिर अचानक एक दिन गाय और भैंस चोरी हो जाती है, बच्चों के मुंह से दूध और रोज़ का उसकी आमदनी का जरिया चला जाता है।

एक झटके में उसे 1 लाख रूपए मूल्य के पशुधन का नुकसान भी हो जाता है। अब उसके पास घुट घुट के जीने के सिवाय या फिर आत्महत्या करके आपके माथे पर ‘किसान आत्महत्या’ का एक टीका और चिपका देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।

उसका तो सब उजड़ गया लेकिन जिन्होंने पशु चोरी किये, उन्होंने अपने लपलपाती जीभ की आग बुझा ली या फिर कुछ हज़ार के एवज में कटाई घर को बेच दिया, या फिर बिहार बंगाल होते हुए बांग्लादेश में भेज दिया।

गाँव का काश्तकार रोज़ रोज़ अपने पशुधन चोरी हो जाने के डर में जीता है। कमोबेश गाँव के हर परिवार को इसी डर में जीना पड़ रहा है। इसलिए हर घर के एक बच्चे को गाँव के अन्य बच्चों के साथ रात में पहरेदारी पर लगा दिया है जिससे गाँव के लोगों के पशुधन की सुरक्षा हो सके।

वे रात भर गाँव की सीमा पर घूम घूम के लाठी और टॉर्च लेकर पहरेदारी करते हैं। ऐसे में अगर कभी कोई पशु चोर दिख जाता है तो ये उसको पकड़ के पीट देते हैं और पुलिस के हवाले कर देते हैं।

अभी तक कोई पशु चोर हमारे हाथों मारा नहीं गया है… बस पीटा गया है… लेकिन वो पशु चोरी भी करे और गोली भी मारे तो उसका कुछ तो इलाज़ करना होगा। आप सीतापुर, बाराबंकी, आगरा, पलवल, रेवाड़ी, सहारनपुर, गोरखपुर आदि से इन आकंड़ों को मंगवा लीजिये।

जो पशु चोरी होते हैं वो सिर्फ हिन्दुओं के ही नहीं होते, भैंस तो आज़म खान की भी खोल ली गयी थी लेकिन वो बड़े आदमी ठहरे उनकी भैंस 24 घंटे में पुलिस बरामद करा लाई।

लेकिन गरीब क्या करें, जिनका नाम भीखू, रामखेलावन, करतार और बसेसर है। वो लाठी लेकर पहरेदारी करते हैं। जब कोई पशु चोर पकड़ते हैं तो उसका वीडियो नहीं बनाते, रात में ठीक से कैसे वीडियो बनाएँ किसी को समझ ही नहीं आएगा।

और दिन में जिनको पकड़ते हैं बस उतना उनको पीटते हैं जितने में कि वो मरे न और फिर उसके बाद सीधे पुलिस के हवाले कर देते हैं। अगर चोर मर जाएंगे, तो मारने वाले जेल भी जाएंगे, बच्चों और परिवार का क्या होगा? इसलिए पशु चोर बहुत बड़े सिरदर्द हैं।

भारत की एक मूढ़ बिरादरी है जिसको मीडिया बोलते हैं, उनके चक्कर में न पड़िए। ये फ़र्ज़ी के खबर के सौदागर हैं, एक-दो लाश गिरने के बाद इनको मज़ा आता है। इन चोरों और दलालों की रिपोर्टिंग पर अपनी राय बिलकुल नहीं बनाइये। इनको तो आप किसी अभागे की तरह एक कोने पड़े रहने दीजिये। ये लाशखोर कुनबा है। इनका टॉनिक अराजकता है।

और अंत में एक बात और… इतना इंतज़ाम करवा दीजिये कि अवैध पशु कटाई बंद हो देश भर में। पशु पालन करने वाले के पशु चोरी न हों, इसलिए पशु चोरों और तस्करों को पकड़ के अंदर करिये।

ममता बनर्जी बंगाल का कैटल कॉरिडोर बंद करा दीजिये, जहाँ से ये तस्करी होती है। पशु तस्करों को पशु चुराने का अंजाम भुगतने का इंतज़ाम कराइये। आज तक एक भी पशु तस्कर पकड़ने की खबर नहीं आई है।

जब पशु चोरी बंद होगी, हम भी चोरों को कूटना बंद कर देंगे और हमारे बच्चे रात को लाठी टॉर्च लेकर भटकने की जगह आराम से घर में सोयेंगे।

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