हिंसक भीड़ से हारता क़ानून, या समाज को हिंसक बनाती विधायिका, कार्य पालिका और न्याय पालिका

आज के दैनिक जागरण में एन के सिंह का लेख, जिसका शीर्षक ‘हिंसक भीड़ से हारता क़ानून’ है। उनके शब्दों में ख़ासे बड़े, मगर कथ्य में टटपूँजिया लेख का लुब्बो-लुबाब ये है कि अलवर में भीड़ के हाथों गो-तस्करी के संदेह में मारा गया अकबर ख़ान उस दिन मारा गया जब संसद में अविश्वास प्रस्ताव … Continue reading हिंसक भीड़ से हारता क़ानून, या समाज को हिंसक बनाती विधायिका, कार्य पालिका और न्याय पालिका