राहुल गांधी का ‘राफ़ेल-दर्द’ और मोदी के भारत का राफ़ेल, जैगुआर, मिराज 2000

जब से मोदी सरकार ने फ्रांस से राफ़ेल विमानों को लेकर नई शर्तो के आधार सौदा किया है तभी से ही कांग्रेस को बड़ी बेचैनी रही है।

वे इतना बेचैन थे कि सुरक्षा से जुड़े इतने संवेदनशील विषय को गंभीरता से न लेकर, सिर्फ उसे अपनी ओछी राजनीति के लिये विवादास्पद बना दिया।

इतना ही नहीं, विदेशी शक्तियों को परोक्ष मदद देने के लिये कांग्रेस समेत विपक्ष व मीडिया में बैठे उनके दलालों ने बराबर कोशिशें कीं कि मोदी सरकार को दबाव में लाकर यह सार्वजनिक करवाया जाए कि सौदे की क्या क्या शर्ते जोड़ी या घटाई गई हैं।

इसी क्रम में भ्रम की स्थिति बनाये रखने के लिये हर तरह के अनर्गल आरोप व भ्रष्टाचार के संदेह को प्रचारित कराया है।

कांग्रेस के लिये यह राफ़ेल सौदा कितनी बड़ी दुखती रग है यह इसी से पता चलता है कि सदन में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी इस सौदे को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति मक्रोन को भी घसीट लाये और उनको लेकर अपनी हुई वार्ता को लेकर सरासर झूठ बोल गये, जिसका खंडन फ्रांस की सरकार को करना पड़ा।

अब राहुल गांधी या और किसी को राफ़ेल सौदे को लेकर क्या क्या परेशानी है इस पर तो मैं कुछ नही कहूँगा लेकिन फ्रांस द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को झूठा बताने के बाद फ्रांस ने, राफ़ेल सौदे से जो भारत और फ्रांस के बीच जो सदभावना का संचार हुआ है उसको दृढ़ करने के लिये, भारत को 32 जैगुआर और 2 मिराज 2000 युद्धक विमान बिल्कुल मुफ्त देने की घोषणा की है।

यह लड़ाकू विमान भले ही नये नहीं है लेकिन इसकी भारत की वायुसेना के लिये उपयोगिता बेहद महत्वपूर्ण है। भारत के पास 118 जैगुआर विमान है जिनका अब उत्पादन होना बंद हो गया है और उसके कल पुर्जे एक समस्या है।

यह 32 जैगुआर विमान जहां 118 विमानों के स्क्वाड्रन को मजबूत करेंगे वही यह इन जैगुआर विमान के कल पुर्जो के लिए विकल्प बनेंगे। इसी तरह यह 2 मिराज 2000 भी भारत के मिराज 2000 विमान स्क्वार्डन के लिये कल पुर्जो के लिये विकल्प हैं।

यहां लोगों को शायद आयातित लड़ाकू विमानों के कलपुर्जो को लेकर उसकी उपलब्धता व महंगी कीमत का अनुमान नहीं होगा लेकिन किसी राष्ट्र के लिये सैन्य शक्ति बने रहना इस बात पर नहीं निर्भर करता है कि उसके पास कौन कौन सी युद्ध सामग्री है बल्कि इस बात पर है कि उनके पास उन युद्ध सामग्री के अनुरक्षण के लिये क्या क्या साधन उपलब्ध हैं।

मुझे जब इस समाचार के बारे में पहली बार आधिकारिक रूप से पता चला था तब मैंने अपने ससुराल वालों से (मेरी पत्नी की तरफ से 42 लोग सेवानिवृत से लेकर वर्तमान में भारतीय सेना के तीनों अंग की सेवा में है) इस सबन्ध में बात की तो वे इसको भारत की सेना के लिये भारत के प्रधानमंत्री की बहुत बड़ी उपलब्धि बता रहे है।

खैर जितने मुंह उतनी बात तो होगी ही, लेकिन इतनी बात तो तय है कि कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के भारत की संसद में बोले गये झूठ को, फ्रांस ने भारत की मीडिया और कांग्रेसी गुलामों से ज्यादा गंभीरता व आक्रोशित हो कर लिया है।

फ्रांस ने जो निर्णय लिया है, इसे प्रतीकात्मक कह लें या फिर प्रतिघातात्मक कह लें, लेकिन यह निश्चित है कि जहां फ्रांस ने अंतराष्ट्रीय परिदृश्य में कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के झूठ को नंगा करके, गांधी परिवार और उसके दासों को अप्रासंगिक बना दिया है, वहीं अपने भाव से वहां मोदी जी के भारत को प्रासंगिक बना दिया है।

पप्पू निकला बोफोर्स ले के

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